नई दिल्ली, 05 नवंबर,2026 (छत्रपाल सिंह): देशभर में चीनी की कीमतों में लगातार तेजी देखने को मिल रही है। पिछले एक महीने के दौरान खुदरा और थोक बाजार में चीनी के दाम 4 रुपये प्रति किलो से अधिक बढ़ गए हैं। वहीं, पिछले एक साल में कीमतों में 12 से 13 रुपये प्रति किलो तक का इजाफा दर्ज किया गया है। इससे आम उपभोक्ताओं के घरेलू बजट पर अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है।
उपभोक्ता मामले मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, देश में चीनी का औसत खुदरा मूल्य बढ़कर 59.50 रुपये प्रति किलो हो गया है, जबकि थोक बाजार में इसकी औसत कीमत 55.40 रुपये प्रति किलो दर्ज की गई है। प्रमुख महानगरों में कोलकाता सबसे महंगा शहर रहा, जहां 3 नवंबर को चीनी का खुदरा भाव 65 रुपये प्रति किलो पहुंच गया। इसी अवधि में दिल्ली में चीनी 64 रुपये और मुंबई में 61 रुपये प्रति किलो बिक रही थी।
उत्पादन में कमी और बढ़ती मांग से कीमतों पर दबाव
चीनी की कीमतों में तेजी के पीछे कई कारण बताए जा रहे हैं। इनमें 2025-26 सीजन के दौरान अनुमान से कम उत्पादन, गन्ने की फसल को नुकसान, त्योहारी सीजन में बढ़ी मांग और अंतरराष्ट्रीय बाजार में आपूर्ति की कमी प्रमुख हैं। इसके अलावा बाजार में जमाखोरी की आशंका ने भी कीमतों पर दबाव बढ़ाया है।
विशेषज्ञों के अनुसार, जब उत्पादन में कमी आती है और बाजार में मांग बढ़ती है, तो उपलब्ध स्टॉक पर दबाव पड़ता है। इसका सीधा असर थोक और खुदरा कीमतों पर दिखाई देता है। त्योहारी मांग के दौरान मिठाइयों और अन्य खाद्य उत्पादों में चीनी की खपत बढ़ने से भी बाजार में तेजी बनी हुई है।
कीमतों पर नियंत्रण के लिए सरकार के कदम
बढ़ती कीमतों को नियंत्रित करने और घरेलू बाजार में पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए केंद्र सरकार ने कई कदम उठाए हैं। इनमें चीनी के भंडारण पर सीमा निर्धारित करना, आयात की निगरानी बढ़ाना और चीनी मिलों में गन्ने की पेराई जल्द शुरू करवाने जैसे उपाय शामिल हैं। इन कदमों का उद्देश्य बाजार में आपूर्ति बनाए रखना और अनावश्यक मूल्य वृद्धि पर अंकुश लगाना है।
नए पेराई सीजन में 8.45 लाख टन चीनी का उत्पादन
वर्ष 2026-27 के नए चीनी सीजन में उत्पादन गतिविधियां शुरू हो चुकी हैं। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, 30 अक्टूबर तक देश की 152 चीनी मिलों में कुल 8.45 लाख टन चीनी का उत्पादन किया जा चुका था। इस सीजन में गन्ने की पेराई 8 अक्टूबर से शुरू हुई थी।
आने वाले दिनों में अधिक चीनी मिलों के संचालन में आने और पेराई की रफ्तार बढ़ने से उत्पादन तथा बाजार में उपलब्धता की स्थिति स्पष्ट होगी। फिलहाल उपभोक्ताओं को चीनी की बढ़ती कीमतों से राहत मिलने का इंतजार है।






