अवीव, 29 अक्टूबर, 2026 (छत्रपाल सिंह): इजराइल के संसदीय चुनावों के आंशिक नतीजों में प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के नेतृत्व वाला गठबंधन विपक्षी खेमे से आगे दिखाई दे रहा है। बुधवार सुबह 10 बजे तक 72.4 प्रतिशत मतपेटियों की गिनती के आधार पर सत्तारूढ़ गठबंधन को 54 सीटें, जबकि पूर्व सेना प्रमुख गादी आइजेनकोट के नेतृत्व वाले विपक्षी खेमे को 48 सीटें मिलने का अनुमान जताया गया। अरब समर्थक दलों के खाते में 18 सीटें आने की संभावना है। हालांकि, ये आंकड़े अस्थायी हैं और अंतिम परिणाम आने तक इनमें बदलाव हो सकता है।
इजराइल की 120 सदस्यीय संसद ‘नेसेट’ में सरकार बनाने के लिए कम से कम 61 सांसदों का समर्थन आवश्यक है। मौजूदा रुझानों के अनुसार, किसी भी खेमे को स्पष्ट बहुमत मिलता नहीं दिख रहा। ऐसे में छोटी पार्टियों का समर्थन और चुनाव के बाद होने वाले गठबंधन संबंधी समझौते सरकार गठन में निर्णायक साबित हो सकते हैं।
एग्जिट पोल और शुरुआती रुझानों में अंतर
मंगलवार को मतदान समाप्त होने के बाद जारी अधिकांश एग्जिट पोल में विपक्षी खेमे को मामूली बढ़त दिखाई गई थी। इसके विपरीत, शुरुआती मतगणना के आंकड़ों में नेतन्याहू का गठबंधन आगे नजर आया। हालांकि, एग्जिट पोल और आंशिक मतगणना के आंकड़े अंतिम नतीजों के समान नहीं होते। मतगणना पूरी होने के बाद ही राजनीतिक स्थिति की स्पष्ट तस्वीर सामने आएगी।
नेतन्याहू की लिकुड पार्टी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभर सकती है, लेकिन सबसे बड़ी पार्टी होना अपने आप में सरकार बनाने की गारंटी नहीं है। प्रधानमंत्री को सत्ता में बने रहने के लिए सहयोगी दलों का समर्थन जुटाना होगा और संसद में बहुमत साबित करना होगा।
ट्रंप ने नेतन्याहू के समर्थन को बताया अहम
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया कि नेतन्याहू के समर्थन में उनके बयान से इजराइली प्रधानमंत्री को चुनाव में दोबारा समर्थन हासिल करने में मदद मिली। ट्रंप ने सोशल मीडिया पर कहा कि उनके समर्थन के बाद चुनावी माहौल में बदलाव आया। हालांकि, इस दावे को प्रमाणित करने वाले स्वतंत्र साक्ष्य उपलब्ध होने की पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए इसे ट्रंप के राजनीतिक दावे के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
विपक्ष की नजर अरब दलों के समर्थन पर
विपक्षी नेता गादी आइजेनकोट ने वैकल्पिक सरकार बनाने के लिए तेजी से प्रयास करने की बात कही है। वहीं, इजराइल की डेमोक्रेट्स पार्टी के नेता यायर गोलान ने आइजेनकोट से अरब दलों के साथ मिलकर सरकार बनाने की अपील की है। गोलान के मुताबिक, विपक्ष के पास नेतन्याहू को सत्ता से हटाने और बहुमत जुटाने का अवसर है।
अरब समर्थक दलों की संभावित 18 सीटें इस राजनीतिक समीकरण में खास महत्व रखती हैं। यदि ये दल विपक्षी खेमे का समर्थन करते हैं और अन्य सहयोगी भी साथ आते हैं, तो सरकार गठन की तस्वीर बदल सकती है। हालांकि, समर्थन की शर्तें और संभावित गठबंधन की व्यवहारिकता अंतिम परिणामों के बाद ही स्पष्ट होगी।
राष्ट्रपति की भूमिका होगी महत्वपूर्ण
अंतिम नतीजे घोषित होने के बाद इजराइल के राष्ट्रपति इसाक हर्जोग संसदीय दलों के साथ विचार-विमर्श करेंगे। इसके बाद वह सरकार बनाने के लिए किसी नेता को आमंत्रित करेंगे। संबंधित नेता को बहुमत हासिल करने के लिए 28 दिन का समय मिलेगा, जिसे 14 दिन तक बढ़ाया जा सकता है।
यदि कोई नेता निर्धारित प्रक्रिया के तहत बहुमत जुटाने में सफल नहीं होता, तो सरकार गठन का संकट गहरा सकता है और नए चुनाव की संभावना भी पैदा हो सकती है। फिलहाल, नेतन्याहू गठबंधन की बढ़त के बावजूद बहुमत से दूर है और विपक्ष की रणनीति तथा अरब दलों का रुख इजराइल की अगली सरकार तय करने में अहम भूमिका निभा सकता है।






