Sunday, October 11, 2026
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‘पटियालवी पत्रकार’—पटियाला की पत्रकारिता विरासत का ऐतिहासिक दस्तावेज

उजागर सिंह की पुस्तक में 80 पत्रकारों का जीवन, संघर्ष और पत्रकारिता विरासत दर्ज

पटियाला, 6 अक्टूबर 2026 (गुरमीत सिंह तुंग): पत्रकारिता किसी दौर के सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक इतिहास को दर्ज करने का महत्वपूर्ण माध्यम है। इसी दृष्टिकोण को सामने रखते हुए पूर्व जिला लोक संपर्क अधिकारी और लेखक उजागर सिंह की पुस्तक ‘पटियालवी पत्रकार’ पटियाला की पत्रकारिता विरासत को संजोने वाला एक महत्वपूर्ण दस्तावेज है।

सप्तऋषि पब्लिकेशन, चंडीगढ़ द्वारा प्रकाशित इस पुस्तक में 164 पृष्ठ हैं और इसकी कीमत 250 रुपये है। पुस्तक में पटियाला की पत्रकारिता से जुड़े पत्रकारों की जानकारी एकत्र कर एक ही स्थान पर दर्ज की गई है।

पुस्तक के अनुसार, जालंधर और चंडीगढ़ के बाद पटियाला ने पंजाबी पत्रकारिता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। एक दौर में पटियाला से पंजाबी भाषा के कई दैनिक और साप्ताहिक समाचार पत्र प्रकाशित होते थे। लेखक ने उस दौर से जुड़े पत्रकारों की जानकारी जुटाकर पटियाला की पत्रकारिता के इतिहास को दर्ज करने का प्रयास किया है।

इस पुस्तक में गुरमुखी वर्णमाला के क्रम में 80 पत्रकारों को विस्तार से शामिल किया गया है, जबकि 15 अन्य पत्रकारों के बारे में संक्षिप्त जानकारी दी गई है। इनमें पत्रकारों के जीवन, समाचार पत्रों के साथ उनके संबंध, पत्रकारिता क्षेत्र में योगदान, साहित्यिक रचनाओं, यात्राओं और पुरस्कारों एवं सम्मानों सहित कई पहलुओं को दर्ज किया गया है। पुस्तक में शामिल पत्रकारों का जन्म वर्ष 1960 या उससे पहले का बताया गया है।

पुस्तक में भूषण सरहंदी और सरोज सरहंदी की पत्रकारिता का भी उल्लेख किया गया है। भूषण सरहंदी को बेबाक और निडर पत्रकार के रूप में प्रस्तुत किया गया है, जबकि सरोज सरहंदी ने आतंकवाद के दौर में महिला पत्रकार के रूप में पत्रकारिता की।

इसी तरह जगजीत सिंह दरदी, चौधरी प्रभजोत सिंह, वरिंदर सिंह वालिया और डॉ. हरजिंदर वालिया सहित कई पत्रकारों की पत्रकारिता यात्रा को भी पुस्तक में दर्ज किया गया है। जगजीत सिंह दरदी को पद्मश्री सम्मान मिलने का उल्लेख भी पुस्तक में किया गया है।

पुस्तक में ऐसी शख्सियतों का भी जिक्र है, जिन्होंने पत्रकारिता के साथ-साथ शिक्षा और साहित्य के क्षेत्र में योगदान दिया। प्रो. अविनाश सिंह, प्रो. कुलबीर सिंह, वरिंदर सिंह वालिया और डॉ. हरजिंदर वालिया इसके उदाहरण हैं।

डिजिटल और सोशल मीडिया के तेजी से बदलते दौर में पुरानी पीढ़ी के पत्रकारों के कामकाज, संघर्ष और पत्रकारिता के तरीकों को दर्ज करना मीडिया इतिहास के लिए महत्वपूर्ण है। इस दृष्टि से ‘पटियालवी पत्रकार’ केवल पत्रकारों की जीवनियों का संग्रह नहीं है, बल्कि पटियाला की पत्रकारिता की स्मृतियों, संघर्ष और विरासत को एक स्थान पर संजोने वाला ऐतिहासिक दस्तावेज भी है।

‘पटियालवी पत्रकार’ पुस्तक का लोक-अर्पण शुक्रवार, 9 अक्टूबर 2026 को पटियाला मीडिया क्लब, 6-डी, पासी रोड, पटियाला में किया जाएगा।

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