पटियाला, 18 अक्टूबर 2026 (जगजीत सिंह): खालसा पंथ के महान जरनैल बाबा बंदा सिंह जी के 357वें जन्म दिवस की समस्त भारतवासियों को मुबारकबाद देते हुए शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के पूर्व अध्यक्ष प्रो. किरपाल सिंह बड़ूंगर ने कहा कि बाबा बंदा सिंह जी का जन्म 16 अक्टूबर 1670 ई. को जम्मू-कश्मीर के पुंछ जिले के राजौरी गांव में हुआ था। बाबा बंदा सिंह बहादुर का प्रारंभिक नाम लक्ष्मण देव जी था, कई धार्मिक स्थलों की यात्रा के दौरान उनका मिलाप साहिब श्री गुरु गोविंद सिंह जी के साथ हुआ। सतगुरु जी ने बैरागी बने लक्ष्मण देव को खंडे-बाटे का अमृत (पहुल) छकाकर सिंह सजाया और उनका नाम बाबा बंदा सिंह बहादुर रखकर उन्हें ज़ालिम मुगलों को सबक सिखाने के लिए भेजा।
उन्होंने कहा कि बाबा बंदा सिंह बहादुर ने पंजाब पर चढ़ाई कर दी और उनका यह विलक्षण कमाल था कि चढ़ाई के दौरान ही जहां मुगलों को सुधारा, वहीं साथ ही साथ सेना की स्थापना की तथा गोला-बारूद और अपनी सेनाओं के लिए रसद-पानी का प्रबंध भी साथ-साथ किया। उन्होंने बड़े-बड़े शहरों को फतेह करके 11 नवंबर 1709 ई. को उस समय के बड़े शहर समाणा को फतेह किया। फिर ज़ालिम सूबा सरहिंद वज़ीद खान को ललकारा और सरहिंद से थोड़ी दूर 12 मई 1710 ई. को चपड़-चिड़ी के मैदान में ज़ालिम वज़ीद खान को मारकर नरक भेजा और सरहिंद पर जीत हासिल करके 1000 साल पुराने मुगल साम्राज्य पर निर्णायक फतेह हासिल करके 14 मई 1710 ई. को सरहिंद में पहले खालसा राज्य की स्थापना की। इतिहास में एक अनूठा पन्ना जोड़ दिया। उन्होंने कहा कि बाबा बंदा सिंह जी बहादुर के किए गए महान कार्यों को याद करते हुए उनके अद्वितीय जीवन से सबक लेकर हमें अपना जीवन सफल बनाना चाहिए।






