वशिंगटन, 10 सितंबर, 2026 (प्रभजोत सिंह): अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव का असर अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार पर दिखाई देने लगा है। बुधवार को कच्चे तेल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई। जुलाई के बाद यह पहली बार है जब तेल ने इस स्तर को पार किया है। अमेरिकी डब्लयू.टी.आई. क्रूड भी करीब 95 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार करता रहा।
मध्य-पूर्व में जारी तनाव और तेल टैंकरों व ऊर्जा ढांचे पर हमलों की खबरों से आपूर्ति तथा समुद्री परिवहन को लेकर चिंता बढ़ी है। खासकर होर्मुज जलडमरूमध्य में शिपिंग बाधित होने की आशंका ने बाजार की चिंता बढ़ा दी है। गोल्डमैन सैक्स ने संकेत दिया है कि शिपिंग पर हमले बढ़ने की स्थिति में कच्चा तेल 120 डॉलर प्रति बैरल तक जा सकता है।
भारत के लिए महंगा कच्चा तेल आयात बिल बढ़ाने के साथ-साथ शिपिंग, बीमा और परिवहन लागत पर भी दबाव डाल सकता है। फिलहाल पेट्रोल-डीजल की खुदरा कीमतों में तत्काल बढ़ोतरी नहीं हुई है, लेकिन लंबे समय तक तेल महंगा रहने पर ईंधन और एलपीजी की लागत बढ़ने का जोखिम है।
ईंधन महंगा होने से माल ढुलाई और परिवहन लागत बढ़ सकती है, जिसका असर रोजमर्रा की वस्तुओं की कीमतों और देश में महंगाई पर भी पड़ सकता है।






