लंदन, 28 सितंबर 2026 (चौधरी प्रभजीत सिंह) : रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान ड्रोन तकनीक में लगातार बदलाव देखने को मिल रहा है। रूस द्वारा इस्तेमाल किए जा रहे नए लंबी दूरी वाले जेट-पावर्ड गेरान-5 ड्रोन ने यूक्रेन की वायु रक्षा प्रणाली के सामने नई चुनौती खड़ी कर दी है। 14 सितंबर को यूक्रेनी वायु सेना के प्रवक्ता कर्नल यूरी इग्नात ने कहा कि यूक्रेन नए गेरान-5 ड्रोन से होने वाले हमलों में से लगभग 60 प्रतिशत को ही रोक पा रहा है। इसके मुकाबले अन्य प्रकार के ड्रोन को रोकने की दर लगभग 95 प्रतिशत बताई गई है।
गेरान-5 का शरीर बेलनाकार आकार का है और इसमें सीधे पंख लगे हैं। इसकी बनावट सामान्य लंबी दूरी वाले ड्रोन की तुलना में क्रूज मिसाइल से अधिक मिलती-जुलती है। रूसी सूत्रों के मुताबिक, यह ड्रोन लगभग 1,000 किलोमीटर तक उड़ान भर सकता है और करीब 6,000 मीटर की ऊंचाई तक पहुंच सकता है।
इसकी अनुमानित अधिकतम गति 600 किलोमीटर प्रति घंटा है। इसके अलावा इसमें एंटी-जैमिंग तकनीक होने की भी जानकारी दी गई है। इन विशेषताओं के कारण जमीन से संचालित होने वाली वायु रक्षा प्रणालियों के लिए इसे रोकना अधिक मुश्किल हो सकता है। यूरी इग्नात के मुताबिक, रूस द्वारा अगस्त से गेरान-5 का इस्तेमाल शुरू किए जाने के बाद यूक्रेन को इन ड्रोन को रोकने के लिए लड़ाकू विमानों पर भी अधिक निर्भर करना पड़ रहा है। यूक्रेनी पायलट सीधे तौर पर इन ड्रोन को निशाना बनाने की कोशिश कर रहे हैं।
अपने आप लक्ष्य चुनने की क्षमता का दावा
रूसी सैन्य विशेषज्ञ यूरी नूतॉव के हवाले से बताया गया है कि गेरान-5 में डिजिटल भू-मानचित्र से जुड़ी मशीन विजन तकनीक का इस्तेमाल किया जाता है। दावों के मुताबिक, इससे ड्रोन इलाके की पहचान कर अपने लक्ष्य का चयन करने में सक्षम हो सकता है।
ड्रोन ने बदला युद्ध का हवाई स्वरूप
2022 में रूस के पूर्ण पैमाने पर हमले की शुरुआत के समय हवाई युद्ध में दोनों पक्ष मुख्य रूप से लड़ाकू विमानों का इस्तेमाल कर रहे थे। बाद में प्रभावी वायु रक्षा प्रणालियों के कारण विमानों के लिए खतरा बढ़ा और युद्ध में लंबी दूरी से हमले करने वाली तकनीकों का इस्तेमाल बढ़ने लगा।
2023 से रूस ने ग्लाइड बमों का इस्तेमाल भी बड़े पैमाने पर किया। इन्हें लक्ष्य से काफी दूर से दागा जा सकता है, जिससे कई मामलों में ये वायु रक्षा प्रणालियों की पहुंच से बाहर रहते हैं। इस दौरान ड्रोन हवाई युद्ध का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन गए। इनमें पायलट या अन्य चालक दल के सदस्य नहीं होते, जिससे मानव जीवन के सीधे जोखिम को कम किया जा सकता है और कई प्रकार के ड्रोन बड़ी संख्या में तैयार किए जा सकते हैं।
गेरान-1 से गेरान-5 तक तकनीकी बदलाव
रूस द्वारा पहले इस्तेमाल किए जाने वाले गेरान-1 और गेरान-2 मुख्य रूप से प्रोपेलर से चलने वाले ड्रोन थे। इन्हें ईरानी शाहेद-136 से मिलते-जुलते रूसी मॉडल माना जाता है।
2025 में रूस का जेट इंजन वाला गेरान-3 सामने आया। इसकी गति लगभग 330 किलोमीटर प्रति घंटा बताई गई, जो गेरान-2 की तुलना में काफी अधिक थी। इसके बाद उसी वर्ष गेरान-4 की जानकारी सामने आई, जिसकी अनुमानित गति 500 किलोमीटर प्रति घंटा और रेंज 850 किलोमीटर बताई गई।
अगस्त 2026 में रूसी सेना द्वारा गेरान-5 का इस्तेमाल किए जाने की जानकारी सामने आई। इस मॉडल को पिछले जेट-पावर्ड गेरान ड्रोन की तुलना में अधिक तेज और अधिक लंबी दूरी वाला बताया जा रहा है।
विदेशी तकनीक के इस्तेमाल का दावा
यूक्रेनी मिलिट्री इंटेलिजेंस द्वारा गेरान-5 से बरामद किए गए हिस्सों के संबंध में जारी जानकारी में चीनी जेट इंजन, अमेरिकी डिजिटल प्रोसेसर और जर्मन ट्रांजिस्टर के इस्तेमाल का दावा किया गया है। यूक्रेनी अधिकारियों का कहना है कि यह जानकारी दर्शाती है कि रूस प्रतिबंधों के बावजूद विभिन्न देशों से वाणिज्यिक तकनीक और कल-पुर्जे हासिल करके अपनी घरेलू उत्पादन क्षमता को बनाए रख रहा है। हालांकि, इन आपूर्ति श्रृंखलाओं और प्रतिबंधों को दरकिनार करने संबंधी दावों की स्वतंत्र पुष्टि इस रिपोर्ट में नहीं की गई है।
यूक्रेनी मिलिट्री इंटेलिजेंस के मुताबिक, रूस गेरान-4 और गेरान-5 के उत्पादन को प्राथमिकता दे रहा है और आने वाले पतझड़ तथा सर्दियों के महीनों के लिए इन ड्रोन का भंडार बढ़ाने की कोशिश कर रहा है।
इसके साथ ही यूक्रेन की ओर से पश्चिमी देशों से मिलने वाली Patriot मिसाइलों की उपलब्धता को लेकर भी चिंता जताई गई है। यूक्रेनी मिलिट्री इंटेलिजेंस के उप प्रमुख मेजर जनरल वादिम स्किबित्सकी ने अगस्त में कहा था कि जेट-पावर्ड गेरान ड्रोन का मुकाबला करने के लिए उचित गति वाली नई इंटरसेप्टर मिसाइलों की आवश्यकता है।





