पटियाला, 2 सितंबर, 2026 (अनिल कुमार भारती): भाषा विभाग, पंजाब द्वारा अपने अधिकारियों एवं कर्मचारियों में पुस्तक-पठन की रुचि को बढ़ावा देने के लिए शुरू किए गए अभियान के तहत आज मासिक ‘पुस्तक मिलनी’ का आयोजन किया गया। इस अवसर पर प्रसिद्ध विद्वान प्रो. हरपाल सिंह पन्नू विशेष अतिथि के रूप में शामिल हुए।
निदेशक भाषाएं जसवंत सिंह ज़फ़र ने अपने स्वागत भाषण में कहा कि डिजिटल युग में पुस्तकें हर समय हमारे साथ रहती हैं, जिसके कारण इन्हें पढ़ना बहुत आसान हो गया है। हम इन्हें किसी भी समय और किसी भी स्थान पर फोन या आईपैड के माध्यम से पढ़ सकते हैं, आवश्यकता केवल रुचि की है। उन्होंने कहा कि प्रो. हरपाल सिंह पन्नू जैसी शख्सियतें पुस्तकें पढ़ते-पढ़ते स्वयं ज्ञान का महासागर बन गई हैं। उन्होंने विभाग के अधिकारियों एवं कर्मचारियों से अपील की कि वे पुस्तक संस्कृति को प्रोत्साहित करने के लिए लोगों के सामने स्वयं उदाहरण बनें।

प्रो. हरपाल सिंह पन्नू ने कहा कि हम उस धरती के वासी हैं, जहां के पूर्वजों ने उस समय वेदों की रचना कर दी थी, जब दुनिया के अन्य हिस्सों में लोगों को अभी वस्त्र पहनने की समझ भी नहीं थी। इसलिए हम गर्व के साथ कह सकते हैं कि हमारे पूर्वज बौद्धिक रूप से बहुत समृद्ध थे। उन्होंने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि हम अपनी विद्वतापूर्ण विरासत को संभालने और उसका लाभ उठाने में बहुत कम रुचि दिखा रहे हैं। इतना ही नहीं, हम अपनी बौद्धिक विरासत पर अपना अधिकार जताने से भी गुरेज कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि हमारे क्षेत्र में ऐसे महान ग्रंथों की रचना हुई है, जिनसे अनेक अन्य ग्रंथों का सृजन किया जा सकता है। हम अपने ऐसे बहुत से ग्रंथों से अनजान हैं, जिनका विदेशी विद्वानों ने अपनी भाषाओं में अनुवाद कर उनका महत्व समझा और उन्हें दुनिया के सामने प्रस्तुत किया है। उन्होंने कहा कि हम गुरु नानक देव जी जैसे विद्वानों के वारिस हैं, जो हमेशा अपने साथ कलम, दवात और लिखने के लिए कागज रखते थे।
पुस्तकें पढ़ने के महत्व पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि पुस्तक एक ऐसा खजाना होती है, जिसे एक विद्वान व्यक्ति बहुत सारा ज्ञान एकत्रित करके तैयार करता है। इसलिए जिस प्रकार अच्छे गीत को बार-बार सुना जाता है, उसी प्रकार अच्छी पुस्तक को भी बार-बार पढ़ना चाहिए, क्योंकि वह हमें जीवन जीने की कला सिखाती है।
अंत में प्रो. हरपाल सिंह पन्नू को विभाग की ओर से शॉल एवं पुस्तकों के सेट से सम्मानित किया गया। मंच संचालन शोध अधिकारी डॉ. सुखदर्शन सिंह चहल ने किया।
इस अवसर पर विभाग की अतिरिक्त निदेशक चंदनदीप कौर, उप निदेशक आलोक चावला, सहायक निदेशक जसप्रीत कौर, सुरिंदर कौर, पद्मश्री प्राण सभरवाल, इंजीनियर ज्योतिंदर सिंह, डॉ. कुलदीप सिंह, डॉ. मंजू मिड्ढा अरोड़ा, शायर अवतारजीत सिंह, अमृतपाल शैदा, गुरमीत सिंह एवं गायक नीले खां सहित बड़ी संख्या में श्रोता उपस्थित रहे।






