चेन्नई/बेंगलुरु, 5 अक्टूबर, 2026 (शहीद-ए-आजम ब्यूरो): बैंकिंग क्षेत्र में काम के बढ़ते दबाव, लंबे कामकाजी घंटों और अधिकारियों के मानसिक स्वास्थ्य को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
चेन्नई में इंडियन बैंक के मुख्य प्रबंधक कनिष्क बाजपेयी, उम्र 57 वर्ष, की बैंक के मुख्यालय की चौथी मंजिल से छलांग लगाने के कारण मौत हो गई। वह सूचना प्रौद्योगिकी विभाग में मुख्य प्रबंधक के पद पर तैनात थे। पुलिस द्वारा मामले की जांच की जा रही है।
इसी दौरान आईडीबीआई बैंक के बेंगलुरु क्षेत्र से संबंधित दो ग्रेड-बी अधिकारियों—सी.एस. विजय राघवन, उम्र 51 वर्ष, और बिजू देव वी., उम्र 36 वर्ष—की सितंबर महीने के दौरान हुई मौत ने भी बैंक अधिकारियों की कामकाजी परिस्थितियों पर चर्चा तेज कर दी है।
ऑल इंडिया आईडीबीआई ऑफिसर्स एसोसिएशन, ऑल इंडिया पंजाब एंड सिंध बैंक ऑफिसर्स यूनियन के कन्वीनर श्री समीर मेहरौत और पंजाब एंड सिंध बैंक ऑफिसर्स यूनियन के पटियाला यूनिट के कन्वीनर सरदार रमन प्रीत सिंह ने अक्टूबर में पत्र जारी कर दोनों मामलों की निष्पक्ष, समयबद्ध जांच और जिम्मेदारी तय करने की मांग की है।
एसोसिएशन की ओर से अधिकारियों के तबादलों, जांच-पड़ताल से जुड़े अतिरिक्त काम, लंबे कामकाजी घंटों, कर्मचारियों की कमी और काम के दबाव जैसे मुद्दे उठाए गए हैं। जून 2026 में भी एसोसिएशन ने समीक्षा बैठकों के तौर-तरीकों, अधिकारियों पर दबाव और कथित ‘जहरीले कार्य वातावरण’ को लेकर चिंता व्यक्त की थी।
हालांकि, इन मौतों का सीधा कारण कामकाजी दबाव या कार्यस्थल के माहौल को मानना इस समय तथ्यों से परे होगा। इस संबंध में जांच के परिणाम महत्वपूर्ण रहेंगे।
इन घटनाओं ने बैंकिंग क्षेत्र में काम और निजी जीवन के संतुलन, कर्मचारियों की कमी, अनुचित लक्ष्यों, समीक्षा बैठकों के दबाव और कर्मचारी कल्याण जैसे मुद्दों पर संस्थागत ध्यान देने की आवश्यकता को उजागर किया है।
यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस में शामिल ऑल इंडिया बैंक ऑफिसर्स कॉन्फेडरेशन को भी ऐसी घटनाओं का गंभीरता से संज्ञान लेते हुए बैंक प्रबंधन के समक्ष मामला उठाने, निष्पक्ष जांच की मांग करने और अधिकारियों तथा कर्मचारियों के लिए सुरक्षित, सम्मानजनक और संतुलित कार्य वातावरण सुनिश्चित करने के लिए ठोस कदम उठाने की आवश्यकता है।
अब सवाल यह है—क्या हर त्रासदी के बाद केवल संवेदना व्यक्त की जाएगी, या बैंकिंग क्षेत्र में काम के दबाव और कर्मचारी कल्याण के लिए कोई प्रभावी संस्थागत व्यवस्था भी बनाई जाएगी?





