Saturday, August 29, 2026
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मीरी-पीरी खालसा मार्च गुरुद्वारा साहिब पातशाही नौवीं, करहाली पटियाला से अगले पड़ाव के लिए रवाना

करहाली/अमृतसर, 29 अगस्त,2026 (छत्रपाल सिंह): श्री अकाल तख्त साहिब से शुरू हुआ मीरी-पीरी खालसा मार्च दूसरे चरण के तहत आज गुरुद्वारा साहिब पातशाही नौवीं, करहाली पटियाला से पंथक परंपराओं के अनुसार अगले पड़ाव गुरुद्वारा दुख निवारण साहिब, पटियाला के लिए रवाना हुआ।

खालसा मार्च की शुरुआत से पहले बंदी सिंहों की रिहाई और चढ़दी कला के लिए श्री अखंड पाठ साहिब के भोग डाले गए। इस अवसर पर सिंह साहिब ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज्ज ने बंदी सिंहों की रिहाई के लिए अरदास की, जबकि पावन हुकमनामा सिंह साहिब ज्ञानी बलजीत सिंह ने सुनाया। इस मौके पर श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार सिंह साहिब ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज्ज ने कहा कि बंदी सिंह कौम के अनमोल हीरे हैं और उनकी रिहाई के लिए पूरा पंथ लगातार प्रयास कर रहा है। उन्होंने कहा कि कई बंदी सिंह अपनी कानूनी सजा पूरी करने के बावजूद लंबे समय से जेलों में बंद हैं। तीन-तीन दशकों से अधिक समय जेल में गुजार चुके सिंहों को कानूनी और संवैधानिक अधिकार के अनुसार रिहाई न मिलना गंभीर सवाल खड़े करता है।

उन्होंने कहा कि बंदी सिंहों की रिहाई किसी एक व्यक्ति या संस्था का मुद्दा नहीं, बल्कि पूरे पंथ की भावनाओं से जुड़ा मामला है। उन्होंने शिरोमणि कमेटी द्वारा बंदी सिंहों की रिहाई के लिए किए जा रहे अरदास समागम की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे प्रयास कौम में जागरूकता पैदा करते हैं और लंबे समय से जेलों में बंद सिंहों के साथ हो रहे अन्याय के खिलाफ आवाज को मजबूत करते हैं। इस दौरान शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) के अध्यक्ष एडवोकेट हरजिंदर सिंह धामी ने कहा कि सिखों के साथ हो रहे अन्याय के खिलाफ संघर्ष करने वाले बंदी सिंहों ने अपने जीवन के महत्वपूर्ण दशक जेलों में बिताए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकारों द्वारा सिखों के साथ लगातार अन्याय किया जा रहा है।

धामी ने कहा कि बंदी सिंहों के मामलों में सरकार की नीति सिख भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाली है। उन्होंने कहा कि सिख कौम किसी से तुलना नहीं कर रही, बल्कि सभी के लिए समान न्याय की मांग कर रही है। उन्होंने भाई जगतार सिंह हवारा और बलवंत सिंह राजोआणा के मामलों का भी उल्लेख किया।

आरंभता के दौरान सजे दीवान में सचखंड श्री हरिमंदिर साहिब के ग्रंथी सिंह साहिब ज्ञानी बलजीत सिंह ने कथा-विचार के माध्यम से संगत को इतिहास से अवगत करवाया और गुरमत के अनुसार जीवन जीने की प्रेरणा दी। इस अवसर पर शिरोमणि कमेटी के अंतिरंग सदस्य सुरजीत सिंह गढ़ी, बलतेज सिंह खोक, जस्मेर सिंह लाछड़ू, जरनैल सिंह करतारपुर, पूर्व मंत्री प्रेम सिंह चंदूमाजरा, अतिरिक्त सचिव भगवंत सिंह धंगेरा सहित बड़ी संख्या में संगत मौजूद रही।

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