नई दिल्ली, 10 सितंबर, 2026 (प्रभजोत सिंह): केंद्र सरकार पेट्रोल में 20 प्रतिशत से अधिक ईथानॉल मिलाने की संभावनाओं पर काम कर रही है। इसके साथ ही देश में फ्लेक्सी-फ्यूल वाहनों के इस्तेमाल को बढ़ावा देने की तैयारी की जा रही है। प्रधानमंत्री के सलाहकार तरुण कपूर ने बुधवार को कहा कि भारत का ई-20 कार्यक्रम अब तक काफी सफल रहा है और सरकार अब ईथानॉल के उपयोग को और व्यापक बनाने पर ध्यान केंद्रित कर रही है।
‘द इंडिया शुगर एंड बायो-एनर्जी कॉन्फ्रेंस 2026’ को वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से संबोधित करते हुए कपूर ने कहा कि कई वाहन निर्माता कंपनियां जल्द ही फ्लेक्सी-फ्यूल वाहनों को बाजार में उतारने की योजनाओं का संकेत दे चुकी हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे वाहनों के माध्यम से ईथानॉल के अधिक उपयोग को बढ़ावा दिया जा सकता है।
कपूर के अनुसार, सरकार पेट्रोल में 20 प्रतिशत से अधिक ईथानॉल मिश्रण की संभावनाओं का आकलन कर रही है। इसके लिए पेट्रोल पंपों पर शुद्ध ईथानॉल की उपलब्धता बढ़ाना भी जरूरी होगा। पश्चिम एशिया में जारी संकट के कारण कच्चे तेल की आपूर्ति और कीमतों पर दबाव का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि देश को उपलब्ध घरेलू ईंधन संसाधनों का अधिकतम इस्तेमाल करने की दिशा में आगे बढ़ना होगा।
उन्होंने बताया कि भारत की ईथानॉल उत्पादन क्षमता अब मौजूदा ब्लेंडिंग जरूरतों से अधिक हो गई है। ऐसे में उद्योग को ईथानॉल के नए उपयोग और बाजार तलाशने होंगे। उन्होंने डीजल में बायोफ्यूल आधारित एडिटिव तथा ईसुब्यूटानॉल के इस्तेमाल की संभावनाओं पर भी चर्चा की।
प्रधानमंत्री के सलाहकार ने ईथानॉल उत्पादकों से उत्पादन को केवल ईंधन तक सीमित न रखते हुए कम्प्रेस्ड बायोगैस (सीबीजी) और पोटाश जैसे मूल्यवर्धित उत्पादों की दिशा में भी विविधीकरण करने का आग्रह किया। इससे ईथानॉल उद्योग के लिए नए कारोबारी अवसर पैदा होने के साथ-साथ घरेलू ऊर्जा संसाधनों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित किया जा सकेगा।






