अब चलेंगी “डायरेक्ट फ्लाइटें”!
नई दिल्ली, 12 सितंबर 2026 (गुरमीत सिंह तुंग): भारत और चीन के संबंधों में धीरे-धीरे आ रहे सुधार के बीच एक बड़ा कदम सामने आया है। चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के नई दिल्ली पहुंचने के दिन ही (China Southern Airlines) चाइना सदर्न एयरलाइंस ने ग्वांगझू और नई दिल्ली के बीच सीधी यात्री उड़ान सेवा फिर शुरू करने का ऐलान किया है। एयरलाइन के अनुसार यह सेवा 21 सितंबर 2026 से शुरू होगी। यह रूट करीब छह साल के अंतराल के बाद फिर से बहाल हो रहा है।
इस ऐलान को केवल हवाई यात्रा से जुड़ा फैसला नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे भारत और चीन के बीच कूटनीतिक, व्यापारिक और लोगों के बीच संपर्क को फिर मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के तौर पर देखा जा रहा है।
छह साल बाद फिर जुड़ेगा ग्वांगझू–दिल्ली हवाई रूट:चाइना सदर्न एयरलाइंस 21 सितंबर से ग्वांगझू–दिल्ली सेवा शुरू करेगी। एयरलाइन ने बताया है कि इस बहाली के बाद दक्षिण एशिया में उसका नेटवर्क आठ राउंड-ट्रिप रूटों पर 100 से अधिक साप्ताहिक उड़ानों तक पहुंच जाएगा। एयरलाइन की आधिकारिक समय-सारणी के अनुसार दिल्ली से ग्वांगझू की उड़ान भी दैनिक आधार पर संचालित की जाएगी।
यह रूट लंबे समय से बंद था। कोविड-19 महामारी के बाद भारत-चीन के बीच हवाई संपर्क बाधित हुआ और इसके बाद 2020 के गलवान संघर्ष ने दोनों देशों के संबंधों में तनाव को और बढ़ा दिया। इसका असर सीधी उड़ानों, वीजा व्यवस्था और दोनों देशों के बीच लोगों की आवाजाही पर पड़ा।
सिर्फ एक रूट नहीं—भारत-चीन के बीच सीधी कनेक्टिविटी बढ़ रही: ग्वांगझू–दिल्ली सेवा की बहाली अकेली घटना नहीं है। भारत और चीन के बीच प्रत्यक्ष हवाई संपर्क धीरे-धीरे बहाल हो रहा है।
इस वर्ष चाइना ईस्टर्न एयरलाइंस ने 18 अप्रैल को कुनमिंग–कोलकाता सीधी सेवा फिर शुरू की, जबकि अन्य भारतीय और चीनी एयरलाइनों ने भी प्रमुख शहरों के बीच सीधी सेवाएं बहाल की हैं। इससे संकेत मिलता है कि दोनों देशों के बीच हवाई संपर्क को चरणबद्ध तरीके से सामान्य करने की प्रक्रिया आगे बढ़ रही है।
इसका मतलब यह है कि अब यात्रियों, कारोबारियों, छात्रों और अन्य यात्रियों के लिए भारत और चीन के बीच सीधे सफर के विकल्प धीरे-धीरे बढ़ सकते हैं।
शी जिनपिंग का दौरा—संबंधों में नई गर्माहट?: चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग 12 सितंबर को ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए नई दिल्ली पहुंचे हैं। यह 2019 के बाद उनकी पहली भारत यात्रा है। इस दौरान उनकी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ द्विपक्षीय बैठक भी प्रस्तावित है।
यह दौरा इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि 2020 के गलवान संघर्ष के बाद भारत-चीन संबंध लंबे समय तक तनावपूर्ण रहे। दोनों देशों ने अक्टूबर 2024 में सीमा क्षेत्रों में सैन्य तनाव कम करने के लिए एक समझौता किया, जिसके बाद संबंधों को धीरे-धीरे स्थिर करने की प्रक्रिया शुरू हुई। Reuters के अनुसार दिसंबर 2024 तक संबंधित टकराव वाले क्षेत्रों से सैनिकों की वापसी की प्रक्रिया पूरी हो गई थी।
