वॉशिंगटन, 19 सितंबर 2026 (शहीद-ए-आज़म ब्यूरो): अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने H-1B वीजा कार्यक्रम की निगरानी और सख्त करने के आदेश दिए हैं। 18 सितंबर को जारी कार्यकारी आदेश के तहत यदि कोई कंपनी अमेरिकी कर्मचारियों की छंटनी कर रही है या हाल ही में ऐसी छंटनी कर चुकी है और उसी समय H-1B कर्मचारियों को नियुक्त करने की कोशिश करती है, तो उसकी आवेदन प्रक्रिया की अधिक गहन जांच की जाएगी।
1 लाख डॉलर की फीस की अवधि बढ़ी: अमेरिका ने कुछ H-1B मामलों में लागू 1,00,000 अमेरिकी डॉलर की अतिरिक्त भुगतान शर्त को अगले 12 महीनों के लिए बढ़ा दिया है। नई व्यवस्था 21 सितंबर 2027 तक लागू रहेगी। यह पाबंदी विशेष रूप से अमेरिका से बाहर मौजूद H-1B कर्मचारियों के कुछ नए आवेदनों/प्रवेशों पर लागू होती है, जब तक निर्धारित भुगतान या लागू छूट उपलब्ध न हो।
अमेरिकी कर्मचारियों की छंटनी पर भी नजर: नए आदेश में विदेश मंत्रालय, श्रम विभाग और होमलैंड सिक्योरिटी विभाग को H-1B आवेदनों की समीक्षा के दौरान यह देखने के लिए कहा गया है कि प्रायोजक कंपनी ने पिछले एक वर्ष में समान पदों पर कार्यरत अमेरिकी कर्मचारियों को निकाला है या भविष्य में छंटनी की योजना बना रही है।
ट्रंप प्रशासन का क्या कहना है? व्हाइट हाउस का दावा है कि कुछ कंपनियों और आउटसोर्सिंग फर्मों द्वारा H-1B कार्यक्रम का दुरुपयोग किया जा रहा है, जिससे कम वेतन वाले विदेशी कर्मचारियों के जरिए अमेरिकी नौकरियों पर असर पड़ सकता है। प्रशासन के मुताबिक, 2025 की नीति के बाद बड़ी IT आउटसोर्सिंग कंपनियों के H-1B पंजीकरण में 92 प्रतिशत की कमी आई है। यह आंकड़ा व्हाइट हाउस की ओर से दिया गया है।
भारतीय IT पेशेवरों पर संभावित प्रभाव: H-1B कार्यक्रम अमेरिकी कंपनियों को विशेष कौशल वाले विदेशी पेशेवरों को नियुक्त करने की अनुमति देता है। इसलिए नई पाबंदियों का प्रभाव भारतीय IT और टेक्नोलॉजी पेशेवरों तथा उन्हें अमेरिका भेजने वाली कंपनियों पर भी पड़ सकता है। हालांकि, हर H-1B कर्मचारी के लिए 1 लाख डॉलर की फीस लागू होना जरूरी नहीं है, क्योंकि नियम में विशेष शर्तें और राष्ट्रीय हित से जुड़ी छूट का भी प्रावधान है।






