चंडीगढ़/देहरादून,12 सितंबर 2026 (गुरमीत सिंह तुंग): उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हरीश रावत ने पार्टी के दो महत्वपूर्ण संगठनात्मक पदों से इस्तीफा देने का ऐलान किया है। यह फैसला उनके पूर्व ओएसडी और मौजूदा निजी सहायक चंदन सिंह जीना से जुड़े मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ई.डी.) की कार्रवाई के बाद सामने आया है। रावत ने कहा कि वह नहीं चाहते कि उनसे जुड़ी किसी भी कार्रवाई के कारण कांग्रेस की भ्रष्टाचार विरोधी लड़ाई कमजोर हो।
किन पदों से इस्तीफे का किया ऐलान?
हरीश रावत ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर अपने फैसले की जानकारी साझा की। उन्होंने निम्नलिखित पदों से हटने का ऐलान किया है:
* उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी की कार्यकारिणी के सदस्य का पद।
* कांग्रेस कार्यसमिति (सी.डब्लयू.सी) के स्थायी आमंत्रित सदस्य का पद।
यह किसी सरकारी पद से इस्तीफा नहीं है। हरीश रावत फिलहाल कोई सरकारी पद नहीं संभाल रहे हैं।
इस्तीफे की मुख्य वजह क्या है?
पूर्व ओएसडी के घर ई.डी की छापेमारी
प्रवर्तन निदेशालय ने 10 सितंबर 2026 को उत्तराखंड के देहरादून में कई स्थानों पर तलाशी अभियान चलाया। यह कार्रवाई उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (यू.के.एस.एस.एस.सी.) की वर्ष 2016 की ग्राम पंचायत विकास अधिकारी भर्ती परीक्षा में कथित अनियमितताओं की जांच से जुड़ी बताई गई है।
जिन स्थानों पर तलाशी ली गई, उनमें चंदन सिंह जीना का आवास भी शामिल था। ई.डी. के मुताबिक जीना वर्ष 2014 से 2017 तक हरीश रावत के मुख्यमंत्री कार्यकाल के दौरान उनके ओएसडी रहे थे और वर्तमान में उनके निजी सहायक के रूप में कार्य कर रहे थे।
छापेमारी में क्या-क्या मिलने का दावा?
ई.डी. की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, जीना के आवास से निम्नलिखित वस्तुएं बरामद होने का दावा किया गया है:
₹32 लाख
कथित बेहिसाब नकदी
लगभग 200.5 ग्राम
सोने के सिक्के और चेन
12 घड़ियां
महंगी कलाई घड़ियां
₹1.28 करोड़
ई.डी. के अनुसार जब्त और फ्रीज की गई संपत्तियों की लगभग कुल कीमत।
यह जानकारी प्रवर्तन निदेशालय के दावों और उसके हवाले से प्रकाशित रिपोर्टों पर आधारित है।
2016 की भर्ती परीक्षा में क्या है विवाद?
यह मामला उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग द्वारा आयोजित ग्राम पंचायत विकास अधिकारी की वर्ष 2016 की भर्ती परीक्षा से जुड़ा है।
ई.डी. की जांच में कथित तौर पर निम्नलिखित बातें सामने आने की बात कही गई है:
* परीक्षा की ओ.एम.आर. उत्तर-पुस्तिकाओं को आयोग की सुरक्षित हिरासत से बाहर निकाले जाने का संदेह है।
* कुछ अधूरी ओ.एम.आर शीट्स को एक निजी कंप्यूटर एजेंसी तक पहुंचाकर उनमें कथित तौर पर गैर-कानूनी बदलाव किए गए।
* जांच एजेंसी के अनुसार, इन कथित बदलावों का संबंध रिश्वत और बिचौलियों के माध्यम से हुए लेन-देन से हो सकता है।
हालांकि, ये सभी ई.डी. की जांच के दायरे में आए आरोप हैं। इन्हें तब तक सिद्ध अपराध नहीं माना जा सकता, जब तक संबंधित न्यायिक प्रक्रिया में आरोप साबित न हो जाएं।
हरीश रावत ने क्या कहा?
