नई दिल्ली, 1 अक्टूबर, 2026 (गुरमीत सिंह तुंग): मतदाता सूचियों के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन को लेकर चल रहे विवाद के बीच लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने ऑनलाइन फॉर्म-6 में किए गए बदलाव को लेकर चुनाव आयोग से सवाल पूछे हैं। राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पूछा कि चुनाव आयोग में किस अधिकारी ने टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) को फॉर्म-6 में बदलाव करने के लिए कहा और इस बदलाव को मंजूरी किसने दी। यह मामला उस समय सामने आया जब एक रिपोर्ट में दावा किया गया कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने ऑनलाइन फॉर्म-6 में किए गए बदलाव पर आपत्ति दर्ज कराई थी।
फॉर्म-6 में जोड़ी गई थी अतिरिक्त घोषणा
रिपोर्टों के मुताबिक, ई.सी.आई.नेट पोर्टल पर नए मतदाताओं के पंजीकरण के लिए इस्तेमाल होने वाले फॉर्म-6 के साथ एक अतिरिक्त SIR-संबंधी घोषणा जोड़ी गई थी। इसमें आवेदक से पूछा जाता था कि क्या उसका, उसके माता-पिता या दादा-दादी का नाम पिछली SIR के दौरान तैयार की गई मतदाता सूची में दर्ज था। राहुल गांधी ने इस बदलाव को लेकर जवाबदेही और मंजूरी की प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने यह भी पूछा कि क्या TCS पर यह बदलाव करने के लिए कोई दबाव था। ये राहुल गांधी द्वारा उठाए गए दावे और सवाल हैं, जिन पर संबंधित पक्षों की अपनी स्थिति भी मौजूद है।
ई.सी.आई. ने कई जगहों पर अतिरिक्त घोषणा हटाई
चुनाव आयोग ने 30 सितंबर को उन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में ऑनलाइन फॉर्म-6 से अतिरिक्त SIR घोषणा हटा दी, जहां मतदाता सूची की SIR प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। इन स्थानों पर नए मतदाताओं को अब निर्वाचक पंजीकरण नियम, 1960 के तहत निर्धारित सामान्य फॉर्म-6 भरना होगा। जहां SIR प्रक्रिया जारी है, वहां यह अतिरिक्त घोषणा उपलब्ध रहने की जानकारी दी गई है। ECI ने यह भी कहा है कि फॉर्म-6 में स्वयं कोई बदलाव नहीं किया गया था, बल्कि SIR के लिए एक अतिरिक्त घोषणा जोड़ी गई थी। आयोग ने ई.सी.आई.नेट प्रणाली की समीक्षा के लिए एक समिति गठित करने की भी जानकारी दी है, जिसमें वरिष्ठ उप चुनाव आयुक्त के साथ IIT/IIIT का एक स्वतंत्र विशेषज्ञ शामिल होगा।
एस.आई. आर. को लेकर विपक्ष का विरोध
फॉर्म-6 के मुद्दे ने SIR को लेकर चल रही राजनीतिक बहस को और तेज कर दिया है। INDIA ब्लॉक की पार्टियों ने चुनाव आयोग के सामने अपने मुद्दे रखने के लिए विरोध कार्यक्रमों की घोषणा की है। कांग्रेस की ओर से 2 से 8 अक्टूबर तक जिला स्तर पर “Save Democracy March” आयोजित करने की बात कही गई है। वहीं चुनाव आयोग का कहना है कि मतदाता सूचियां निर्धारित कानूनी और संवैधानिक प्रक्रियाओं के अनुसार तैयार की जाती हैं और ECINET की कार्यप्रणाली की समीक्षा के लिए भी कदम उठाए जा रहे हैं।






