नईदिल्ली 11 अक्टूबर 2026 (राजेशकुमारदास): यदि आप भी रोजाना खरीदारी या ऑनलाइन भुगतान के लिए Google Pay, PhonePe या Paytm जैसे यूपीआई (UPI) ऐप्स का इस्तेमाल करते हैं, तो आपके लिए यह खबर काम की है। 15 अक्टूबर से यूपीआई से जुड़ी एक नई व्यवस्था के तहत कुछ बड़े मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लागू किए जाने की बात कही गई है, जिसके बाद से लोगों के मन में यह सवाल उठ रहा है कि क्या अब डिजिटल पेमेंट करना महंगा हो जाएगा?
क्या है MDR और ग्राहकों पर इसका असर?
क्या है एमडीआर (MDR): MDR वह चार्ज होता है जो डिजिटल पेमेंट स्वीकार करने वाले कारोबारियों (मर्चेंट्स) से लिया जाता है।
क्या ग्राहकों को देना होगा अतिरिक्त चार्ज: इस नई व्यवस्था में ग्राहकों से सीधे तौर पर किसी भी तरह का प्लेटफॉर्म चार्ज लेने का प्रावधान शामिल नहीं है। 15 अक्टूबर से 2,000 रुपये से अधिक के कुछ मर्चेंट UPI ट्रांजैक्शन पर 0.4% MDR लागू होने की बात है, जिसकी अधिकतम सीमा 300 रुपये तय की गई है।
व्यापारियों पर बोझ: इस चार्ज का भुगतान केवल व्यापारियों (मर्चेंट्स) को करना होगा। नियमों के तहत इसे ग्राहकों से अतिरिक्त शुल्क के रूप में वसूलने की अनुमति नहीं दी गई है।
यूपीआई लेनदेन के आंकड़े और आरबीआई का रुख
नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) के आंकड़ों के मुताबिक, देश में डिजिटल पेमेंट का दायरा लगातार मजबूत बना हुआ है। सितंबर महीने में UPI के जरिए कुल 2,407 करोड़ ट्रांजैक्शन दर्ज किए गए, जबकि अगस्त में यह संख्या 2,450 करोड़ थी। हालांकि कुल लेनदेन की संख्या और मूल्य में आंशिक गिरावट आई है, लेकिन उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि यह मुख्य रूप से अगस्त में 31 दिन और सितंबर में 30 दिन होने के कारण है, जबकि रोजाना का औसत लेनदेन स्थिर बना हुआ है।
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के गवर्नर संजय मल्होत्रा के मुताबिक, MDR के रूप में मामूली शुल्क लागू होने से UPI ट्रांजैक्शन की कुल संख्या पर कोई बड़ा नकारात्मक असर पड़ने की उम्मीद नहीं है। वर्तमान में लेनदेन की मात्रा में किसी बड़ी गिरावट के संकेत भी नहीं दिख रहे हैं, जिससे साफ है कि आम लोगों के लिए डिजिटल पेमेंट का सफर पहले की तरह ही आसान और सुरक्षित रहने वाला है।