संगरूर, 14 अक्टूबर, 2026 (गुरमीत सिंह तुंग): जिला प्रशासन संगरूर द्वारा डिप्टी कमिश्नर पूनमदीप कौर के नेतृत्व में ‘युद्ध नशों के विरुद्ध’ अभियान के तहत नशे से प्रभावित चिन्हित हॉटस्पॉट क्षेत्रों के सुधार और पुनरुद्धार के लिए व्यापक रणनीति तैयार की गई है। इस पहल के तहत नशों की आपूर्ति रोकने के साथ-साथ नशा पीड़ित व्यक्तियों के इलाज और पुनर्वास, सार्वजनिक सुविधाओं में सुधार तथा युवाओं को शिक्षा, खेल और रोजगार से जोड़ने के लिए विभिन्न विभागों की संयुक्त भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी। इस संबंध में आयोजित बैठक की अध्यक्षता करते हुए अतिरिक्त डिप्टी कमिश्नर (जनरल) अंकुर महिंदरू ने बताया कि पंजाब पुलिस और ग्राम रक्षा समितियों द्वारा चिन्हित हॉटस्पॉट क्षेत्रों में विभिन्न विभागों को आपसी तालमेल से काम करने के निर्देश जारी किए गए हैं। उन्होंने कहा कि इन क्षेत्रों में नशा तस्करों और सप्लायरों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई करने के साथ-साथ नशा पीड़ित व्यक्तियों की पहचान कर उन्हें मुफ्त इलाज और पुनर्वास सुविधाओं से जोड़ा जाएगा।
अंकुर महिंदरू ने कहा कि नशे की समस्या का स्थायी समाधान करने के लिए पुलिस कार्रवाई के साथ-साथ सभी सरकारी विभागों और समुदाय की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है। उन्होंने कहा कि नशा पीड़ित व्यक्तियों को इलाज के लिए प्रेरित करना, उनके परिवारों को जागरूक करना और उपचार के बाद उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ना इस पहल के महत्वपूर्ण हिस्से हैं। अतिरिक्त डिप्टी कमिश्नर ने बताया कि प्रत्येक हॉटस्पॉट क्षेत्र के लिए एसडीएम, एसडीओ या तहसीलदार स्तर के नोडल अधिकारी नियुक्त किए गए हैं। ये अधिकारी संबंधित विभागों के साथ समन्वय स्थापित करके सार्वजनिक स्थानों और खंडहर इमारतों की मरम्मत एवं सुधार, सीसीटीवी कैमरे लगाने तथा स्ट्रीट लाइटें स्थापित करने जैसे कार्यों की निगरानी करेंगे। उन्होंने कहा कि इन प्रयासों का उद्देश्य प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षित और सकारात्मक वातावरण तैयार करना है।
उन्होंने बताया कि स्वास्थ्य विभाग द्वारा नशा पीड़ित व्यक्तियों की पहचान करके उन्हें ओओएटी (OOAT) क्लीनिकों और नशा मुक्ति केंद्रों में उपचार की सुविधाएं उपलब्ध करवाई जा रही हैं। इसके अलावा विशेष स्वास्थ्य शिविर लगाए जा रहे हैं और मेडिकल स्टोरों की जांच के माध्यम से नशीली दवाओं की अवैध बिक्री रोकने के प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि आने वाले दिनों में इन गतिविधियों को और तेज किया जाएगा, ताकि अधिक से अधिक जरूरतमंद व्यक्तियों तक उपचार और सहायता पहुंचाई जा सके। अंकुर महिंदरू ने बताया कि शिक्षा विभाग द्वारा स्कूलों और कॉलेजों में विद्यार्थियों तथा अभिभावकों के लिए नशों के दुष्प्रभावों के बारे में जागरूकता सेमिनार आयोजित किए जाएंगे। एनसीसी और एनएसएस शिविरों तथा प्रौढ़ शिक्षा अभियानों के माध्यम से भी लोगों को जागरूक किया जाएगा। उन्होंने कहा कि युवाओं को कम उम्र से ही नशों के नुकसान के बारे में जागरूक करना और उन्हें सकारात्मक गतिविधियों से जोड़ना बेहद जरूरी है। उन्होंने आगे बताया कि खेल और युवा मामलों से संबंधित विभागों द्वारा खेल मैदानों में सुधार, नए युवा एवं खेल क्लबों का गठन और युवाओं के लिए खेल प्रतियोगिताएं आयोजित करने जैसी गतिविधियां की जाएंगी। इन प्रयासों के माध्यम से युवाओं को अपनी ऊर्जा और समय सकारात्मक कार्यों में लगाने के लिए प्रेरित किया जाएगा।
अतिरिक्त डिप्टी कमिश्नर ने कहा कि रोजगार एवं कौशल विकास विभाग द्वारा नशा छोड़ रहे युवाओं को कौशल विकास प्रशिक्षण और रोजगार के अवसरों से जोड़ने के लिए काम किया जाएगा। स्वरोजगार करने के इच्छुक युवाओं को संबंधित योजनाओं के तहत वित्तीय सहायता उपलब्ध करवाने के लिए भी प्रयास किए जाएंगे, ताकि वे आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनकर अपने जीवन की नई शुरुआत कर सकें। अंकुर महिंदरू ने सभी संबंधित विभागों के अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे आपसी तालमेल से निर्धारित कार्यों को आगे बढ़ाएं और की गई कार्रवाई की साप्ताहिक प्रगति रिपोर्ट निर्धारित प्रारूप में भेजें। उन्होंने कहा कि नियमित समीक्षा के माध्यम से कार्यों की प्रगति का आकलन किया जाएगा और आवश्यकता के अनुसार विभागों के बीच समन्वय को और मजबूत किया जाएगा। इस अवसर पर डिप्टी मेडिकल कमिश्नर डॉ. विकास धीर के अलावा विभिन्न विभागों के अधिकारी भी उपस्थित थे।






