हरियाणा, 6 अक्टूबर 2026 (संजीव शर्मा): हरियाणा में मौत के कारणों से जुड़ी जानकारी की उपलब्धता और गुणवत्ता को मजबूत करने के लिए रोहतक जिले में आईसीएमआर-वित्त पोषित वर्बल ऑटोप्सी प्रोजेक्ट का पायलट परीक्षण किया जाएगा। हरियाणा स्वास्थ्य विभाग के सहयोग से एम्स, नई दिल्ली के नेतृत्व में शुरू की गई इस पहल के तहत रोहतक को पायलट जिले के रूप में चुना गया है।
इस परियोजना का उद्देश्य स्वास्थ्य योजना और सार्वजनिक स्वास्थ्य से जुड़े फैसलों में मदद के लिए मौत के कारणों के बारे में अधिक व्यवस्थित जानकारी एकत्र करना है।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव डॉ. सुमिता मिश्रा ने बताया कि परियोजना की अवधि के दौरान लगभग 5,000 मौतों को इसमें शामिल किया जाएगा। इस पहल के तहत स्वास्थ्य प्रणाली के नामित कर्मचारी पात्र मौतों की पहचान करेंगे और एक निर्धारित मोबाइल आधारित एप्लिकेशन के माध्यम से वर्बल ऑटोप्सी (मौखिक) इंटरव्यू करेंगे। इंटरव्यू के दौरान एकत्र जानकारी की बाद में मेडिकल अधिकारी द्वारा समीक्षा की जाएगी और निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार मौत का कारण तय किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि इस पहल का उद्देश्य मौत की परिस्थितियों और संभावित कारणों से जुड़ी जानकारी उपलब्ध कराकर मृत्यु रिपोर्टिंग को अधिक प्रभावी बनाना है। मौत के कारणों से संबंधित अधिक सटीक डेटा स्वास्थ्य अधिकारियों को जिला स्तर पर मृत्यु दर के पैटर्न को समझने में मदद करेगा। इससे साक्ष्य आधारित योजना बनाने और सार्वजनिक स्वास्थ्य हस्तक्षेपों को प्राथमिकता देने में भी मदद मिलेगी।
उन्होंने बताया कि परियोजना की कार्यान्वयन अवधि लगभग 8 महीने निर्धारित की गई है और इसे रोहतक जिला स्वास्थ्य प्रशासन के समन्वय से मौजूदा स्वास्थ्य प्रणाली के माध्यम से संचालित किया जाएगा। इस प्रक्रिया में कम्युनिटी हेल्थ ऑफिसर और मेडिकल ऑफिसर शामिल होंगे।
परियोजना के प्रावधानों के अनुसार, प्रत्येक पूर्ण वर्बल ऑटोप्सी के लिए कम्युनिटी हेल्थ ऑफिसर को 100 रुपये तथा जानकारी की समीक्षा कर मौत का कारण निर्धारित करने वाले मेडिकल ऑफिसर को 100 रुपये का मानदेय दिया जाएगा।
उन्होंने कहा कि परियोजना के तहत डिजिटल वर्कफ्लो अपनाया जाएगा, जिसमें निर्धारित मोबाइल एप्लिकेशन के माध्यम से वर्बल ऑटोप्सी इंटरव्यू किए जाएंगे। इस प्रक्रिया में शामिल कर्मचारियों को कार्यप्रणाली और डिजिटल प्रक्रिया के संबंध में प्रशिक्षण दिया जाएगा। यह पहल मौत के कारणों से जुड़ी जानकारी के दस्तावेजीकरण और रिपोर्टिंग में स्वास्थ्य कर्मचारियों की क्षमता को मजबूत करने का भी प्रयास है।
एम्स, नई दिल्ली ने रोहतक में मौजूदा स्वास्थ्य ढांचे के माध्यम से परियोजना को लागू करने के लिए हरियाणा स्वास्थ्य विभाग से सहयोग मांगा है। इस पायलट परीक्षण से जिला स्तर पर मौत के कारणों से संबंधित जानकारी के संग्रह और दस्तावेजीकरण की व्यवस्था को मजबूत करने में अनुभव मिलने की उम्मीद है।





