अमेरिका, 15 अक्टूबर 2026 (गुरमीत सिंह तुंग): अमेरिका में H-1B वीजा पर काम कर रहे भारतीय आईटी पेशेवरों के सामने नौकरी छूटने के बाद आर्थिक और आव्रजन संबंधी चुनौतियां खड़ी हो रही हैं। नई नौकरी हासिल करने में देरी होने पर कुछ परिवारों को भारत लौटने का विकल्प चुनना पड़ रहा है। इस स्थिति में अमेरिका में खरीदे गए घर, कारों की किस्तें, होम लोन और अन्य वित्तीय जिम्मेदारियां उनके लिए बड़ी परेशानी बन रही हैं।
नौकरी जाने के बाद 60 दिनों की समयसीमा अहम: H-1B वीजा अमेरिकी कंपनियों को विशेष कौशल वाले विदेशी पेशेवरों को नियुक्त करने की अनुमति देता है। नौकरी समाप्त होने की स्थिति में पात्र कर्मचारियों को आम तौर पर अधिकतम 60 दिनों की ग्रेस अवधि मिल सकती है। हालांकि, यह अवधि उनके अधिकृत प्रवास की शेष अवधि से भी सीमित हो सकती है।
इस दौरान कर्मचारियों को नया नियोक्ता तलाशने, वीजा से जुड़ी आवश्यक प्रक्रिया पूरी करने या अपनी आव्रजन स्थिति बनाए रखने के अन्य कानूनी विकल्पों पर विचार करना पड़ता है। समयसीमा के भीतर उचित विकल्प नहीं मिलने पर अमेरिका में रहने की योजना प्रभावित हो सकती है।
टेक्सास में भारतीय परिवारों के सामने आर्थिक संकट: रिपोर्ट में टेक्सास के डलास के उत्तर में स्थित सेलिना और मेलिसा जैसे इलाकों में रहने वाले भारतीय परिवारों की परेशानियों का उल्लेख किया गया है। दावा है कि 10 से अधिक परिवारों को नौकरी जाने और नया रोजगार नहीं मिलने के कारण कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ा।
कुछ परिवारों ने भारत लौटने के लिए एकतरफा हवाई टिकट खरीदे। इस दौरान घरों, कारों और घरेलू सामान को लेकर फैसले करना उनके लिए मुश्किल हो गया। जिन परिवारों ने अमेरिका में घर खरीदने के लिए लंबे समय तक होम लोन चुकाने की प्रतिबद्धता ली थी, उनके लिए अचानक देश छोड़ना विशेष रूप से चुनौतीपूर्ण साबित हो सकता है।
घर की किस्तें और संपत्ति बेचना बनी बड़ी चुनौती: अमेरिका में घर खरीदने वाले कई परिवारों के लिए नौकरी छूटने के बाद नियमित आय का बंद होना सबसे बड़ी चिंता है। होम लोन की किस्तें, प्रॉपर्टी टैक्स, बीमा और अन्य खर्च आम तौर पर जारी रहते हैं, भले ही परिवार की आय प्रभावित हो जाए।
यदि घर की बाजार कीमत गिरती है, तो उसे बेचकर बकाया कर्ज चुकाना भी कठिन हो सकता है। इसके अलावा, जल्दी में संपत्ति बेचने पर अपेक्षित कीमत नहीं मिलने का जोखिम रहता है। ऐसे में भारत लौटने का फैसला केवल रोजगार से जुड़ा मामला नहीं रह जाता, बल्कि लंबे समय की वित्तीय योजना को भी प्रभावित करता है।
भारतीय पेशेवरों की वापसी के आंकड़ों पर पुष्टि जरूरी: रिपोर्ट में एक्सफेनो और आव्रजन संबंधी आंकड़ों के हवाले से दावा किया गया है कि जून तक लगभग 7,300 भारतीय आईटी पेशेवर वापस लौट चुके थे, जबकि वर्ष 2025 के लिए यह संख्या 15,100 बताई गई है। हालांकि, इन आंकड़ों के आधार, समयावधि और स्वतंत्र पुष्टि की जानकारी स्पष्ट होना जरूरी है। इसलिए इन्हें अमेरिका से लौटने वाले सभी भारतीय H-1B कर्मचारियों की प्रमाणित कुल संख्या नहीं माना जाना चाहिए।
टेक्सास के आवास बाजार पर भी असर की चर्चा: रिपोर्ट में कोलिन काउंटी में घरों की कीमतों में सालाना 9 प्रतिशत गिरावट का दावा किया गया है। इसके साथ ही एक बिल्डर की दक्षिण एशियाई खरीदारों को होने वाली बिक्री में कमी और 125 घरों के बिना बिके रहने का उल्लेख भी है। इन दावों की पुष्टि के लिए संबंधित आवास बाजार के आधिकारिक आंकड़ों और बिल्डर के रिकॉर्ड की जांच आवश्यक है।
किसी क्षेत्र में घरों की कीमतों या बिक्री में बदलाव के पीछे ब्याज दरों, आपूर्ति, मांग और स्थानीय आर्थिक परिस्थितियों सहित कई कारण हो सकते हैं। इसलिए इन बदलावों को केवल भारतीय पेशेवरों की वापसी से जोड़ना उचित नहीं होगा।
रोजगार और वीजा की अनिश्चितता से भविष्य की योजनाएं प्रभावित: अमेरिका में काम करने वाले भारतीय पेशेवरों के लिए नौकरी की स्थिरता, वीजा की शर्तें और परिवार की वित्तीय सुरक्षा एक-दूसरे से जुड़ी हुई हैं। रोजगार समाप्त होने पर सीमित समय में नया विकल्प तलाशने का दबाव बढ़ सकता है, जबकि घर और अन्य संपत्तियों से जुड़ी जिम्मेदारियां तुरंत खत्म नहीं होतीं।
ऐसे में H-1B कर्मचारियों के लिए रोजगार संबंधी अनिश्चितता के साथ-साथ आव्रजन नियमों को समझना, वित्तीय जोखिमों का आकलन करना और जरूरत पड़ने पर योग्य कानूनी सलाह लेना महत्वपूर्ण हो जाता है।