Monday, September 28, 2026
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घमरौदा और मंडौर में गंदे पानी की समस्या का होगा समाधान: डॉ. बलबीर सिंह

पटियाला, 28 सितंबर, 2026 (हर्षलीन सिंह): पटियाला ग्रामीण में विकास कार्यों को नई रफ्तार देते हुए पंजाब के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने आज मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व में गांव घमरौदा और मंडौर में सैनिटेशन तथा छप्पड़ों के नवीनीकरण कार्यों के नींव पत्थर रखे। इस अवसर पर उनके साथ अतिरिक्त डिप्टी कमिश्नर (ग्रामीण विकास) दमनजीत सिंह मान और एसडीएम नाभा रविंदरपाल सिंह सोमल भी मौजूद रहे।

इसके अलावा डॉ. बलबीर सिंह ने गांव हियाना कलां में 24 घंटे बिजली सप्लाई की शुरुआत भी करवाई। उन्होंने बताया कि मंडौर में करीब 2.5 करोड़ रुपये और घमरौदा में 1 करोड़ रुपये की लागत से सैनिटेशन तथा छप्पड़ों के नवीनीकरण के कार्य शुरू किए गए हैं।

स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि गांवों में गंदे पानी की समस्या का समाधान करने के साथ-साथ पानी को साफ करके उसका उचित पुनः उपयोग करने और गांवों के पर्यावरण को बेहतर बनाने के लिए विशेष प्रयास किए जा रहे हैं। घमरौदा और मंडौर गांवों में चल रहे विकास कार्यों का उल्लेख करते हुए डॉ. बलबीर सिंह ने बताया कि दोनों गांवों में गंदे पानी की समस्या लंबे समय से लोगों के लिए परेशानी का कारण बनी हुई थी। इसके समाधान के लिए आधुनिक सीवेज ट्रीटमेंट प्रणाली विकसित की जा रही है, जिसके तहत गंदे पानी को विभिन्न चरणों से गुजारकर साफ किया जाएगा।

उन्होंने बताया कि घमरौदा गांव में सीवेज के गंदे पानी की निकासी के कारण करीब साढ़े चार एकड़ क्षेत्र में गंदगी और बदबू की समस्या पैदा हो रही थी। अब यहां आधुनिक तकनीक के माध्यम से सीवेज के पानी को ट्रीट करने के लिए चैंबर बनाए जा रहे हैं। इस परियोजना के लिए आईआईटी रोपड़ की तकनीकी सहायता भी ली जा रही है।

डॉ. बलबीर सिंह ने कहा कि ट्रीटमेंट के बाद पानी का पुनः उपयोग किया जा सकेगा और इसमें मछली पालन जैसी गतिविधियों को भी प्रोत्साहित किया जाएगा। मछली पालन से होने वाली आय पंचायत के खाते में जाएगी, जिससे परियोजना की देखरेख और रखरखाव के लिए आवश्यक मानव संसाधन की व्यवस्था की जा सकेगी।

स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि इन परियोजनाओं को केवल गंदे पानी के निपटारे तक सीमित नहीं रखा जा रहा, बल्कि इन्हें मॉडल पर्यावरण पार्कों के रूप में विकसित करने की योजना है। इन स्थानों पर नानक बगीची, पौधरोपण, विरासती पेड़ों का संरक्षण और बटरफ्लाई पार्क जैसी गतिविधियां विकसित की जाएंगी। उन्होंने कहा कि इन स्थानों पर पुरानी और विरासती प्रजातियों के पेड़ लगाने को प्राथमिकता दी जाएगी, ताकि गांवों की प्राकृतिक विरासत को संरक्षित किया जा सके।

इसके साथ ही मनरेगा और अन्य उपलब्ध संसाधनों के माध्यम से पौधरोपण और पार्कों के रखरखाव के लिए गांव के लोगों को जोड़ा जाएगा, जिससे रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे।

इस अवसर पर विभिन्न विभागों के अधिकारी और गांववासी उपस्थित रहे।

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