नई दिल्ली, 19 सितंबर 2026 (शहीद-ए-आज़म ब्यूरो): भारतीय नौसेना ने आईएनएस ‘मालवन’ को अपने बेड़े में शामिल कर लिया है। माहे क्लास का यह दूसरा एंटी-सबमरीन वारफेयर शैलो वाटर क्राफ्ट (ASW-SWC) है, जिसे कर्नाटक के कारवार में आयोजित एक समारोह के दौरान कमीशन किया गया। समारोह की अध्यक्षता एयर चीफ मार्शल ए.पी. सिंह ने की।
कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड (CSL) द्वारा निर्मित आईएनएस मालवन पूरी तरह स्वदेशी डिजाइन और निर्माण कार्यक्रम का हिस्सा है। इसमें 80 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री का इस्तेमाल किया गया है। इससे भारत की घरेलू युद्धपोत निर्माण क्षमता और ‘आत्मनिर्भर भारत’ पहल को और मजबूती मिलने की उम्मीद है।
पनडुब्बी रोधी अभियानों के लिए विशेष रूप से तैयार
आईएनएस मालवन को विशेष रूप से तटीय और कम गहराई वाले समुद्री क्षेत्रों में पनडुब्बियों की निगरानी तथा उनके खिलाफ कार्रवाई के लिए तैयार किया गया है। इसमें आधुनिक रडार, सोनार, टॉरपीडो और एंटी-सबमरीन रॉकेट प्रणालियों सहित कई सेंसर और हथियार प्रणालियां मौजूद हैं। इसके अलावा, इसका इस्तेमाल अंडरवॉटर सर्विलांस, माइन वारफेयर और कम तीव्रता वाले समुद्री अभियानों में भी किया जा सकता है।
लगभग 80 मीटर लंबा और 1,100 टन विस्थापन वाला यह युद्धपोत वॉटरजेट प्रोपल्शन से लैस है, जिससे इसे कम गहराई वाले पानी में संचालन के लिए उपयुक्त बनाया गया है।
16 जहाजों के बड़े कार्यक्रम का हिस्सा
आईएनएस मालवन 16 एएसडब्ल्यू-एसडब्ल्यूसी जहाजों के बड़े कार्यक्रम का हिस्सा है और माहे क्लास के आठ जहाजों में से दूसरा है। इसकी तैनाती से भारतीय तटीय सुरक्षा, समुद्री निगरानी और मैरीटाइम डोमेन अवेयरनेस को मजबूत करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
इस युद्धपोत का नाम महाराष्ट्र के ऐतिहासिक तटीय शहर मालवन के नाम पर रखा गया है। इसके क्रेस्ट पर ‘बाघ नख’ को दर्शाया गया है और इसका आदर्श वाक्य ‘साइलेंट क्लॉज’ है।
आईएनएस मालवन का नौसेना में शामिल होना भारतीय नौसेना की तटीय पनडुब्बी-रोधी क्षमता को बढ़ाने के साथ-साथ देश के स्वदेशी रक्षा उत्पादन और युद्धपोत निर्माण क्षेत्र के लिए भी एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।






