फतेहगढ़ साहिब, 24 अक्टूबर, 2026 (गुरमीत सिंह तुंग): श्री गुरु ग्रंथ साहिब वर्ल्ड यूनिवर्सिटी, फतेहगढ़ साहिब की ओर से 22 अक्टूबर 2026 को “स्ट्रोक और हृदय एवं रक्त वाहिका स्वास्थ्य देखभाल में फिजियोथेरेपी: रोकथाम से पुनर्वास तक” विषय पर राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इस संगोष्ठी में स्वास्थ्य सेवा विशेषज्ञों, शिक्षाविदों, शोधकर्ताओं और विद्यार्थियों ने भाग लिया। कार्यक्रम का उद्देश्य स्ट्रोक पुनर्वास, हृदय स्वास्थ्य देखभाल और साक्ष्य-आधारित उपचार पद्धतियों में हो रही नवीन प्रगति पर विचार-विमर्श करना था।
कार्यक्रम की शुरुआत विश्वविद्यालय ध्वनि से हुई। इसके बाद फिजियोथेरेपी विभाग के प्रमुख डॉ. सुप्रीत बिंद्रा ने स्वागत भाषण दिया। पंजाबी यूनिवर्सिटी, पटियाला के फिजियोथेरेपी विभाग की पूर्व प्रमुख और प्रसिद्ध फिजियोथेरेपिस्ट प्रो. (डॉ.) नरकीश अरुमुगम ने मुख्य भाषण प्रस्तुत किया। उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. (डॉ.) परित पाल सिंह ने की। उन्होंने स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में अकादमिक गतिविधियों, व्यावसायिक विकास और आधुनिक तकनीकों के महत्व पर जोर दिया। इस अवसर पर अकादमिक मामलों के डीन प्रो. (डॉ.) सुखविंदर सिंह बिलिंग भी उपस्थित रहे।
संगोष्ठी के तकनीकी सत्रों में स्नातक, स्नातकोत्तर विद्यार्थियों और शोधार्थियों ने ऑनलाइन तथा प्रत्यक्ष माध्यम से शोध पत्र और पोस्टर प्रस्तुत किए। विशेषज्ञों ने युवाओं में स्ट्रोक के संभावित कारणों, छाती के ऊपरी हिस्से की रक्त वाहिकाओं पर दबाव और स्ट्रोक के बीच संभावित संबंध, हृदय पुनर्वास तथा स्ट्रोक के उपचार में वर्चुअल रियलिटी तकनीक के उपयोग जैसे विषयों पर चर्चा की। इसके अलावा, खान-पान संबंधी विकारों से जुड़ी हृदय और तंत्रिका तंत्र की समस्याओं पर भी विचार साझा किए गए।
सत्रों के दौरान स्ट्रोक पुनर्वास में सहायक उपकरणों की भूमिका और मांसपेशियों में असामान्य तनाव से प्रभावित हाथ की कार्यक्षमता में सुधार के लिए साक्ष्य-आधारित रणनीतियों पर भी चर्चा हुई। विशेषज्ञों ने बताया कि आधुनिक फिजियोथेरेपी के माध्यम से रोगियों की कार्यक्षमता में सुधार, पुनर्वास प्रक्रिया को बेहतर बनाने और दीर्घकालिक देखभाल में सहायता मिल सकती है।
“पुनर्वास से आगे: स्ट्रोक और हृदय स्वास्थ्य देखभाल में फिजियोथेरेपी की बदलती भूमिका” विषय पर आयोजित पैनल चर्चा में विशेषज्ञों ने उभरती नैदानिक चुनौतियों, प्रमाण-आधारित उपचार विधियों और बीमारी की रोकथाम से लेकर लंबे समय तक रोगी की देखभाल में फिजियोथेरेपी के महत्व पर विचार-विमर्श किया।
समापन समारोह में विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार प्रो. (डॉ.) तेजबीर सिंह और डीन रिसर्च प्रो. (डॉ.) नवदीप कौर ने शिरकत की। इस अवसर पर सहायक एवं स्वास्थ्य देखभाल विज्ञान संकाय के डीन डॉ. पंकजप्रीत सिंह ने धन्यवाद प्रस्ताव प्रस्तुत किया। उन्होंने कार्यक्रम को सफल बनाने में योगदान देने वाले अतिथियों, वक्ताओं, प्रतिभागियों, शोध प्रस्तुतकर्ताओं और आयोजन टीम की सराहना की।
यह राष्ट्रीय संगोष्ठी फिजियोथेरेपी शिक्षा को सुदृढ़ करने, शोध एवं अकादमिक सहयोग को बढ़ावा देने तथा स्ट्रोक पुनर्वास और हृदय स्वास्थ्य देखभाल में साक्ष्य-आधारित उपचार पद्धतियों को प्रोत्साहित करने की दिशा में विश्वविद्यालय की प्रतिबद्धता को दर्शाती है।






