संगरूर, 03 अक्टूबर, 2026 (छत्रपाल सिंह): पंजाब कृषि विश्वविद्यालय के निदेशक प्रसार शिक्षा, लुधियाना तथा आई.सी.ए.आर.-अटारी, जोन-1, लुधियाना के मार्गदर्शन में कृषि विज्ञान केंद्र, संगरूर द्वारा अपने परिसर में “मधुमक्खी पालन-एक लाभदायक सहायक व्यवसाय” विषय पर पांच दिवसीय व्यावसायिक प्रशिक्षण पाठ्यक्रम सफलतापूर्वक आयोजित किया गया। इसमें जिले के विभिन्न ब्लॉकों से कुल 31 किसानों और किसान महिलाओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
उद्घाटन सत्र के दौरान डॉ. मनदीप सिंह, प्रभारी, पी.ए.यू.-कृषि विज्ञान केंद्र, संगरूर ने प्रशिक्षणार्थियों का स्वागत किया। उन्होंने बताया कि मधुमक्खी पालन कम लागत और अधिक लाभ देने वाला सहायक व्यवसाय है, जिसे छोटे एवं सीमांत किसान, भूमिहीन मजदूर तथा किसान महिलाएं भी अपना सकती हैं। उन्होंने बताया कि शहद के अलावा मधुमक्खियां परागण के माध्यम से फसलों की पैदावार बढ़ाने में मदद करती हैं और इनके उप-उत्पादों से अतिरिक्त आय भी प्राप्त की जा सकती है। उन्होंने केंद्र द्वारा आयोजित की जा रही अन्य व्यावसायिक प्रशिक्षण गतिविधियों और प्रसार कार्यक्रमों की जानकारी भी दी।
डॉ. गुरबीर कौर, सहायक प्रोफेसर (पौधा रोग विज्ञान) एवं कोर्स कोऑर्डिनेटर ने मधुमक्खी पालन के क्षेत्र की अर्थव्यवस्था के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने प्रशिक्षणार्थियों को मधुमक्खियों की विभिन्न प्रजातियों, विशेष रूप से इटालियन मधुमक्खी (एपिस मेलिफेरा), उसकी शारीरिक संरचना, परिवार की संरचना तथा मौसम के अनुसार देखभाल के बारे में जानकारी दी। उन्होंने मधुमक्खी पालन में उपयोग होने वाले आवश्यक उपकरणों जैसे मधुमक्खी पेटी, स्मोकर, अनकैपिंग चाकू, शहद निकालने की मशीन, क्वीन एक्सक्लूडर तथा सुरक्षा कपड़ों के उपयोग का प्रदर्शन भी किया।

उन्होंने शहद के पौष्टिक एवं औषधीय उपयोग, पतझड़, सर्दी, गर्मी और वसंत ऋतु के दौरान मधुमक्खियों की देखभाल, आहार, परिवारों का विभाजन, रानी पालन तथा परिवारों को एकत्रित करने के संबंध में विस्तार से चर्चा की। उन्होंने प्रोपोलिस, मोम, रॉयल जेली, मधुमक्खी के विष और पराग जैसे उप-उत्पादों के महत्व के बारे में भी बताया। साथ ही यूरोपियन एवं अमेरिकन फाउल ब्रूड, थाई सैक ब्रूड जैसी बीमारियों तथा मोम सुंडी और वर्रोआ माइट जैसे कीटों की रोकथाम के बारे में जानकारी दी।
के.वी.के. खेड़ी में स्थापित मधुमक्खी पालन इकाई में प्रशिक्षणार्थियों को मधुमक्खी पेटियों की देखभाल, ब्रूड की जांच तथा शहद निकालने का व्यावहारिक प्रशिक्षण भी दिया गया।
डॉ. हरदीप सिंह, उप निदेशक बागवानी, संगरूर ने नेशनल बी बोर्ड और नेशनल हॉर्टिकल्चर मिशन द्वारा नई इकाइयां स्थापित करने, शहद प्रसंस्करण और विपणन के लिए दी जाने वाली सब्सिडी एवं वित्तीय सहायता योजनाओं की जानकारी साझा की।
डॉ. अमनप्रीत कौर, एच.डी.ओ., धूरी ने राज्य बागवानी विभाग की ओर से मधुमक्खी पालन को बढ़ावा देने तथा एफ.पी.ओ./स्वयं सहायता समूह बनाने से संबंधित योजनाओं के बारे में बताया।
प्रशिक्षणार्थियों को एक प्रगतिशील मधुमक्खी पालक के फार्म का दौरा भी करवाया गया। अंत में प्रतिभागियों को अपना उद्यम शुरू करने के लिए प्रेरित किया गया तथा मधुमक्खी पालन से संबंधित साहित्य भी वितरित किया गया।





