नाभा, 6 अक्टूबर 2026 (हर्षलीन सिंह): कृषि अधिकारी पटियाला के दिशा-निर्देशों और ब्लॉक कृषि अधिकारी नाभा के नेतृत्व में ब्लॉक नाभा के गांव अभयपुर, बाबरपुर, टौहड़ा, घमरौदा, हियाणा खुर्द, फतेहपुर आदि में धान की पराली न जलाने और इसके उचित प्रबंधन के लिए लगातार गांव स्तर पर जागरूकता कैंप लगाए जा रहे हैं।
कैंपों के दौरान कृषि विभाग नाभा की ओर से किसानों को बताया गया कि पराली को आग लगाने से जहां पर्यावरण प्रदूषित होता है, वहीं मिट्टी में मौजूद मित्र कीट भी नष्ट हो जाते हैं और भूमि की उपजाऊ शक्ति पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। पराली जलाने से पैदा होने वाले धुएं के कारण सांस संबंधी बीमारियां, आंखों में जलन और कई अन्य स्वास्थ्य समस्याएं भी पैदा हो सकती हैं।
कैंप के दौरान किसानों को पराली के उचित प्रबंधन के लिए आधुनिक कृषि मशीनरी जैसे सुपर सीडर, हैप्पी सीडर, सरफेस सीडर, स्मार्ट सीडर और बेलर आदि के इस्तेमाल संबंधी जानकारी दी गई। कृषि विशेषज्ञों ने बताया कि पराली को खेत की मिट्टी में मिलाने से मिट्टी में जैविक पदार्थ (ऑर्गेनिक मैटर) की मात्रा बढ़ती है, जिससे भूमि की गुणवत्ता में सुधार होने के साथ-साथ अगली फसल के उत्पादन में भी बढ़ोतरी होती है।
इस अवसर पर किसानों को विभाग की ओर से कृषि मशीनरी पर दी जा रही सब्सिडी और अन्य सरकारी योजनाओं के बारे में भी जागरूक किया गया। विभाग के प्रतिनिधियों ने किसानों से अपील की कि वे पर्यावरण और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य को सुरक्षित रखने के लिए पराली को आग न लगाएं और ‘जीरो बर्निंग’ के संदेश को व्यवहार में लाएं।
कैंप के अंत में सभी किसानों ने पराली न जलाने और पर्यावरण को स्वच्छ रखने में अपना पूरा सहयोग देने का भरोसा दिलाया।





