हरियाणा की लोक संस्कृति के रंगों से सजी राज्य स्तरीय नगाड़ा (बंचारी) प्रतियोगिता का हुआ आयोजन, प्रदेश भर से आए 20 दलों ने दी शानदार प्रस्तुतियां, विजेता टीमों के नाम निर्णायक मंडल के निर्णय के बाद शीघ्र होंगे घोषित, प्रतियोगिता के निर्णायक मंडल में शामिल रहे पदमश्री महाबीर गुड्डा हरियाणावी लोक कलाकार गुलाब सिंह खंडेलवाल, प्रोफेसर लोकेश शर्मा
कुरुक्षेत्र 16 अक्टूबर 2026 (संजीव शर्मा): हरियाणा की समृद्ध लोक संस्कृति, पारंपरिक संगीत एवं लोक वाद्य कला को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से कला एवं सांस्कृतिक कार्य विभाग हरियाणा के महानिदेशक डा. आदित्य दहिया के दिशा-निर्देशन में विभाग द्वारा राज्य स्तरीय नगाड़ा (बंचारी) प्रतियोगिता का आयोजन हरियाणा कला परिषद कुरुक्षेत्र की भरत मुनि रंगशाला में किया गया। प्रतियोगिता में हरियाणा के विभिन्न जिलों से आए 20 दलों ने भाग लेकर नगाड़ा (बंचारी) वादन की शानदार प्रस्तुतियां दीं। कलाकारों ने अपनी कला, तालमेल, ऊर्जा और पारंपरिक संगीत के माध्यम से हरियाणा की सांस्कृतिक विरासत की जीवंत झलक प्रस्तुत की।
इस कार्यक्रम में कला एवं सांस्कृतिक कार्य विभाग हरियाणा की उपनिदेशिका डॉ. दीपिका और उपनिदेशिका रेनु हुड्डा, हरियाणा कला परिषद के उपाध्यक्ष महेश जोशी, लेखा अधिकारी सत्यभूषण सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे। प्रतियोगिता के निर्णायक मंडल में पद्मश्री महाबीर गुड्डू, हरियाणवी लोक कलाकार गुलाब सिंह खंडेलवाल तथा प्रोफेसर लोकेश शर्मा शामिल रहे। सभी मेहमानों ने कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ मां सरस्वती की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित करके किया गया। निर्णायक मंडल ने प्रतिभागी दलों की प्रस्तुतियों का अवलोकन करते हुए उनकी कला, पारंपरिक शैली, लय, तालमेल और प्रस्तुति के विभिन्न पहलुओं के आधार पर मूल्यांकन किया। सभी दलों ने अपनी प्रस्तुतियों से दर्शकों को प्रभावित किया और हरियाणा की लोक संगीत परंपरा की समृद्धता को प्रदर्शित किया। कलाकारों द्वारा हरियाणा की आन-बान-शान पगड़ी के साथ-साथ धोती-कुर्ता देसी परिधानों में अपनी प्रस्तुति दी। कलाकारों ने नगाड़ों के साथ-साथ अन्य वाद्य यंत्रों, जिनमें बांसुरी, बीन, चिमटा, हारमोनियम आदि संयोजन करके शानदार प्रस्तुतियां दी है।
निर्णायक मंडल ने कलाकारों को संबोधित करते हुए कहा कि कला एवं सांस्कृतिक कार्य विभाग हरियाणा की यह पहल प्रदेश की पारंपरिक लोक कलाओं को संरक्षित करने, लोक कलाकारों को प्रोत्साहित करने और नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। नगाड़ा (बंचारी) जैसी पारंपरिक लोक वाद्य कला हरियाणा की सांस्कृतिक पहचान का अहम हिस्सा है। इस प्रकार की प्रतियोगिताओं से कलाकारों को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने का अवसर मिलता है और पारंपरिक संगीत की धरोहर को आगे बढ़ाने में मदद मिलती है। प्रतियोगिता के माध्यम से प्रदेश की पारंपरिक नगाड़ा वादन कला को संरक्षण प्रदान करने के साथ-साथ लोक कलाकारों को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने का मंच उपलब्ध कराया गया है जो कला एवं सांस्कृतिक कार्य विभाग का एक सराहनीय कदम है।

उपनिदेशिका डॉ. दीपिका और उपनिदेशिका रेणु हुड्डा ने कहा कि प्रतियोगिता में विभिन्न जिलों से आए कलाकारों की सहभागिता ने यह संदेश दिया कि हरियाणा की लोक संस्कृति आज भी जीवंत है और इसके संरक्षण एवं संवर्धन के लिए कलाकार निरंतर प्रयासरत है। कार्यक्रम का आयोजन प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत को नई पहचान देने की दिशा में एक सराहनीय पहल साबित होगा। उन्होंने कहा कि प्रतियोगिता में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले दलों को आकर्षक नकद पुरस्कार प्रदान किए जाएंगे। प्रथम स्थान प्राप्त करने वाली टीम को 75 हजार रुपये, द्वितीय स्थान प्राप्त करने वाली टीम को 65 हजार रुपए तथा तृतीय स्थान प्राप्त करने वाली टीम को 55 हजार रुपये की पुरस्कार राशि दी जाएगी। इसके अतिरिक्त पांच सांत्वना पुरस्कार भी प्रदान किए जाएंगे, जिनमें प्रत्येक चयनित टीम को 10-10 हजार रुपये की नकद राशि मिलेगी। निर्णायक मंडल द्वारा निर्णय लिए जाने के बाद विजेता टीमों के नाम शीघ्र ही घोषित किए जाएंगे। इस कार्यक्रम के मंच का संचालन हरियाणा कला परिषद से विकास ने किया। कार्यक्रम के दौरान उपनिदेशिका डॉ. दीपिका और उपनिदेशिका रेनु हुड्डा ने उपस्थित अतिथियों को शॉल एवं शंख भेंट कर सम्मानित किया।






