पटियाला, 15 सितंबर, 2026 (जगजीत सिंह): भाषा विभाग पंजाब की ओर से आज यहां भाषा भवन में हिंदी दिवस के अवसर पर प्रभावशाली कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस दौरान प्रबुद्ध कहानीकारों ने अपनी कहानियों का पाठ किया और विशेषज्ञों ने कहानी कला से संबंधित अपने विचार प्रस्तुत किए। कार्यक्रम के दौरान अतिरिक्त निदेशक चंदनदीप कौर ने अपने स्वागत भाषण में विभाग की हिंदी से संबंधित गतिविधियों पर प्रकाश डाला।
कार्यक्रम की शुरुआत प्रसिद्ध कहानीकार डॉ. धर्मपाल साहिल ने अपनी कहानी ‘पिंड दान’ के पाठ से की। उन्होंने सामाजिक सरोकारों की चर्चा करते हुए पारिवारिक उलझनों का बेहद सरल और संक्षिप्त ढंग से चित्रण किया। पात्रों का सृजन और सशक्त कथानक डॉ. साहिल की कहानी की विशेषता रहा।
इसके बाद डॉ. मीनाक्षी वर्मा ने अपनी कहानी ‘गौ-धली’ का पाठ किया। इस कहानी के माध्यम से उन्होंने पति-पत्नी के आपसी संबंधों को प्रस्तुत किया। कहानी में यह बात उभरकर सामने आई कि मृत्यु जैसे संकट के समय भी पति-पत्नी की मजबूत साझेदारी बेहतर निर्णय लेकर अपने बच्चों का भविष्य सुरक्षित कर सकती है। समग्र रूप से यह कहानी महिला के अंतर्मन की उथल-पुथल को अभिव्यक्त करती थी।
कहानी में प्रवाह होना जरूरी: प्रो. राकेश कुमार
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए प्रो. राकेश कुमार ने कहा कि भले ही दुनिया के देशों के बीच सीमाएं हैं, लेकिन साहित्यकार इन सीमाओं की बंदिशों को तोड़कर अपनी रचनाओं के माध्यम से पूरी दुनिया को एक सूत्र में पिरोने का प्रयास कर रहे हैं और इसमें सफल भी हो रहे हैं।
कहानी कला के संबंध में उन्होंने कहा कि हिंदी कहानी की परंपरा उतनी ही पुरानी है, जितनी मानव सभ्यता। कहानियों का हमारे साथ एक जैविक संबंध है। ये हवा की तरह हमारे आसपास मौजूद रहती हैं, जिन्हें लेखक कागज पर उतारकर अमर बना देते हैं।

उन्होंने कहा कि हमारी कहानियों में प्रवाह कम होता जा रहा है, जबकि प्रवाह कहानी का मूल तत्व है। कहानी की रचना शब्दों की नदी की तरह होनी चाहिए, जो पाठक को अपने साथ बहाकर ले जाए और उसे नई भावनाओं से जोड़ दे।
प्रो. राकेश कुमार ने कहा कि भाषा विभाग अनेक पुरानी परंपराओं को तोड़कर नई राहें बना रहा है। विभाग साहित्य की सभी विधाओं से संबंधित उच्च स्तर के कार्यक्रम आयोजित कर रहा है, जिससे उसका दायरा लगातार बढ़ रहा है।
सभी भाषाओं का सम्मान जरूरी: नवीन कमल भारती
मुख्य अतिथि नवीन कमल भारती ने कहा कि भाषाओं के बीच किसी प्रकार का टकराव नहीं होता। सभी भाषाएं एक-दूसरे से जुड़ी हुई हैं और एक-दूसरे की पूरक हैं। उन्होंने कहा कि पंजाब की धरती पर वेदों की रचना हुई है, जिनसे भारत की अनेक भाषाओं का विकास हुआ। इसलिए हमें सभी भाषाओं का सम्मान करना चाहिए।
उन्होंने भाषा विभाग के साथ जुड़ी अपनी पुरानी यादों को भी साझा किया।
कार्यक्रम का संचालन सहायक निदेशक एवं कार्यक्रम की संचालक देविंदर कौर ने किया। इस अवसर पर विभाग के हिंदी प्रभाग की सेवानिवृत्त सहायक निदेशक श्रीमती मोहिनी चावला का विशेष सम्मान किया गया।
अंत में निदेशक भाषाएं सरदार जसवंत सिंह जफर ने विभाग की ओर से कहानीकारों और अतिथियों को विभागीय शॉल एवं पुस्तकों से सम्मानित किया।
इस अवसर पर उपनिदेशक आलोक चावला, सहायक निदेशक सुरिंदर कौर, जसप्रीत कौर, राबिया, पीएसपीएल के पूर्व निदेशक सरदार डी.पी. सिंह ग्रेवाल, हरजीत सिंह सोही, इंजीनियर जतिंदर सिंह, विभाग के पूर्व सहायक निदेशक बाबू राम दीवान एवं हरनेक सिंह ढोट, पत्रकार गुरनाम सिंह अकीदा, कविशर भीम सिंह एवं उनके साथी तथा बड़ी संख्या में साहित्य प्रेमी उपस्थित रहे।