मोदी–शी मुलाकात में किन मुद्दों पर होगी चर्चा?: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति शी जिनपिंग की मुलाकात में केवल सीमा विवाद ही नहीं, बल्कि व्यापार, निवेश, वीजा, तकनीक, सप्लाई चेन, बाजार पहुंच और लोगों के बीच संपर्क जैसे मुद्दे भी महत्वपूर्ण हो सकते हैं।
भारत और चीन के आर्थिक संबंधों का आकार बहुत बड़ा है। Reuters के अनुसार वित्त वर्ष 2025-26 में चीन भारत का सबसे बड़ा आयात स्रोत रहा और चीन से भारत का आयात करीब 132 अरब डॉलर रहा।
ऐसे में दोनों देशों के बीच सीधी उड़ानों की बहाली व्यापारिक संपर्क को भी गति दे सकती है।
कारोबारियों के लिए क्या बदलेगा: सीधी उड़ानें शुरू होने से भारत और चीन के बीच व्यापार करने वाले कारोबारियों के लिए यात्रा आसान हो सकती है। कनेक्टिंग फ्लाइटों पर निर्भरता कम होने से यात्रा के समय और संचालन संबंधी परेशानियों में कमी आने की संभावना है।
चीन से मशीनरी, इलेक्ट्रॉनिक्स, औद्योगिक उपकरण और अन्य सामान से जुड़े भारतीय कारोबारी चीन की यात्रा अधिक आसानी से कर सकेंगे। इसी तरह भारतीय कंपनियों और निर्यातकों के लिए चीनी बाजार तक पहुंच बनाने और व्यावसायिक संपर्क बढ़ाने में भी सुविधा हो सकती है।
छात्रों, पर्यटकों और परिवारों के लिए भी राहत: सीधी उड़ानों का प्रभाव केवल कारोबार तक सीमित नहीं रहेगा। विद्यार्थी, शोधकर्ता, पर्यटक और दोनों देशों में रहने वाले परिवार भी इससे लाभान्वित हो सकते हैं।
सीधा हवाई संपर्क पीपल-टू-पीपल टाइज को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। इससे दोनों देशों के नागरिकों के बीच आवाजाही बढ़ने और सामाजिक एवं सांस्कृतिक संपर्क को फिर से गति मिलने की संभावना है।
लेकिन सभी समस्याएं खत्म नहीं हुईं: हवाई सेवाओं की बहाली को भारत-चीन संबंधों में सकारात्मक कदम जरूर माना जा रहा है, लेकिन इसे दोनों देशों के संबंधों में पूर्ण सामान्य स्थिति की वापसी नहीं कहा जा सकता।
एल.ए.सी. पर सैन्य स्थिति, अरुणाचल प्रदेश को लेकर विवाद, चीनी निवेश से जुड़ी भारतीय सुरक्षा चिंताएं, व्यापार असंतुलन, वीजा और बाजार पहुंच जैसे कई संवेदनशील मुद्दे अभी भी मौजूद हैं। Reuters ने भी दोनों देशों के बीच सीमा पर सैन्य मौजूदगी और व्यापार तथा सुरक्षा से जुड़ी चिंताओं को जारी चुनौती बताया है।
इसलिए सीधी उड़ानों की बहाली को अधिक सही तौर पर संपर्क और विश्वास बहाली की दिशा में एक महत्वपूर्ण लेकिन सीमित कदम माना जा सकता है।
बड़ा संकेत—“संपर्क बढ़ाओ, रिश्ते संभालो”: शी जिनपिंग के दिल्ली दौरे और China Southern की सीधी उड़ान सेवा बहाल करने की घोषणा का समय विशेष ध्यान आकर्षित कर रहा है। एक तरफ भारत और चीन ब्रिक्स जैसे बहुपक्षीय मंच पर आर्थिक और वैश्विक मुद्दों पर साथ बैठ रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ दोनों देशों के बीच सीधा हवाई संपर्क भी फिर मजबूत किया जा रहा है।
स्पष्ट है कि भारत-चीन संबंधों में “टकराव से संवाद” और “दूरी से कनेक्टिविटी” की ओर एक सावधानीपूर्ण कदम आगे बढ़ रहा है।
हालांकि, इस रिश्ते की वास्तविक दिशा इस बात पर निर्भर करेगी कि दोनों देश सीमा विवाद, व्यापार असंतुलन, निवेश, सुरक्षा और रणनीतिक विश्वास जैसे कठिन मुद्दों पर कितनी प्रगति कर पाते हैं।
कुल मिलाकर, 21 सितंबर से ग्वांगझू–दिल्ली सीधी उड़ान की बहाली केवल यात्रियों के लिए नई सुविधा नहीं है, बल्कि यह भारत-चीन संबंधों में धीरे-धीरे लौट रही कनेक्टिविटी और संवाद का एक प्रतीकात्मक संकेत भी है।






