नई दिल्ली, 28 सितंबर 2026 (छत्रपाल सिंह): प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को शहीद-ए-आजम भगत सिंह की 119वीं जयंती के अवसर पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। प्रधानमंत्री ने भगत सिंह को प्रत्येक भारतीय, विशेषकर देश के युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बताया।
‘एक्स’ पर साझा किए गए एक वीडियो संदेश में प्रधानमंत्री ने भगत सिंह की निडरता और देश की आजादी के लिए उनकी अटूट प्रतिबद्धता को याद किया। उन्होंने कहा कि भगत सिंह का जीवन और उनका बलिदान आज भी पीढ़ियों को प्रेरित करता है।
प्रधानमंत्री ने फांसी से पहले ब्रिटिश अधिकारियों को भगत सिंह द्वारा लिखे गए पत्र का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि भगत सिंह ने अपने साथियों के साथ युद्धबंदियों जैसा व्यवहार किए जाने की मांग की थी। मोदी ने इसे भगत सिंह के अद्वितीय साहस का प्रमाण बताया।
उन्होंने भगत सिंह की मानवीय संवेदनशीलता को भी रेखांकित करते हुए कहा कि वे लोगों के दुख-दर्द के प्रति संवेदनशील थे और दूसरों की मदद करने के लिए हमेशा आगे रहते थे।
एक अन्य ‘एक्स’ पोस्ट में प्रधानमंत्री ने कहा कि शहीद भगत सिंह के अदम्य साहस और वीरता ने स्वतंत्रता आंदोलन में नई ऊर्जा का संचार किया। उन्होंने कहा कि देश के सम्मान के लिए सब कुछ बलिदान करने की भावना भारत के युवाओं के साहस और दृढ़ संकल्प का प्रतीक है।
शहीद भगत सिंह का जन्म 28 सितंबर 1907 को बंगा में हुआ था, जो अब पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में स्थित है। वे भारत के स्वतंत्रता संग्राम के प्रमुख क्रांतिकारियों में से एक के रूप में उभरे।
8 अप्रैल 1929 को भगत सिंह और बटुकेश्वर दत्त ने ब्रिटिश सरकार के कानूनों के विरोध में दिल्ली की केंद्रीय विधानसभा में बम फेंके थे। दोनों ने जानबूझकर गिरफ्तारी दी और बाद की अदालती कार्यवाही का इस्तेमाल ब्रिटिश शासन के खिलाफ अपनी आवाज पहुंचाने के लिए किया।
बाद में लाहौर षड्यंत्र मामले में भगत सिंह को दोषी ठहराया गया। 23 मार्च 1931 को उन्हें शिवराम राजगुरु और सुखदेव थापर के साथ फांसी दे दी गई। उस समय भगत सिंह की उम्र केवल 23 वर्ष थी।
इस अवसर पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी शहीद भगत सिंह को श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने विशेष रूप से युवाओं से ज्ञान, मूल्यों और क्षमता के साथ प्रदेश के निर्माण में योगदान देने का आह्वान किया।
उन्होंने कहा कि भगत सिंह का जीवन सामाजिक बुराइयों के खिलाफ लड़ने तथा ज्ञान, कौशल, दृढ़ इच्छाशक्ति और कर्म के महत्व को समझने के लिए प्रेरित करता है।






