Thursday, August 27, 2026
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पंजाब में भाषा विभाग ने मनाया संस्कृत दिवस

पटियाला, 27 अगस्त,2026 (विशाल गुप्ता): भाषा विभाग पंजाब की ओर से यहां भाषा भवन के सेमिनार हॉल में संस्कृत दिवस मनाया गया। इस दौरान विभिन्न विद्वानों ने अपने विचार रखे, जबकि कविशरी जत्थे ने गायन के माध्यम से कार्यक्रम को विशेष रंग दिया। श्रेष्ठ संस्कृत साहित्यकार डॉ. महेश चंद्र शर्मा गौतम ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की। संस्कृत भारती के उत्तर भारत क्षेत्र के समन्वयक श्री नरेंद्र कुमार ने मुख्य वक्ता के रूप में विचार रखे। प्रसिद्ध कविशर भीम सिंह मौड़ां वालों ने काव्य गायन किया।

भाषा विभाग के निदेशक सरदार जस्वंत सिंह जफर ने स्वागत भाषण में कहा कि पंजाबी क्षेत्र कई भाषाओं का पालना है, जहां पंजाबी, हिंदी, उर्दू और संस्कृत सहित अनेक भाषाएं फली-फूली और विकसित हुईं। उन्होंने कहा कि प्राचीनता के कारण इन भाषाओं में संस्कृत का स्थान नानी जैसा है।

उन्होंने कहा कि हमें गर्व होना चाहिए कि दुनिया का पहला साहित्य ऋग्वेद के रूप में हमारी धरती पर संस्कृत भाषा में रचा गया। दुनिया के सर्वमान्य ग्रंथ श्री गुरु ग्रंथ साहिब में भी संस्कृत की शब्दावली का बड़ी मात्रा में प्रयोग हुआ है। इससे संस्कृत भाषा के महत्व का सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि हमारे पूर्वजों ने दुनिया को विद्या और ज्ञान प्रदान किया, लेकिन अफसोस है कि इस क्षेत्र की भाषाओं का इस्तेमाल राजनीति के जरिए विभाजन पैदा करने के लिए किया गया।

मुख्य वक्ता श्री नरेंद्र कुमार ने कहा कि किसी भी राष्ट्र की रचना और अस्तित्व का आधार वहां की भाषा, संस्कृति और भूमि को माना जाता है। हमें गर्व है कि हमारे पास संस्कृत जैसी भाषा, ऋषि-मुनियों की संस्कृति और महापुरुषों की विरासत वाली भूमि है। उन्होंने कहा कि दुनिया के कई देशों की पहचान और इन तीनों चीजों के संरक्षण के अभाव में उनका अस्तित्व समाप्त हो गया या खतरे में पड़ गया।

उन्होंने कहा कि भारत की कई भाषाओं की जड़ें संस्कृत में हैं। इसलिए भाषाओं को समझने के लिए संस्कृत को समझना बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि देश के अधिकांश राज्यों की पहचान उनकी भाषा से बनी हुई है, जो भारत की विविधता का प्रमाण है।

इस अवसर पर प्रसिद्ध कविशर भीम सिंह मौड़ां वालों के जत्थे ने संस्कृत में वंदना प्रस्तुत कर कार्यक्रम की शुरुआत की। इसके बाद संस्कृत के प्राचीन साहित्य से प्राप्त ज्ञान पर आधारित कविशरियां प्रस्तुत की गईं। विभिन्न कविताओं और काव्य प्रस्तुतियों ने कार्यक्रम में समां बांध दिया।

अपने अध्यक्षीय भाषण में डॉ. महेश चंद्र शर्मा गौतम ने कहा कि वर्तमान समय में संस्कृत भाषा देश में तेजी से विकसित हो रही है और अपने स्वर्णिम दौर से गुजर रही है। उन्होंने संस्कृत भाषा के विकास के लिए भाषा विभाग द्वारा किए जा रहे कार्यों की सराहना की। उन्होंने कहा कि संस्कृत का पंजाबी भाषा के साथ गहरा संबंध है और श्री गुरु ग्रंथ साहिब को समझने के लिए संस्कृत का ज्ञान महत्वपूर्ण है।

इस मौके पर पद्मश्री प्राण सभरवाल ने अपनी गतिविधियों और शिक्षा में संस्कृत के योगदान से जुड़ी रोचक बातें साझा कीं। कार्यक्रम के अंत में सभी अतिथियों और कविशरी जत्थे को विभाग की ओर से शॉल और पुस्तकों से सम्मानित किया गया।

डिप्टी डायरेक्टर आलोक चावला ने सभी का धन्यवाद किया, जबकि मंच संचालन सहायक निदेशक देविंदर कौर ने किया। इस अवसर पर पद्मश्री प्राण सभरवाल, उत्तर क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र के सहायक निदेशक रविंदर शर्मा, डॉ. पुष्पिंदर कौर, नवीन भारती, डॉ. आशा किरण, शायर अवतारजीत, गुरदर्शन सिंह गुसील, गुलजार पटियालवी, विनोद कौशल, जोगा सिंह खीवा सहित बड़ी संख्या में साहित्य प्रेमी मौजूद रहे।

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