विनिपेग, केनैडा, 12 अक्टूबर 2026 (चौधरी प्रभजीत सिंह): कनाडा के मैनिटोबा प्रांत में आयोजित दिवाली मेले में भारतीय संस्कृति, कला, संगीत और परंपराओं की आकर्षक झलक देखने को मिली। हिंदू सोसाइटी ऑफ मैनिटोबा की ओर से शनिवार को आरबीसी कन्वेंशन सेंटर में आयोजित इस मेले में भारतीय समुदाय के लोगों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। सांस्कृतिक प्रस्तुतियों में पंजाबी भांगड़ा, विभिन्न राज्यों के पारंपरिक लोकनृत्य, शास्त्रीय संगीत और आधुनिक नृत्य शैलियों ने दर्शकों का ध्यान आकर्षित किया। रंग-बिरंगे परिधानों और पारंपरिक वाद्ययंत्रों की धुनों ने पूरे आयोजन को उत्सवमय बना दिया।
मेले का उद्देश्य केवल दिवाली का उत्सव मनाना ही नहीं, बल्कि कनाडा में रह रहे भारतीय मूल के लोगों को अपनी सांस्कृतिक विरासत से जोड़ना और विभिन्न समुदायों के बीच आपसी समझ तथा सद्भाव को बढ़ावा देना भी रहा।
‘यात्रा कला तत्र शक्ति’ रही मेले की मुख्य थीम
इस वर्ष दिवाली मेले की थीम ‘यात्रा कला तत्र शक्ति’ रखी गई, जिसका भाव कला, सांस्कृतिक अभिव्यक्ति और शक्ति के बीच संबंध को रेखांकित करना था। कार्यक्रम में भारतीय परंपराओं की विविधता को नृत्य, संगीत, हस्तशिल्प और धार्मिक-सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से प्रदर्शित किया गया।
आयोजकों के कार्यक्रम के अनुसार, मेले के द्वार शाम चार बजे खोले गए। इसके बाद दिनभर विभिन्न सांस्कृतिक गतिविधियों और रचनात्मक कार्यशालाओं का आयोजन हुआ। कोलम बनाने, मंडला पेंटिंग, गणेश प्रतिमा निर्माण, चूड़ियां सजाने और फूलों की मालाएं तैयार करने जैसी गतिविधियों में बच्चों और वयस्कों ने भाग लिया।
इन कार्यशालाओं के माध्यम से प्रतिभागियों को भारतीय कला और हस्तशिल्प की पारंपरिक विधियों को समझने तथा उन्हें स्वयं आजमाने का अवसर मिला।
लाजिम और ढोल की धुन पर निकली शोभायात्रा बनी आकर्षण
मेले के प्रमुख आकर्षणों में मराठी मंडल ऑफ मैनिटोबा के नेतृत्व में निकाली गई शोभायात्रा शामिल रही। लाजिम और ढोल की ताल पर प्रस्तुत इस सांस्कृतिक प्रदर्शन ने महाराष्ट्र की लोकपरंपराओं को सामने रखा। पारंपरिक संगीत और सामूहिक प्रस्तुति ने दर्शकों को भारतीय उत्सवों की जीवंतता का अनुभव कराया।
उद्घाटन समारोह की शुरुआत प्रार्थना और दीप प्रज्वलन के साथ हुई। हिंदू सोसाइटी ऑफ मैनिटोबा की अध्यक्ष अनीता राय ने सम्मान समारोह में भाग लिया, जबकि डेविड डेनियल्स ने प्रार्थना की। मेले की आयोजन समिति की अध्यक्ष रीना वालिया ने उपस्थित अतिथियों और दर्शकों का स्वागत किया।
भांगड़ा से लावणी तक, मंच पर दिखी भारत की सांस्कृतिक विविधता
दिवाली मेले के सांस्कृतिक कार्यक्रम में भारत के विभिन्न क्षेत्रों की कला और परंपराओं को स्थान दिया गया। पंजाबी भांगड़ा ने जहां अपनी ऊर्जा और जोश से दर्शकों को आकर्षित किया, वहीं अन्य प्रस्तुतियों ने देश की क्षेत्रीय सांस्कृतिक विविधता को उजागर किया।
कार्यक्रम में वैदिक श्लोक, तराना, तिरुवातिरा, कोलट्टम, राजस्थानी लोकनृत्य, बंगाल का धुनुची नृत्य और महाराष्ट्र की प्रसिद्ध लावणी प्रस्तुत की गई। गरबा और बॉलीवुड नृत्य के मिश्रण ने पारंपरिक तथा आधुनिक भारतीय मनोरंजन के बीच सुंदर तालमेल दिखाया।
