संगरूर, 31 अगस्त, 2026 (जगदेव सिंह जग्गी): पंजाब कृषि विश्वविद्यालय, लुधियाना के निदेशक प्रसार शिक्षा के दिशा-निर्देशों के तहत वर्तमान धान की फसल में फोक कम करने के लिए पी.ए.यू.-फार्म सलाहकार सेवा केंद्र, संगरूर की ओर से गांव खोखर कलां में प्रदर्शनियां लगाई गईं।
कैंप को संबोधित करते हुए केंद्र के प्रभारी एवं वरिष्ठ प्रसार वैज्ञानिक डॉ. अशोक कुमार गर्ग ने किसानों को बताया कि धान की अधिक पैदावार और अच्छी गुणवत्ता प्राप्त करने के लिए फसल की पूरी वृद्धि अवधि के दौरान संतुलित पोषक तत्वों की उपलब्धता बहुत जरूरी है। गोभ भरने के समय पोषक तत्वों की कमी के कारण दानों का भरना कम हो सकता है, खाली दानों की संख्या बढ़ सकती है और दाने हल्के रह सकते हैं, जिससे अंततः फसल की पैदावार कम हो सकती है।
उन्होंने बताया कि इस महत्वपूर्ण अवस्था में पत्तियों के माध्यम से पोषक तत्वों की पूर्ति करने से फसल को उस समय आवश्यक तत्व तेजी से उपलब्ध करवाने में मदद मिलती है। धान में फोक कम करने के लिए जब धान गोभ में हो, तब 1.5 प्रतिशत पोटैशियम नाइट्रेट (13:0:45) यानी 3 किलोग्राम पोटैशियम नाइट्रेट को 200 लीटर पानी में मिलाकर प्रति एकड़ छिड़काव करने की सिफारिश की गई है। पोटैशियम नाइट्रेट का पत्तियों पर छिड़काव इन आवश्यक पोषक तत्वों की सीधी और तेज पूर्ति का प्रभावी एवं किफायती तरीका है। छिड़काव करते समय पत्तियों, विशेषकर ऊपरी पत्तियों पर घोल की अच्छी कवरेज होनी चाहिए।

डॉ. गर्ग के अनुसार, अच्छी सेहत बनाए रखने के लिए ताजी सब्जियों को नियमित आहार में शामिल करना बहुत जरूरी है। घरों के बगीचे में अथवा खेतों में ट्यूबवेलों के पास ताजी और रोजाना उपयोग की सब्जियां स्वयं उगाई जा सकती हैं। इसे प्रोत्साहित करने के लिए फार्म सलाहकार सेवा केंद्र, संगरूर की ओर से गांव खोखर कलां में सर्दी के मौसम में उगाई जाने वाली सब्जियों पर 30 प्रदर्शनियां लगाई गईं। उन्होंने बताया कि फूलगोभी, ब्रोकोली, मटर, जड़ वाली और पत्तेदार सब्जियों की बुवाई सितंबर के मध्य से सितंबर के अंतिम सप्ताह तक की जा सकती है।
डॉ. गर्ग ने गांव खोखर कलां के किसानों को इस संबंध में विस्तृत जानकारी दी और प्रदर्शन के तौर पर किसानों को पोटैशियम नाइट्रेट भी उपलब्ध करवाया। इसके अलावा उन्होंने धान के प्रमुख कीटों, जैसे तना छेदक और पत्ती लपेटक सुंडी, की पहचान एवं प्रभावी रोकथाम के बारे में भी विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने किसानों को सलाह दी कि कीटनाशकों का छिड़काव केवल उस समय किया जाए, जब कीटों की संख्या आर्थिक नुकसान की सीमा से अधिक हो। इससे अनावश्यक कीटनाशकों के इस्तेमाल, खर्च और पर्यावरण पर पड़ने वाले प्रतिकूल प्रभावों को कम किया जा सकता है।
इस अवसर पर किसानों को सितंबर 2026 में पंजाब कृषि विश्वविद्यालय की ओर से आयोजित किए जा रहे किसान मेलों के बारे में भी जानकारी दी गई और इन मेलों में अधिक से अधिक संख्या में शामिल होने की अपील की गई। इसके अलावा ग्रामीण बच्चों के लिए विश्वविद्यालय की ओर से चलाए जा रहे विभिन्न पाठ्यक्रमों के बारे में भी जानकारी साझा की गई।
अंत में डॉ. गर्ग ने कद्दू वाले और सीधे बोए गए धान के खेतों का दौरा किया तथा विश्वविद्यालय की सिफारिशों के अनुसार किसानों को सलाह दी। कैंप के आयोजन में गांव के स. निर्मल सिंह, स. हरविंदर सिंह, स. जोधा सिंह, स. जसविंदर सिंह तथा स. अंतरदेव इंद्रजीत सिंह ने विशेष सहयोग दिया।






