भारत पहुंचे ईरानी राष्ट्रपति का कड़ा संदेश; कहा—राष्ट्रीय संप्रभुता और सुरक्षा से समझौता नहीं
नई दिल्ली, 14 सितंबर 2026 (गुरमीत सिंह तुंग): पिछले दिन शनिवार को ब्रिक्स सम्मेलन के दौरान हिस्सा लेने के लिए भारत पहुंचे ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने कहा है कि ईरान अमेरिका और इजरायल के दबाव या धमकियों के आगे झुकने वाला नहीं है। नई दिल्ली में धार्मिक नेताओं, बुद्धिजीवियों, शिक्षाविदों और कारोबारी प्रतिनिधियों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि ईरान अपनी राष्ट्रीय संप्रभुता, सुरक्षा और राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए डटा रहेगा।
पेजेशकियन ने अमेरिका और इजरायल पर ईरान पर दबाव बनाने और क्षेत्रीय तनाव बढ़ाने के आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि ईरान को धमकाने की कोशिश सफल नहीं होगी और किसी भी हमले का जवाब देने की क्षमता उसके पास है। हालांकि, हमलों और नुकसान से संबंधित कुछ दावों की स्वतंत्र पुष्टि हर मामले में उपलब्ध नहीं है।
मोदी से मुलाकात, क्षेत्रीय स्थिति पर चर्चा: भारत दौरे के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पेजेशकियन से मुलाकात की। दोनों नेताओं ने पश्चिम एशिया की स्थिति, क्षेत्रीय स्थिरता, समुद्री सुरक्षा और भारत-ईरान संबंधों को लेकर विचार-विमर्श किया।
प्रधानमंत्री मोदी ने भारत का रुख दोहराया कि क्षेत्रीय विवादों का समाधान बातचीत और कूटनीति के माध्यम से होना चाहिए। उन्होंने समुद्री मार्गों की स्वतंत्रता, वाणिज्यिक जहाजों की सुरक्षा और समुद्री कर्मचारियों की रक्षा पर भी जोर दिया।
होर्मुज की खाड़ी पर दुनिया की नजर: पश्चिम एशिया के तनाव में होर्मुज की खाड़ी सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा बनी हुई है। यह मार्ग वैश्विक ऊर्जा व्यापार के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। यहां जहाजरानी प्रभावित होने से कच्चे तेल की कीमतों, बीमा लागत और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला पर असर पड़ सकता है।
ईरान का दावा है कि वह अपनी रक्षा कर रहा है और संघर्ष की शुरुआत करने वाला पक्ष नहीं है। दूसरी ओर, अमेरिका और इजरायल ईरान की सैन्य और क्षेत्रीय गतिविधियों को अपने लिए खतरा बताते हैं।
ब्रिक्स के जरिए वैकल्पिक सहयोग की कोशिश: अमेरिकी प्रतिबंधों का सामना कर रहे ईरान के लिए ब्रिक्स आर्थिक और कूटनीतिक सहयोग का एक महत्वपूर्ण मंच है। स्थानीय मुद्राओं में व्यापार और वैकल्पिक भुगतान प्रणालियों के माध्यम से ईरान पश्चिमी वित्तीय प्रणाली पर अपनी निर्भरता कम करना चाहता है।
भारत के लिए ईरान के साथ संबंध रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण हैं। चाबहार बंदरगाह भारत को मध्य एशिया और अफगानिस्तान तक पहुंच का मार्ग प्रदान करता है। इसके साथ ही भारत के अमेरिका, इजरायल और खाड़ी देशों के साथ भी महत्वपूर्ण संबंध हैं। इसलिए नई दिल्ली को कूटनीतिक संतुलन बनाए रखना होगा।
पेजेशकियन का भारत से दिया गया बयान ईरान की सख्त नीति का संकेत है। उन्होंने स्पष्ट किया कि ईरान दबाव के आगे समर्पण नहीं करेगा। अब दुनिया की नजर इस बात पर है कि यह टकराव और बढ़ता है या भारत जैसे देशों के कूटनीतिक प्रयासों के जरिए बातचीत का रास्ता खुलता है।






