पटियाला, 14 अक्टूबर, 2026 (चौधरी प्रभजीत सिंह): पटियाला के ऐतिहासिक माता श्री काली देवी मंदिर में अश्विन नवरात्रों के दौरान माता रानी के दर्शन करने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु नतमस्तक हो रहे हैं। आज तीसरे नवरात्र के अवसर पर भी श्रद्धालुओं ने माता के दरबार में माथा टेककर सर्वत्र सुख-शांति और सभी के कल्याण की प्रार्थना की। नवरात्रों के दौरान श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए मंदिर के बाहर माल रोड पर प्रतिदिन शाम 7 बजे से रात 10 बजे तक माता की चौकी का आयोजन किया जा रहा है। इस दौरान भजनों के माध्यम से माता रानी का गुणगान किया जाता है। इस धार्मिक आयोजन में श्रद्धालु भक्तिभाव से भजन गाकर माता रानी के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त कर रहे हैं।
इस अवसर पर पीआरटीसी के चेयरमैन एडवोकेट हरपाल जुनेजा सहित मंदिर की सलाहकार प्रबंधकीय समिति के सदस्य सीए अजय अलीपुरिया, डॉ. राज कुमार गुप्ता और संजय सिंगला भी उपस्थित थे। एडवोकेट हरपाल जुनेजा ने पहली बार माता की चौकी के आयोजन के लिए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान, मंदिर की सलाहकार प्रबंधकीय समिति और जिला प्रशासन का धन्यवाद किया। उन्होंने कहा कि नवरात्र श्रद्धा, भक्ति और आस्था के प्रतीक हैं। माता की चौकी जैसे धार्मिक आयोजन श्रद्धालुओं को अपनी आस्था से जुड़ने का सुंदर अवसर प्रदान करते हैं। उन्होंने कहा कि मंदिर में माथा टेकने आ रहे श्रद्धालुओं में भारी उत्साह देखने को मिल रहा है। भजनों के माध्यम से माता रानी का गुणगान करने से पूरा वातावरण भक्तिमय हो जाता है।
उन्होंने बताया कि श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए मंदिर परिसर में लंगर के भी उचित प्रबंध किए गए हैं। नवनिर्मित लंगर हॉल में श्रद्धालु आराम से बैठकर लंगर-प्रसाद ग्रहण कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि इन व्यवस्थाओं से दूर-दराज के क्षेत्रों से आने वाले श्रद्धालुओं को काफी सुविधा मिल रही है। एडवोकेट जुनेजा ने कहा कि मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व में माता श्री काली देवी मंदिर के पुनर्निर्माण और सौंदर्यीकरण पर लगभग 85 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि मंदिर के विकास और श्रद्धालुओं की सुविधाओं में किए गए सुधारों से इस ऐतिहासिक धार्मिक स्थल की महत्ता और अधिक उजागर हुई है। उन्होंने कहा कि माता रानी के दर्शन करने आने वाले श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध करवाना महत्वपूर्ण है, ताकि वे श्रद्धा और शांति के साथ माता के दरबार में माथा टेक सकें।






