काहिरा, 15 सितंबर, 2026 (छत्रपाल सिंह): सऊदी अरब की करीब 1,200 किलोमीटर लंबी पूर्व-पश्चिम तेल पाइपलाइन पर हुए ड्रोन हमले ने वैश्विक ऊर्जा बाजार की चिंताएं बढ़ा दी हैं। अधिकारियों के अनुसार हमले में पाइपलाइन के एक प्रमुख पंपिंग स्टेशन को नुकसान पहुंचा है और इसकी मरम्मत में तीन से पांच सप्ताह तक का समय लग सकता है।
यह पाइपलाइन सऊदी अरब के तेल को फारस की खाड़ी के बंदरगाहों से लाल सागर स्थित यानबू बंदरगाह तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। होर्मुज जलडमरूमध्य में समुद्री यातायात प्रभावित होने के बीच यह मार्ग सऊदी अरब के लिए तेल निर्यात के वैकल्पिक रास्ते के तौर पर बेहद अहम माना जा रहा है।
सऊदी अधिकारियों ने हमले के लिए ईरान समर्थित इराकी मिलिशिया के ड्रोन को जिम्मेदार ठहराया है। अधिकारियों के मुताबिक मरम्मत के दौरान पाइपलाइन को सीमित क्षमता के साथ संचालित किए जाने की संभावना है, हालांकि इससे कितनी मात्रा में कच्चे तेल की आपूर्ति हो सकेगी, यह अभी स्पष्ट नहीं है।
नॉर्वे की रिसर्च फर्म रिस्टैड एनर्जी के अनुसार अगस्त के अंत से इस पाइपलाइन के जरिए प्रतिदिन औसतन 26 लाख से 40 लाख बैरल तेल का परिवहन हुआ है। पाइपलाइन के पूरी तरह बंद होने की स्थिति में वैश्विक बाजार में बड़ी मात्रा में तेल की उपलब्धता प्रभावित हो सकती है।
तेल आपूर्ति को लेकर बढ़ती आशंकाओं का असर अंतरराष्ट्रीय बाजार पर भी दिखाई दिया है। ब्रेंट क्रूड की कीमत 109 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंचने को बाजार में संभावित आपूर्ति संकट के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है। ऐसे में सऊदी पाइपलाइन की बहाली और क्षेत्र में सुरक्षा स्थिति आने वाले दिनों में वैश्विक तेल कीमतों के लिए महत्वपूर्ण रहेगी।