‘मां काली—द डिवाइन एम्बॉडिमेंट ऑफ शक्ति’ शीर्षक वाली प्रस्तुति के माध्यम से भारतीय आध्यात्मिक परंपरा और शक्ति की अवधारणा को कलात्मक रूप में दर्शाया गया। अलग-अलग भाषाओं, संगीत शैलियों और नृत्य परंपराओं की प्रस्तुतियों ने यह संदेश दिया कि भारतीय संस्कृति अपनी विविधता के बावजूद साझा विरासत और सामूहिक पहचान से जुड़ी हुई है।
मैनिटोबा के जनप्रतिनिधियों ने भी की शिरकत
इस आयोजन में मैनिटोबा सरकार की मंत्री नेली कैनेडी, संसदीय सचिव केविन लैमूरू, विनिपेग के मेयर स्कॉट गिलिंगहैम और आरबीसी के क्षेत्रीय उपाध्यक्ष स्टीफन कोंट्जी ने भी संबोधन किया।
इन अतिथियों की उपस्थिति ने आयोजन के सामुदायिक महत्व को रेखांकित किया। कनाडा जैसे बहुसांस्कृतिक देश में विभिन्न समुदायों के त्योहार सामाजिक सहभागिता, सांस्कृतिक आदान-प्रदान और आपसी परिचय के अवसर प्रदान करते हैं। हालांकि, अतिथियों के संबोधनों की विस्तृत विषयवस्तु उपलब्ध विवरण में नहीं दी गई है।
भारतीय व्यंजनों, हस्तशिल्प और पारंपरिक वस्तुओं की प्रदर्शनी
सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के साथ मेले में खानपान और हस्तशिल्प को भी प्रमुख स्थान दिया गया। परिसर में पंजाबी और अन्य भारतीय व्यंजनों के स्टॉल लगाए गए। इसके अतिरिक्त पारंपरिक वस्तुओं, सजावटी सामान और हाथ से तैयार की गई कलाकृतियों की प्रदर्शनी भी आयोजित की गई।
इन स्टॉलों ने आगंतुकों को भारतीय खानपान, पारंपरिक सजावट और शिल्पकला से परिचित होने का अवसर दिया। ऐसे आयोजन प्रवासी समुदाय के छोटे व्यवसायों, कलाकारों और हस्तशिल्प से जुड़े लोगों को अपनी रचनात्मकता प्रदर्शित करने के लिए मंच भी उपलब्ध करा सकते हैं।
कार्यक्रम के समापन पर आयोजन समिति के सह-अध्यक्ष अभिनंदन पाटिल ने धन्यवाद प्रस्ताव प्रस्तुत किया। इस दौरान रैफल पुरस्कारों की घोषणा भी की गई।
प्रवासी भारतीयों के लिए संस्कृति से जुड़ने का महत्वपूर्ण मंच
कनाडा में भारतीय समुदाय के सांस्कृतिक आयोजन नई पीढ़ी को अपनी भाषाओं, परंपराओं, संगीत और लोककलाओं से परिचित कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। विशेष रूप से उन बच्चों और युवाओं के लिए, जिनका जन्म या पालन-पोषण विदेश में हुआ है, ऐसे मेले भारतीय विरासत को करीब से जानने का अवसर प्रदान करते हैं।
मैनिटोबा का यह दिवाली मेला धार्मिक उत्सव के साथ-साथ सांस्कृतिक संवाद और सामुदायिक सहभागिता का भी उदाहरण बना। पंजाबी भांगड़े से लेकर महाराष्ट्र की लावणी और बंगाल के धुनुची नृत्य तक, विभिन्न प्रस्तुतियों ने भारतीय संस्कृति की व्यापकता को प्रदर्शित किया।
इस प्रकार, आयोजन ने भारतीय मूल के परिवारों को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने के साथ-साथ कनाडा के विविध समुदायों के बीच मेलजोल, सम्मान और सद्भाव को प्रोत्साहित करने का संदेश दिया।
नोट: यह समाचार उपलब्ध आयोजन विवरण के आधार पर तैयार किया गया है। कार्यक्रम में प्रस्तुतियों, अतिथियों और गतिविधियों से संबंधित तथ्यों को आयोजकों के आधिकारिक विवरण से सत्यापित करना उचित होगा।






