चंडीगढ़, 11 अक्टूबर,2026: (राजेश कुमार दास): प्रतिष्ठित स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी और वैश्विक प्रकाशक एल्सेवियर द्वारा वर्ष 2026 के लिए जारी ‘दुनिया के शीर्ष 2 प्रतिशत वैज्ञानिकों’ की प्रतिष्ठित सूची में चंडीगढ़ के 111 शोधकर्ताओं ने अपनी जगह बनाकर शहर का नाम अंतरराष्ट्रीय पटल पर रोशन किया है. यह उपलब्धि चिकित्सा, विज्ञान और प्रौद्योगिकी जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में चंडीगढ़ के संस्थानों के वैश्विक शोध प्रभाव को दर्शाती है.
पीजीआई के 55 और पंजाब यूनिवर्सिटी के 56 वैज्ञानिक शामिल
इस प्रतिष्ठित सूची में पोस्टग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च (PGI) के कुल 55 शोधकर्ता शामिल हैं. इनमें से 21 वैज्ञानिकों को उनके पूरे करियर के शोध प्रभाव पर आधारित ‘लाइफटाइम श्रेणी’ में और अन्य को ‘वार्षिक शोध प्रभाव श्रेणी’ में स्थान मिला है.
वहीं, पंजाब विश्वविद्यालय (PU) के 56 शोधकर्ताओं ने सूची में जगह बनाई है, जिनमें 28 लाइफटाइम श्रेणी में और 54 वार्षिक श्रेणी में शामिल हैं. उल्लेखनीय है कि पीयू के 26 वैज्ञानिकों के नाम दोनों श्रेणियों में साझा होने के कारण कुल 56 अद्वितीय (Unique) शोधकर्ता इस सूची का हिस्सा बने हैं.
चयन के कड़े मानक और मूल्यांकन आधार
वैज्ञानिकों का यह वैश्विक चयन ‘स्कोपस’ (Scopus) डेटाबेस के व्यापक आंकड़ों के विश्लेषण के आधार पर किया गया है. इसमें निम्नलिखित प्रमुख मानकों का आकलन किया गया:
शोध पत्र और प्रकाशन: प्रकाशित शोधपत्रों की कुल संख्या.
उद्धरण (Citations): अन्य शोधकर्ताओं द्वारा दिए गए साइटेशन का प्रभाव.
एच-इंडेक्स (h-index): शोध की गुणवत्ता और निरंतरता.
सह-लेखकत्व व योगदान: शोधपत्रों में लेखक की भूमिका का मूल्यांकन.
नोट: वार्षिक श्रेणी में मुख्य रूप से वर्ष 2025 के दौरान हुए शोध प्रभाव को मापा गया है, जबकि लाइफटाइम श्रेणी शोधकर्ताओं के पूरे करियर के अकादमिक योगदान को दर्शाती है.
प्रमुख शोध क्षेत्र और अंतरराष्ट्रीय पहचान
इन शोधकर्ताओं ने चिकित्सा जीव विज्ञान, रसायन विज्ञान, भौतिकी, पर्यावरण विज्ञान, माइक्रोबायोलॉजी, फार्मेसी, इंजीनियरिंग, पदार्थ विज्ञान (Materials Science) और जैव प्रौद्योगिकी जैसे विषयों में अभूतपूर्व योगदान दिया है.
पंजाब विश्वविद्यालय की कुलपति प्रोफेसर मीनाक्षी गोयल ने इस उपलब्धि पर हर्ष व्यक्त करते हुए इसे संकाय सदस्यों के उत्कृष्ट शोध, बहु-विषयक सहयोग और विश्वविद्यालय की बढ़ती वैश्विक पहचान का प्रमाण बताया. यह मूल्यांकन किसी विशेष पुरस्कार के बजाय लंबे समय तक बने रहने वाले अकादमिक प्रभाव को रेखांकित करता है.