यरूशलम, 28 अक्टूबर, 2026 (गुरमीत सिंह तुंग): इजराइल में आम चुनाव के दौरान मतदाताओं ने बड़ी संख्या में अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया। केंद्रीय चुनाव समिति द्वारा जारी आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, रात 10 बजे तक 77.7 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया, जो 2022 के चुनावों में इसी समय दर्ज 70.6 प्रतिशत मतदान से काफी अधिक है। वर्ष 1999 के बाद इस समय तक दर्ज किया गया यह सबसे अधिक मतदान है।
चुनाव के बाद जारी एग्जिट पोल ने राजनीतिक तस्वीर को और दिलचस्प बना दिया है। चैनल 11, 12 और 13 के अनुमानों के अनुसार, प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के नेतृत्व वाले गठबंधन और विपक्ष में से कोई भी संसद में सरकार बनाने के लिए जरूरी 61 सीटें हासिल करता दिखाई नहीं दे रहा है। इसके चलते चुनाव परिणामों के बाद सरकार बनाने के लिए राजनीतिक जोड़-तोड़ की संभावना बढ़ गई है।
नेतन्याहू के गठबंधन और विपक्ष के बीच कड़ा मुकाबला
एग्जिट पोल में विपक्षी गठबंधन को 50 से 53 सीटें मिलने का अनुमान लगाया गया है, जबकि नेतन्याहू के गठबंधन को लगभग 50 सीटें मिलने की संभावना जताई गई है। दोनों पक्षों के बहुमत से दूर रहने के कारण सरकार गठन की प्रक्रिया जटिल हो सकती है।
नेतन्याहू की लिकुड पार्टी को 24 से 25 सीटें मिलने का अनुमान है, जिससे वह नई संसद में सबसे बड़ी एकल पार्टी बन सकती है। दूसरी ओर, गादी आइजेनकोट की याशार पार्टी को 21 से 23 सीटें मिलने की संभावना जताई गई है।
अरब पार्टियों की भूमिका हो सकती है अहम
एग्जिट पोल के अनुसार, ज्वाइंट लिस्ट और रा’आम को मिलाकर 17 से 18 सीटें मिलने का अनुमान है। ऐसी स्थिति में ये पार्टियां सरकार बनाने के लिए होने वाली बातचीत में अहम भूमिका निभा सकती हैं।
हालांकि, विपक्ष के कई नेताओं ने अरब पार्टियों के साथ गठबंधन की संभावना को खारिज किया है। इस मामले में डेमोक्रेट्स पार्टी के यायर गोलान का रुख अलग बताया जा रहा है।
इसके अलावा, ओफर विंटर की ‘पीपल ऑफ इजराइल’ और योआज हेंडेल की ‘द रिजर्विस्ट्स-इकोनॉमिक’ जैसी छोटी दक्षिणपंथी पार्टियों के अनिवार्य 3.25 प्रतिशत वोट हिस्सेदारी की सीमा पार नहीं कर पाने का अनुमान है। यदि ये अनुमान सही साबित होते हैं, तो नेतन्याहू के गठबंधन के लिए बहुमत हासिल करना और मुश्किल हो सकता है।
दिनभर बढ़ता रहा मतदान प्रतिशत
केंद्रीय चुनाव समिति के आंकड़ों के अनुसार, रात 8 बजे तक मतदान 74.3 प्रतिशत तक पहुंच गया था, जबकि 2022 के चुनावों में इसी समय यह आंकड़ा 70.63 प्रतिशत था।
शाम 6 बजे तक 66.7 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया, जो पिछले चुनावों में इसी समय दर्ज 57.7 प्रतिशत से नौ प्रतिशत अंक अधिक था। दोपहर 12 बजे तक मतदान 31.5 प्रतिशत और शाम 4 बजे तक 55.7 प्रतिशत हो गया था।
बड़ी संख्या में मतदाताओं के मतदान केंद्रों पर पहुंचने के कारण कई स्थानों पर लंबी कतारें देखने को मिलीं।
नेतन्याहू और आइजेनकोट ने मतदाताओं से की अपील
मतदान के अंतिम घंटों के दौरान प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने वीडियो संदेश जारी कर लिकुड पार्टी के समर्थकों से तुरंत मतदान करने की अपील की। उन्होंने कहा कि अरब पार्टियों और विपक्षी दलों के समर्थकों की बढ़ती भागीदारी से वामपंथी सरकार बनने का खतरा पैदा हो सकता है।
नेतन्याहू ने अपने समर्थकों से परिवार के सदस्यों और पड़ोसियों को भी मतदान के लिए प्रेरित करने को कहा। उन्होंने रूढ़िवादी मतदाताओं से छोटी या अलग हुई दक्षिणपंथी पार्टियों के बजाय लिकुड के पक्ष में वोट डालने की अपील की।
इसके विपरीत, उनके प्रमुख प्रतिद्वंद्वी और याशार पार्टी के अध्यक्ष गादी आइजेनकोट ने नेतन्याहू के चुनाव अभियान पर ‘चालें चलने, झूठ बोलने और डराने-धमकाने’ के तरीके अपनाने का आरोप लगाया।
सोशल मीडिया पर जारी संदेश में उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री का चुनाव अभियान सरकार बदलने की संभावना को नुकसान पहुंचा सकता है। उन्होंने अपने समर्थकों से मतदान समाप्त होने तक सक्रिय रहने की अपील की।
सुरक्षा और लोकतांत्रिक संस्थाएं चुनाव के केंद्र में
इन चुनावों को 7 अक्टूबर, 2023 को हमास के नेतृत्व में हुए हमले के बाद इजराइल में होने वाले पहले आम चुनाव के रूप में पेश किया गया है। देश में सुरक्षा व्यवस्था, सरकार की जवाबदेही, राजनीतिक नेतृत्व और लोकतांत्रिक संस्थाओं की स्वतंत्रता जैसे मुद्दे चुनावी चर्चा के केंद्र में रहे।
लंबे समय से इजराइल की सत्ता के केंद्र में रहे नेतन्याहू को पूर्व इजराइली सेना प्रमुख गादी आइजेनकोट और उनकी याशार पार्टी से कड़ी चुनौती मिल रही है।
चुनाव के अंतिम नतीजे और सरकार गठन की तस्वीर आधिकारिक मतगणना पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।






