पटियाला, 3 अक्टूबर, 2026 (छत्रपाल सिंह): भाषा विभाग पंजाब द्वारा आधुनिक काल के अग्रणी पंजाबी कवि एवं पंजाबी के प्रथम उपन्यासकार भाई वीर सिंह को समर्पित साहित्यिक गोष्ठी डॉ. बलवीर सिंह साहित्य सदन (पंजाबी यूनिवर्सिटी कैंपस), देहरादून में आयोजित की गई। इस अवसर पर पंजाबी यूनिवर्सिटी, पटियाला के कुलपति डॉ. जगदीप सिंह मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। श्री हेमकुंड साहिब ट्रस्ट के चेयरमैन स. नरेंद्रजीत सिंह बिंद्रा विशेष अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।
जगत गुरु नानक यूनिवर्सिटी, पटियाला के पंजाबी विभाग के प्रमुख डॉ. अमरजीत सिंह और प्रो. कमलवीर सिंह ने भाई वीर सिंह के व्यक्तित्व एवं रचनाओं के विभिन्न पहलुओं पर अपने विचार व्यक्त किए। जिला भाषा अधिकारी, फरीदकोट मनजीत पुरी ने आए हुए अतिथियों का स्वागत किया तथा विभाग की गतिविधियों और योजनाओं के बारे में जानकारी दी।
युवा चिंतक प्रो. कमलवीर सिंह ने ‘औपनिवेशिक दौर में भाई वीर सिंह की रचनाएं’ विषय पर विचार प्रस्तुत करते हुए कहा कि भाई साहिब आधुनिक पंजाबी साहित्य के निर्माणकर्ताओं में से एक थे। उन्होंने अंग्रेजी साम्राज्य की औपनिवेशिक नीतियों के नकारात्मक पक्षों को अपनी रचनाओं के माध्यम से उजागर किया। उनका दर्शन उस समय के आम जनमानस की मानसिक जड़ता को तोड़ने वाला और नए नायकों का सृजन करने वाला था। इसके समानांतर उन्होंने सिख धर्म के विभिन्न पहलुओं पर भी उच्च स्तर का साहित्य सृजित किया।
दूसरे वक्ता डॉ. अमरजीत सिंह ने कहा कि भाई वीर सिंह के साहित्य की सभी परतों को एक समग्र दृष्टिकोण से समझने की आवश्यकता है। हमारे विद्वान उनकी रचनाओं के विभिन्न विषयों का अध्ययन करते रहे हैं, जिसके कारण उनके समग्र व्यक्तित्व को समझने के बजाय कुछ विद्वानों द्वारा उन्हें अकादमिक स्तर पर रूढ़िवादी साबित करने का प्रयास किया जाता है। भाई साहिब ने पारंपरिक नायकों के स्थान पर नए नायकों का सृजन किया। उन्होंने कहा कि इसी प्रकार भाई साहिब की जीवनी भी टुकड़ों में लिखी और समझी गई है, जबकि इसे समग्र रूप में समझने और लिखने की आवश्यकता है।
संवाद को आगे बढ़ाते हुए प्रो. सुदर्शन गासो ने कहा कि किसी भी साहित्य को यदि हम कुछ निश्चित सूत्रों में बांधकर देखते हैं, तो उसके साथ न्याय नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि समूचा पंजाबी साहित्य गुरबाणी की परिक्रमा करता है, अर्थात वह इससे प्रभावित है।
स. नरेंद्रजीत सिंह बिंद्रा ने कहा कि भाई वीर सिंह का श्री हेमकुंड साहिब के साथ गहरा संबंध रहा है। इसी कारण इस क्षेत्र के लोग उन्हें एक धार्मिक व्यक्तित्व के रूप में सम्मान देते हैं। उन्होंने कहा कि भाई साहिब से संबंधित किसी भी परियोजना के लिए उनकी संस्था हर प्रकार की सहायता देने के लिए तैयार है।
मुख्य अतिथि डॉ. जगदीप सिंह ने कहा कि भाई वीर सिंह को जहां आधुनिक पंजाबी साहित्य का निर्माता कहा जाता है, वहीं उन्हें एक आध्यात्मिक व्यक्तित्व के रूप में भी जाना जाता है। उनका सभी धर्मों के साथ संबंध था। उन्होंने अपनी कलम के माध्यम से लोगों को औपनिवेशिक प्रवृत्तियों और साम्राज्य के खिलाफ जागरूक करते हुए अपना दार्शनिक योगदान दिया। उन्होंने कहा कि पंजाबी यूनिवर्सिटी द्वारा यहां भाई वीर सिंह के बारे में एक संग्रहालय स्थापित करने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं, जिसके माध्यम से उनकी विरासत को संरक्षित किया जा सके।
भाषा विभाग के निदेशक स. जसवंत सिंह जफर ने धन्यवाद ज्ञापित करते हुए कहा कि भाषा विभाग ने भाई वीर सिंह जैसी महान शख्सियत के बारे में एक साथ बैठकर विचार-विमर्श करने का प्रयास किया है। उन्होंने पहली बार पंजाबी में महाकाव्य की रचना की और प्रकृति के प्रति अपनी गहरी अनुरक्ति को अपनी कलम के माध्यम से अभिव्यक्त किया। यह स्थान पंजाबियों के एकजुट होने का केंद्र बन चुका है और भाषा विभाग यहां की गतिविधियों में अपना बनता योगदान देता रहेगा।
पंजाबी यूनिवर्सिटी के सहयोग से आयोजित इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में स्थानीय हस्तियां उपस्थित रहीं। मंच संचालन शोध अधिकारी डॉ. सुखदर्शन सिंह चहल ने किया। अंत में अतिथियों, वक्ताओं तथा डॉ. बलवीर सिंह साहित्य केंद्र के प्रभारी डॉ. कुलविंदर सिंह को सम्मानित किया गया।





