Tuesday, October 13, 2026
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सदाबहार आवाज़ और अनूठे अंदाज़ के जादूगर: याद आते हैं किशोर दा

नई दिल्ली/मुंबई,13 अक्टूबर, 2026 (राजेश कुमार दास): भारतीय सिनेमा के इतिहास में जब भी बहुमुखी प्रतिभा, बेबाक मस्ती और रूह को छू लेने वाली आवाज़ की बात होगी, तो सबसे पहला नाम किशोर कुमार का आएगा। आज, 13 अक्टूबर, भारतीय संगीत जगत के इस महान फनकार की पुण्यतिथि है। भले ही वे 1987 में इसी दिन भौतिक रूप से इस दुनिया को अलविदा कह गए थे, लेकिन उनकी जादुई आवाज़ और उनका जिंदादिल अंदाज़ आज भी करोड़ों संगीत प्रेमियों के दिलों में धड़क रहा है।

बहुरुपिया कलाकार और संगीत का अनूठा सफर

मध्य प्रदेश के खंडवा शहर में 4 अगस्त 1929 को जन्मे आभास कुमार गांगुली यानी किशोर कुमार ने बिना किसी औपचारिक शास्त्रीय संगीत की तालीम के वह मुकाम हासिल किया, जो बड़े-बड़े संगीत साधक उम्र भर नहीं पा सके। उनकी आवाज़ में एक अजीब सा अपनापन, दर्द की गहराई और मस्ती का समंदर एक साथ बहता था।

उन्होंने न केवल पार्श्व गायन (Playback Singing) में तहलका मचाया, बल्कि एक बेहतरीन अभिनेता, निर्माता, निर्देशक, गीतकार और संगीतकार के रूप में भी अपनी बहुमुखी प्रतिभा का लोहा मनवाया। ‘चलती का नाम गाड़ी’, ‘पड़ोसन’ और ‘हाफ टिकट’ जैसी फिल्मों में उनकी कॉमिक Timing और अभिनय के आज भी लोग दीवाने हैं।

हर मूड के लिए एक ही आवाज़

किशोर दा की सबसे बड़ी खासियत यह थी कि वे हर मिजाज के गाने को अपनी आवाज़ से अमर बना देते थे।

  • अगर दर्द और तन्हाई बयां करनी हो, तो “चिट्ठी ना कोई संदेश…” या “जिंदगी का सफर, है ये कैसा सफर…” र रूह को झकझोर देते हैं।
  • वहीं, मस्ती और उमंग की बात हो, तो “खाइके पान बनारस वाला“, “मेरे सामने वाली खिड़की में…” या “रूप तेरा मस्ताना…” आज भी युवाओं की जुबान पर थिरक उठते हैं।

उन्होंने राजेश खन्ना, अमिताभ बच्चन, देव आनंद और ऋषि कपूर जैसे तमाम बड़े सितारों के लिए अपनी आवाज़ दी और पर्दे पर उनके किरदार में जान फूंक दी। उनकी आवाज़ के उतार-चढ़ाव और Yodeling (योदलिंग) शैली उनकी ऐसी पहचान थी, जिसकी नकल करना किसी के लिए भी असंभव था।

खंडवा से जुड़ाव और ज़िंदादिली

किशोर कुमार अपनी जड़ों से हमेशा जुड़े रहे। वे जब भी मंच पर जाते, गर्व से खुद को “किशोर कुमार खंडवे वाला“ कहते थे। उनकी जिंदगी कई उतार-चढ़ाव, सादगी और अनूठे किस्सों से भरी थी। पेड़ों से बातें करने का उनका शौक हो या अपने स्टूडियो में सन्नाटा पसंद करने की आदत, वे भीड़ से हमेशा अलग और अनोखे रहे।

आज भी दिलों में जिंदा हैं किशोर दा

आज उनकी पुण्यतिथि के अवसर पर देश भर के संगीत प्रेमी, कलाकार और राजनेता उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित कर रहे हैं। सोशल मीडिया से लेकर रेडियो स्टेशनों तक हर तरफ किशोर दा के ही नगमे गूंज रहे हैं।

यह सच्चाई है कि “दूर हिल्स से आवाज़ आती है…”, और वह आवाज़ सदियों तक गूंजती रहेगी। किशोर कुमार सिर्फ एक गायक नहीं, बल्कि जीने का एक सलीका थे—एक ऐसा अहसास जो कभी पुराना नहीं हो सकता।

किशोर दा, आपकी यादें और आपकी आवाज़ हमेशा हमारे साथ अमर रहेंगी!

 

 

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