16 सितंबर, 2026 (छत्रपाल सिंह): भारतीय पुरुष हॉकी टीम को विश्व कप से बाहर होने के बाद एशियाई खेलों की शुरुआत तक लगभग चार हफ्तों का ही समय मिल रहा है। इतने कम समय में खिलाड़ियों और कोचिंग स्टाफ के लिए टीम को पूरी तरह नए सिरे से तैयार करना चुनौतीपूर्ण होगा। पूर्व भारतीय कप्तान और गोलकीपर पी.आर. श्रीजेश का कहना है कि भारतीय हॉकी की स्थिति को टूटी हुई प्रणाली के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। उनके अनुसार टीम कुछ ऐसी गलतियों के चक्रव्यूह में फंसी हुई है, जिनसे बचा जा सकता है।
श्रीजेश ने खास तौर पर भारतीय टीम के रक्षात्मक खेल (डिफेंस) में मौजूद कमियों की ओर ध्यान दिलाया। उनके अनुसार डिफेंस में ढांचागत स्तर पर कुछ कमियों के कारण टीम द्वारा बार-बार एक ही तरह की गलतियां दोहराई जा रही हैं। उन्होंने कहा कि आने वाले बड़े मुकाबलों से पहले रक्षा पंक्ति के खिलाड़ियों के बीच बेहतर तालमेल और आपसी समझ विकसित करना बहुत जरूरी है। हालांकि कम समय में पूरी टीम में बड़े बदलाव करना मुश्किल है, लेकिन रक्षात्मक गलतियों को कम करके टीम के प्रदर्शन में सुधार लाया जा सकता है। श्रीजेश के विचारों के अनुसार एशियाई खेलों से पहले भारतीय टीम का मुख्य ध्यान रक्षात्मक संगठन, मैदान पर आपसी संवाद और खिलाड़ियों के बीच तालमेल मजबूत करने पर होना चाहिए।