हरीश रावत ने अपने बयान में चंदन सिंह जीना के साथ लंबे समय से चले आ रहे अपने संबंधों का उल्लेख किया। उन्होंने जीना को ईमानदार, विनम्र और मेहनती व्यक्ति बताया तथा ओ.एम.आर. शीट्स में कथित हेरफेर के आरोपों पर अविश्वास जताया।
रावत का मुख्य तर्क है कि यदि उनसे जुड़ी किसी भी कार्रवाई के कारण कांग्रेस की भ्रष्टाचार विरोधी मुहिम को नुकसान पहुंचता है, तो वह ऐसा नहीं चाहते। इसी कारण उन्होंने पार्टी के दोनों संगठनात्मक पदों से हटने का फैसला किया।
रावत ने अपनी सरकार के भर्ती रिकॉर्ड का भी किया बचाव
पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कहा कि उनके लगभग तीन वर्ष के कार्यकाल के दौरान यू.के.एस.एस.एस.सी. के माध्यम से 42,000 से अधिक सरकारी भर्तियां की गई थीं।
उन्होंने यह भी कहा कि आयोग के एक अध्यक्ष के खिलाफ शिकायत मिलने के बाद उनके खिलाफ कार्रवाई की गई थी और उन्हें हटाने या इस्तीफा देने के लिए कहा गया था।
रावत ने कहा कि यदि भर्ती प्रक्रिया में उनकी सरकार की ओर से कोई गलती हुई है तो वह उत्तराखंड की जनता से माफी मांगने के लिए तैयार हैं।
2027 के विधानसभा चुनाव से पहले बढ़ा राजनीतिक दबाव
उत्तराखंड में वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले भ्रष्टाचार और सरकारी भर्तियों का मुद्दा राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण बन चुका है। हरीश रावत का यह कदम इसी व्यापक राजनीतिक संदर्भ में भी देखा जा रहा है।
रावत ने संकेत दिया कि उनके सहयोगी के घर ई.डी.की कार्रवाई के जरिए एक विशेष राजनीतिक माहौल बनाने की कोशिश की जा रही है। हालांकि, यह रावत का राजनीतिक आरोप है और इसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
कांग्रेस के लिए क्या हैं इसके मायने?
हरीश रावत उत्तराखंड कांग्रेस के सबसे वरिष्ठ और प्रभावशाली नेताओं में गिने जाते हैं। ऐसे में उनके दो संगठनात्मक पदों से हटने के ऐलान के कई राजनीतिक मायने निकाले जा रहे हैं।
भ्रष्टाचार विरोधी राजनीति
कांग्रेस को भ्रष्टाचार के खिलाफ अपनी राजनीतिक मुहिम को स्पष्ट रूप से आगे बढ़ाने के लिए इस मामले पर अपना रुख स्पष्ट करना पड़ सकता है।
संगठनात्मक प्रभाव
रावत के महत्वपूर्ण संगठनात्मक पदों से हटने के बाद उत्तराखंड कांग्रेस के भीतर राजनीतिक चर्चा और तेज हो सकती है।
चुनावी चुनौती
2027 के विधानसभा चुनाव से पहले यह मामला कांग्रेस और भाजपा के बीच राजनीतिक बहस का मुद्दा बन सकता है।
हालांकि, ये संभावित राजनीतिक प्रभाव हैं और इन्हें कांग्रेस की ओर से घोषित अंतिम राजनीतिक निर्णय नहीं माना जा सकता।
आगे क्या होगा?
फिलहाल ई.डी. की जांच जारी है। हरीश रावत ने अपने सहयोगी का बचाव किया है और अपने पदों से हटते हुए यह संदेश देने की कोशिश की है कि उनके कारण कांग्रेस की भ्रष्टाचार विरोधी मुहिम कमजोर नहीं होनी चाहिए।
अब आगे की स्थिति ई.डी. की जांच, उपलब्ध साक्ष्यों और संबंधित कानूनी प्रक्रिया के परिणामों पर निर्भर करेगी।
कुल मिलाकर, हरीश रावत का यह कदम महज संगठनात्मक बदलाव नहीं है। यह उत्तराखंड की वर्ष 2016 की भर्ती परीक्षा से जुड़ी ई.डी. जांच के बीच कांग्रेस की भ्रष्टाचार विरोधी राजनीति, रावत की व्यक्तिगत राजनीतिक छवि और 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले बनने वाले राजनीतिक माहौल—तीनों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। रावत ने अपने सहयोगी का बचाव किया है, जबकि जांच एजेंसी की कार्रवाई और आरोपों पर कानूनी प्रक्रिया अभी जारी है।






