पटियाला, 16 अक्टूबर 2026 (हर्षलीन सिंह): भाषा विभाग पंजाब की ओर से प्रख्यात विद्वान डॉ. रतन सिंह जग्गी के साहित्यिक योगदान और पंजाबी साहित्य के प्रति उनकी सेवाओं के सम्मान में आज संदर्भ पुस्तकालय में डॉ. जग्गी स्मृति साहित्यिक कोना स्थापित किया गया। इसका लोकार्पण उनकी धर्मपत्नी डॉ. गुरशरण कौर जग्गी, भाषा विभाग के निदेशक सरदार जसवंत सिंह जफर और अन्य प्रतिष्ठित हस्तियों ने किया।
इस कोने में डॉ. जग्गी के जीवन संघर्ष और उपलब्धियों से संबंधित तस्वीरें, उनकी शैक्षणिक डिग्रियां, पुरस्कार, उनके द्वारा रचित अध्ययन ग्रंथ और शोध पुस्तकें आदि शामिल हैं। इस सराहनीय कार्य को साकार करने में रतन सिंह जग्गी के पुत्र मालविंदर सिंह जग्गी, पंजाब सरकार के पूर्व सचिव, और भाषा विभाग के निदेशक जसवंत सिंह जफर की महत्वपूर्ण भूमिका रही। दोनों के संयुक्त प्रयासों से इस पहल को अमली रूप दिया गया।
उल्लेखनीय है कि डॉ. रतन सिंह जग्गी ने अपनी शुरुआती नौकरी भाषा विभाग पंजाब से ही शुरू की थी। वे हर साहित्यिक मंच पर इस बात को लेकर खुशी व्यक्त करते थे।
इस सादे लेकिन प्रभावशाली समारोह के दौरान भाषा विभाग के निदेशक सरदार जसवंत सिंह जफर ने स्वागत भाषण देते हुए कहा कि डॉ. रतन सिंह जग्गी पंजाबी के सच्चे सपूत थे। उन्होंने पंजाबी भाषा के गहन ज्ञान को समझने और उसे लोगों के सामने प्रस्तुत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने कहा कि डॉ. जग्गी केवल चिंतक और विद्वान ही नहीं थे, बल्कि पंजाबी सद्भावना के प्रतीक भी थे। उनके निधन के बाद उनके द्वारा किए गए कार्यों का महत्व और बढ़ गया है। भाषा विभाग में उनके नाम पर साहित्यिक कोना स्थापित होना सभी के लिए गर्व और खुशी की बात है।
इस अवसर पर प्रख्यात चिंतक सरदार अमरजीत ग्रेवाल ने कहा कि डॉ. रतन सिंह जग्गी ने पंजाबी भाषा, संस्कृति और चिंतन का एक मजबूत आधार तैयार किया। अब उनके पुत्र इस विरासत को संभालने का कार्य कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि जब पंजाबियों में पुस्तकालयों के प्रति रुचि कम हो रही है, ऐसे समय में इस तरह की पहल सराहनीय और समय की जरूरत है।
सरदार हरप्रीत सिंह दरदी ने कहा कि डॉ. जग्गी ने आने वाली पीढ़ियों के लिए ज्ञान का एक अनमोल खजाना तैयार किया है, जिससे भविष्य की पीढ़ियां लाभ उठाती रहेंगी। उन्होंने मालविंदर सिंह जग्गी की सराहना करते हुए कहा कि वे एक सच्चे पुत्र का दायित्व निभा रहे हैं।
इस मौके पर पंजाबी रंगमंच की प्रसिद्ध हस्ती श्री प्राण सभरवाल ने डॉ. जग्गी से जुड़ी अपनी यादें साझा कीं। उन्होंने भाषा विभाग के साथ मिलकर इस परिवार द्वारा किए गए कार्यों की भरपूर प्रशंसा की।
डॉ. राजिंदरपाल सिंह बराड़ ने कहा कि डॉ. जग्गी पंजाबी के समर्पित और प्रतिबद्ध शोधकर्ता थे। उन्होंने गहरी समझ और ईमानदारी के साथ लगातार काम किया तथा ठोस और स्थायी योगदान दिया। उनका कार्य भविष्य के साहित्यिक शोधकर्ताओं के लिए आधार साबित होगा। उन्होंने कहा कि डॉ. जग्गी ऐसे विद्वान थे, जिन्होंने विभिन्न धर्मों के मूल धार्मिक ग्रंथों का अध्ययन किया और उसी आधार पर अपने विचार प्रस्तुत किए। उनकी मान्यताओं को अब तक किसी ने चुनौती नहीं दी है।
धन्यवाद प्रस्ताव के दौरान मालविंदर सिंह जग्गी ने अपने जीवन की यादें साझा करते हुए कहा कि डॉ. जग्गी अथक मेहनत करने वाले और साहित्य के प्रति जुनूनी व्यक्ति थे। इसी लगन के कारण वे इतना व्यापक कार्य कर सके। उन्होंने बताया कि उनके पिता अनेक भाषाओं के जानकार थे और दूसरों को भी नई भाषाएं सीखने के लिए प्रेरित करते थे। उन्होंने कहा कि भाषा विभाग ने उनके पिता की इच्छा को साकार किया है, जिसके लिए वे विभाग के आभारी रहेंगे। इस अवसर पर उन्होंने डॉ. जग्गी की 130 दुर्लभ पुस्तकें भी विभाग को भेंट कीं।
कार्यक्रम का मंच संचालन डॉ. मनजिंदर सिंह ने किया। इस अवसर पर विभाग की अतिरिक्त निदेशक चंदनदीप कौर, उपनिदेशक आलोक चावला, सहायक निदेशक अमरइंदर सिंह, जसप्रीत कौर, सुखप्रीत कौर, दविंदर कौर और राबिया, शोध अधिकारी डॉ. संतोख सिंह, सतपाल सिंह, सरदार बलदेव सिंह, महेशइंदर खोसला, शोध सहायक गुरमेल सिंह, लाइब्रेरियन नेहा खुराना सहित विभाग के अन्य अधिकारी और कर्मचारी उपस्थित रहे।






