नई दिल्ली, 15 अक्टूबर 2026 (चौधरी प्रभजीत सिंह): भारत के पूर्व राष्ट्रपति, प्रख्यात वैज्ञानिक और देश के युवाओं के प्रेरणास्रोत डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम की जयंती पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित कई प्रमुख नेताओं ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। इस अवसर पर देश के अंतरिक्ष कार्यक्रम, मिसाइल तकनीक, रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता और वैज्ञानिक अनुसंधान को आगे बढ़ाने में उनके योगदान को याद किया गया। डॉ. कलाम का जीवन आज भी विद्यार्थियों, वैज्ञानिकों और युवाओं को बड़े लक्ष्य निर्धारित करने तथा मेहनत और समर्पण के साथ आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है।
पी.एम. मोदी ने याद किया डॉ. कलाम का प्रेरणादायक जीवन
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने डॉ. कलाम को श्रद्धांजलि देते हुए राष्ट्र निर्माण में उनके योगदान और प्रेरणादायक व्यक्तित्व को याद किया। डॉ. कलाम ने विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में अपनी उपलब्धियों के साथ-साथ शिक्षा और युवा सशक्तीकरण पर भी विशेष जोर दिया। उनका मानना था कि देश का भविष्य उसकी युवा पीढ़ी की सोच, ज्ञान और नवाचार की क्षमता पर निर्भर करता है।
‘मिसाइल मैन’ के रूप में मिली अंतरराष्ट्रीय पहचान
डॉ. कलाम को भारत के मिसाइल विकास कार्यक्रम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के कारण ‘मिसाइल मैन ऑफ इंडिया’ के नाम से जाना जाता है। उन्होंने रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) और भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं।
भारत के उपग्रह प्रक्षेपण यान एसएलवी-3 के परियोजना निदेशक के रूप में उन्होंने देश की अंतरिक्ष क्षमता को मजबूत करने में योगदान दिया। जुलाई 1980 में एसएलवी-3 के माध्यम से रोहिणी उपग्रह को पृथ्वी की कक्षा में स्थापित करना भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम की एक महत्वपूर्ण उपलब्धि थी।
इसके अलावा, अग्नि और पृथ्वी जैसी मिसाइलों के विकास से जुड़े कार्यक्रमों में उनकी भूमिका ने भारत की रक्षा तकनीक को आगे बढ़ाने में मदद की।
राष्ट्रपति भवन तक पहुंचा एक साधारण परिवार का बेटा
डॉ. अवुल पकिर जैनुलाब्दीन अब्दुल कलाम का जन्म 15 अक्टूबर 1931 को तमिलनाडु के रामेश्वरम में हुआ था। साधारण परिवार में जन्मे कलाम ने शिक्षा, अनुशासन और निरंतर मेहनत के बल पर विज्ञान की दुनिया में अपनी अलग पहचान बनाई।
उन्होंने 2002 से 2007 तक भारत के 11वें राष्ट्रपति के रूप में देश की सेवा की। राष्ट्रपति बनने के बाद भी उनकी पहचान एक सरल, विनम्र और विद्यार्थियों से जुड़ाव रखने वाले व्यक्तित्व के रूप में बनी रही। वे स्कूलों और शिक्षण संस्थानों में जाकर विद्यार्थियों से संवाद करते तथा उन्हें वैज्ञानिक सोच अपनाने के लिए प्रेरित करते थे।
किताबों के जरिए युवाओं को दिया बड़े सपने देखने का संदेश
डॉ. कलाम एक वैज्ञानिक होने के साथ-साथ लोकप्रिय लेखक और प्रेरक वक्ता भी थे। उनकी आत्मकथा Wings of Fire, पुस्तक Ignited Minds और India 2020 ने युवाओं के बीच व्यापक लोकप्रियता हासिल की।
इन पुस्तकों में उन्होंने शिक्षा, तकनीकी विकास, राष्ट्रीय प्रगति और युवा शक्ति की भूमिका पर अपने विचार प्रस्तुत किए। उनका संदेश था कि ज्ञान, दृढ़ संकल्प और निरंतर प्रयास से कठिन लक्ष्यों को भी हासिल किया जा सकता है।
27 जुलाई 2015 को हुआ था निधन
डॉ. कलाम का निधन 27 जुलाई 2015 को शिलांग में भारतीय प्रबंधन संस्थान (IIM Shillong) में विद्यार्थियों को व्याख्यान देते समय हुआ था। उस समय वे 83 वर्ष के थे। उनका जीवन के अंतिम क्षणों तक विद्यार्थियों के बीच रहना शिक्षा और युवा पीढ़ी के प्रति उनके समर्पण का प्रतीक माना जाता है।
उनकी जयंती पर उन्हें याद करना केवल एक महान वैज्ञानिक को श्रद्धांजलि देना नहीं, बल्कि वैज्ञानिक दृष्टिकोण, शिक्षा, नवाचार और राष्ट्र निर्माण के उन मूल्यों को आगे बढ़ाने का अवसर भी है, जिनके लिए डॉ. कलाम जीवनभर प्रयासरत रहे।






