नई दिल्ली, 12 अक्टूबर 2026 (चौधरी प्रभजीत सिंह): होर्मुज जलडमरूमध्य में दो व्यापारिक जहाजों पर हुए हमलों की भारत सरकार ने कड़े शब्दों में निंदा की है। इन दोनों जहाजों पर कुल 22 भारतीय नाविक सवार थे। विदेश मंत्रालय के अनुसार, एक जहाज पर ड्रोन से हमला किया गया, जबकि दूसरे जहाज पर अज्ञात प्रक्षेपास्त्र से हमला होने के बाद उसमें आग लग गई। इस घटना के बाद भारतीय अधिकारियों ने संबंधित देशों और जहाज प्रबंधन कंपनियों के साथ संपर्क तेज कर दिया है।
एक जहाज पर ड्रोन हमला, दो भारतीय नाविक लापता
विदेश मंत्रालय के मुताबिक, 11 अक्टूबर को एमटी पेट्रो डॉल्फिन पर ड्रोन हमला हुआ। इस जहाज पर 11 भारतीय नाविक सवार थे, जिनमें से दो के लापता होने की खबर है। लापता नाविकों की तलाश के लिए संबंधित अधिकारियों के साथ समन्वय किया जा रहा है।
वहीं, मार्शल आइलैंड्स के ध्वज वाले टैंकर एमटी वाल्थेरा पर एक अज्ञात प्रक्षेपास्त्र से हमला किया गया, जिसके कारण जहाज में आग लग गई। हालांकि, इस जहाज पर सवार सभी 11 भारतीय नाविक सुरक्षित बताए गए हैं।
भारतीय दूतावास स्थिति पर रख रहा है नजर
विदेश मंत्रालय ने बताया कि मस्कट स्थित भारतीय दूतावास पूरे घटनाक्रम पर करीबी नजर रख रहा है। लापता भारतीय नाविकों की तलाश और प्रभावित चालक दल को आवश्यक सहायता उपलब्ध कराने के लिए ओमान के अधिकारियों तथा संबंधित जहाज प्रबंधन कंपनियों के साथ लगातार संपर्क किया जा रहा है।
मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि भारतीय नाविकों की सुरक्षा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। होर्मुज जलडमरूमध्य क्षेत्र में व्यापारिक जहाजों पर लगातार हो रहे हमले चिंता का विषय हैं और इससे पहले से तनावपूर्ण क्षेत्रीय स्थिति और बिगड़ सकती है।
भारत ने तनाव कम करने और कूटनीति पर दिया जोर
भारत ने संबंधित पक्षों से तनाव तत्काल कम करने और मौजूदा विवादों का समाधान बातचीत एवं कूटनीति के माध्यम से करने की अपील की है। विदेश मंत्रालय ने कहा कि व्यापारिक जहाजों, समुद्री कर्मचारियों और नागरिक बुनियादी ढांचे को निशाना बनाने वाली घटनाएं तुरंत बंद होनी चाहिए।
भारत ने अंतरराष्ट्रीय कानूनों के अनुरूप समुद्री मार्गों पर आवाजाही की स्वतंत्रता और व्यापारिक जहाजों के सुरक्षित आवागमन को सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।
होर्मुज जलडमरूमध्य अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार के लिए एक महत्वपूर्ण मार्ग है। ऐसे में यहां जहाजों की सुरक्षा को लेकर बढ़ती चिंताएं वैश्विक व्यापार और समुद्री परिवहन के लिए गंभीर चुनौती पैदा कर सकती हैं।






