एडिड स्कूलों की मारू नीतियों से तंग आकर समय से पहले सेवानिवृत्ति लेने को मजबूर हो रहे स्कूल कर्मचारी: अश्वनी मदान
पटियाला, 21 सितंबर 2026 (अनिल कुमार भारती): पंजाब शिक्षा विभाग की एडिड स्कूलों से संबंधित मारू नीतियों से परेशान होकर एडिड स्कूलों के कर्मचारी समय से पहले सेवानिवृत्ति लेने के लिए मजबूर हो रहे हैं। यह बात पंजाब प्रदेश के नेता एवं पटियाला जिला अध्यक्ष अश्वनी मदान तथा जिला इकाई के महासचिव हरविंदर पाल ने प्रेस को जानकारी देते हुए कही।
उन्होंने कहा कि जब नौ-नौ महीने तक पूरी मेहनत करने के बावजूद वेतन नहीं मिलता और बच्चों को दो वक्त की रोटी खिलाना भी मुश्किल हो जाए, तो समय से पहले सेवानिवृत्ति लेना ही एकमात्र विकल्प बच जाता है। पंजाब के एडिड स्कूलों के अब तक सैकड़ों कर्मचारी समय से पहले सेवानिवृत्ति ले चुके हैं, जबकि कई कर्मचारी इस संबंध में गंभीरता से विचार कर रहे हैं।
एडिड स्कूलों के इतिहास के बारे में बताते हुए उन्होंने कहा कि वर्ष 1967 में पंजाब में शुरू हुई 95 प्रतिशत सहायता-अनुदान (ग्रांट-इन-एड) प्रणाली ने दशकों तक राज्य में शिक्षा का प्रसार किया और लाखों विद्यार्थियों के भविष्य का निर्माण किया। जिस साझेदारी मॉडल ने कभी पंजाब के कोने-कोने में शिक्षा का विस्तार किया था, आज वही एडिड (सरकारी सहायता प्राप्त) स्कूल प्रशासनिक उपेक्षा, अनिश्चितता और गहरे वित्तीय संकट से जूझ रहे हैं।
गंभीर संकट की स्थिति
वेतन का संकट: राज्य के विभिन्न एडिड स्कूलों के लगभग 1,400 शिक्षक और नॉन-टीचिंग कर्मचारी पिछले 9 से 18 महीनों से वेतन नहीं मिलने के कारण गंभीर आर्थिक परेशानी का सामना कर रहे हैं। बिना वेतन परिवार चलाना, बच्चों की शिक्षा का खर्च और इलाज का खर्च उठाना बेहद कठिन हो गया है।
भर्ती पर रोक से पैदा हुआ संकट: वर्ष 2003 से खाली पदों पर भर्ती बंद होने के कारण कर्मचारियों की संख्या लगातार कम हुई है। कई स्कूल महज 2-3 कर्मचारियों के सहारे चल रहे हैं, जिससे कर्मचारियों में समय से पहले सेवानिवृत्ति लेने का रुझान बढ़ा है।
पेंशन पात्रता में भेदभाव: सरकारी कर्मचारियों को 25 वर्ष की सेवा पूरी होने पर पूरी पेंशन मिलती है, जबकि एडिड कर्मचारियों को 33 वर्ष की सेवा का इंतजार करना पड़ता है। यह 8 वर्ष का अंतर सरासर अन्याय है।
सौ दुखों की एक दवा है मर्जर
अश्वनी मदान का कहना है कि सरकारी स्कूलों में मर्जर से पंजाब सरकार को भी अनेक लाभ होंगे। एडिड स्कूल कर्मचारियों का सरकारी स्कूलों में विलय न केवल कर्मचारियों के हित में है, बल्कि पंजाब सरकार के लिए भी बेहद लाभकारी साबित होगा।
₹200 करोड़ की राशि सरकारी खजाने में
एडिड स्कूल कर्मचारियों के प्रोविडेंट फंड की लगभग 200 करोड़ रुपये की अप्रयुक्त राशि सीधे राज्य के खजाने में जमा हो जाएगी, जिसे सरकार अन्य विकास कार्यों पर खर्च करने के लिए स्वतंत्र होगी। इस राशि को धीरे-धीरे कर्मचारियों की सेवानिवृत्ति के समय उन्हें वापस किया जा सकेगा।
25 से अधिक वर्षों के अनुभवी स्टाफ की उपलब्धता
सरकारी स्कूलों को 25 वर्ष से अधिक अनुभव वाले मेहनती और विशेषज्ञ शिक्षक तथा अन्य कर्मचारी मिलेंगे, जिससे सरकारी स्कूलों में शिक्षा के स्तर को और बेहतर किया जा सकेगा।
प्रशासनिक संसाधनों की बचत और उचित उपयोग
पूरे राज्य में एडिड स्कूलों से संबंधित मामलों की देखभाल के लिए तैनात 150 से अधिक सरकारी अधिकारी और कर्मचारी इस कार्य से मुक्त हो जाएंगे। सरकार उनकी सेवाओं का उपयोग अन्य महत्वपूर्ण प्रशासनिक जिम्मेदारियों में कर सकेगी।
एकमात्र समाधान और वादे की पूर्ति
जिला इकाई के महासचिव हरविंदर पाल ने कहा कि पंजाब के मुख्यमंत्री सरदार भगवंत मान और सत्ताधारी पार्टी ने अपने चुनावी घोषणापत्र में वादा किया था कि सरकार बनने पर एडिड स्कूल कर्मचारियों को सरकारी कर्मचारियों के समान सभी सुविधाएं दी जाएंगी। साढ़े चार साल से अधिक समय बीत जाने के बाद अब सरकार को अपना वादा पूरा करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि इन 1,400 कर्मचारियों का सरकारी स्कूलों में विलय (मर्जर) करने से राज्य सरकार का चुनावी वादा भी पूरा होगा और एडिड स्कूलों की वित्तीय, प्रशासनिक तथा पेंशन संबंधी सभी समस्याएं हमेशा के लिए समाप्त हो जाएंगी। सरकार को बिना किसी देरी के इस संबंध में अधिसूचना जारी करनी चाहिए।






