नई दिल्ली, 23 सितंबर, 2026 (गुरमीत सिंह तुंग): मतदाता सूचियों की विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया (SIR) को लेकर चुनाव आयोग के भीतर कथित मतभेदों की खबरों के बीच अब आयोग के सूत्रों ने इन दावों को खारिज किया है। चुनाव आयोग से जुड़े सूत्रों के अनुसार SIR समेत मतदाता सूचियों में संशोधन से संबंधित सभी महत्वपूर्ण फैसले मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और दोनों चुनाव आयुक्तों एस.एस. संधू तथा विवेक जोशी की मंजूरी के बाद सर्वसम्मति से लिए गए हैं।
यह विवाद उन मीडिया रिपोर्टों के बाद सामने आया, जिनमें दावा किया गया था कि मुख्य चुनाव आयुक्त ने SIR से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण फैसलों में अन्य चुनाव आयुक्तों को विश्वास में नहीं लिया। हालांकि, आयोग के सूत्रों ने स्पष्ट किया कि तीनों सदस्यों की सहमति से ही फैसले लिए गए हैं।
दूसरी ओर, राज्यसभा सांसद और वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने इस पूरे मामले पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि यदि आयोग के फैसले निर्धारित बहुमत के आधार पर नहीं लिए गए हैं, तो ऐसे फैसलों की वैधता पर सवाल खड़ा होता है।
सिब्बल ने दावा किया कि 25 जून 2025 के बाद लिए गए कई फैसले कथित तौर पर दोनों अन्य चुनाव आयुक्तों की आपत्तियों के बावजूद लिए गए। उन्होंने मांग की कि यदि किसी फैसले में आयोग के बहुमत की सहमति नहीं थी, तो ऐसे सभी फैसलों को रद्द घोषित किया जाना चाहिए।
इस विवाद के बीच मुख्य मुद्दा यह है कि SIR जैसे महत्वपूर्ण चुनावी फैसले चुनाव आयोग के सभी सदस्यों की सहमति से लिए गए या फिर उनमें मतभेद मौजूद थे। फिलहाल आयोग के सूत्र सर्वसम्मति से निर्णय लिए जाने की बात कह रहे हैं, जबकि सिब्बल इस दावे के विपरीत सवाल उठा रहे हैं।






