कुरुक्षेत्र, 5 अक्टूबर 2026 (संजीव शर्मा): महानिदेशक आयुष विभाग हरियाणा के दिशा निर्देश में एवं जिला आयुर्वेदिक अधिकारी डॉ मंजू शर्मा के मार्गदर्शन में आज सेवा संकल्प अभियान के तहत स्थानीय व मौसमी खाद्य पदार्थों के माध्यम से पोषण और पोषण वाटिका अवधारणा विषय पर एक व्यापक जिला-स्तरीय जागरूकता अभियान का आयोजन किया गया। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य पारंपरिक पोषण ज्ञान, सतत स्वास्थ्य प्रथाओं और आयुर्वेद के माध्यम से निवारक स्वास्थ्य सेवा को बढ़ावा देना था। इस अवसर पर विभिन्न स्वास्थ्य केंद्रों, आंगनवाड़ी केंद्रों और आयुष चिकित्सालयों में विशेष सत्र आयोजित किए गए, जिसमें आंगनवाड़ी व आशा कार्यकर्ताओं, रोगियों और स्थानीय नागरिकों ने बढ़-चढक़र हिस्सा लिया।
कार्यक्रम के दौरान आयुष चिकित्सकों और अन्य स्टाफ ने लोगों को पोषण वाटिका स्थापित करने, स्थानीय औषधीय जड़ी-बूटियों व पौधों की पहचान करने और उनके स्वास्थ्य लाभों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। इसके साथ ही, आयुर्वेद के तीन स्तंभों, दैनिक जीवन में मौसमी व पौष्टिक भोजन के महत्व और स्वस्थ जीवन शैली पर भी प्रकाश डाला गया। कई केंद्रों पर इस जागरूकता गतिविधि के साथ-साथ स्वास्थ्य जांच शिविर, मुफ्त दवा वितरण और योग सत्र का भी आयोजन किया गया, जिससे कुल 218 से अधिक प्रतिभागियों ने लाभ उठाया। इस प्रकार ज्योतिसर, पिपली, खरकाली, मुर्तजापुर, बनी, यारा, कृष्णा नगर गामरी, सारसा, कलाल माजरा, ठोल, चनारथल और लुखी सहित जिले के विभिन्न क्षेत्रों में यह अभियान अत्यंत उत्साह और सफलता के साथ संपन्न हुआ।

सेवा संकल्प अभियान के तहत रामगढ़ रोड में आयुर्वेदिक चिकित्सा शिविर आयोजित किया गया। शिविर में कुल 92 रोगियों की जांच कर रोग एवं प्रकृति अनुसार आयुर्वेदिक औषधियां प्रदान की गईं। शिविर के सफल आयोजन में डॉ. महक गर्ग, डॉ. प्रवण सिंह, विजय कुमार फार्मासिस्ट एवं देवेंद्र कुमार का महत्वपूर्ण योगदान रहा। इसी क्रम में सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत स्थानीय एवं मौसमी खाद्य पदार्थों के माध्यम से पोषण संवर्धन तथा पोषण वाटिका की अवधारणा पर आयुष जागरूकता शिविर आयोजित किया गया। साथ ही संजीवनी योग कार्यक्रम के तहत योग सत्र आयोजित कर स्वस्थ जीवनशैली के प्रति जागरूक किया गया। शिविर में कुल 103 लोगों ने आयुष ओपीडी सेवाओं का लाभ लिया, जिसमें 61 आयुर्वेदिक एवं 42 होम्योपैथिक ओपीडी रही। 21 प्रतिभागियों ने संजीवनी योग सत्र में भाग लिया। पोषण वाटिका की अवधारणा और मौसमी खान-पान अपनाकर हम न केवल रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ा सकते है, बल्कि स्वस्थ समाज का निर्माण भी कर सकते है। उन्होंने इस सफल आयोजन के लिए सभी आयुष चिकित्सकों और अन्य आयुष स्टाफ की सराहना की।





