नई दिल्ली, 5 अक्टूबर, 2026 (गुरमीत सिंह तुंग): पंजाब समेत पांच राज्यों में आगामी विधानसभा चुनावों की तैयारियों ने रफ्तार पकड़ ली है। भारतीय चुनाव आयोग के वरिष्ठ अधिकारी, उप चुनाव आयुक्तों की अगुवाई में, चुनावी व्यवस्थाओं का जमीनी स्तर पर जायजा लेने के लिए राज्यों का दौरा करेंगे। इन दौरों में गोवा, उत्तराखंड, पंजाब, मणिपुर और उत्तर प्रदेश शामिल हैं। उप चुनाव आयुक्तों की टीमों का दौरा गोवा से शुरू होगा, जिसके बाद उत्तराखंड, पंजाब और मणिपुर का दौरा किया जाना है। उत्तर प्रदेश के दौरे की तारीख अभी तय नहीं की गई है। पंजाब में टीम का दौरा अक्टूबर के तीसरे सप्ताह में होने की जानकारी सामने आई है। इस दौरान चुनाव अधिकारियों के साथ बैठकों के अलावा मतदाता सूचियों, मतदान केंद्रों, चुनावी कर्मचारियों, सुरक्षा व्यवस्था और अन्य आवश्यक तैयारियों की स्थिति का जायजा लिया जा सकता है।
2027 के चुनावों के लिए प्रक्रिया तेज: चुनाव आयोग के उपलब्ध दस्तावेजों के अनुसार पंजाब विधानसभा का मौजूदा कार्यकाल 16 मार्च 2027, गोवा का 14 मार्च 2027, मणिपुर का 13 मार्च 2027, उत्तराखंड का 28 मार्च 2027 और उत्तर प्रदेश का 22 मई 2027 को समाप्त होना है। इसी वजह से इन राज्यों में चुनावी व्यवस्थाओं से संबंधित प्रक्रिया पहले ही शुरू की जा रही है।
चुनाव आयोग द्वारा चुनावी प्रक्रिया के एक महत्वपूर्ण हिस्से के रूप में मतदाता सूचियों की तैयारी और संशोधन पर भी ध्यान दिया जा रहा है। आयोग के दस्तावेज में पंजाब के लिए 1 अक्टूबर 2026 को पात्रता तिथि निर्धारित की गई है और इससे संबंधित मतदाता सूची प्रक्रिया की समय-सारणी भी जारी की गई है।
ई.वी.एम. और वी.वी.पी.ए.टी. की जांच भी महत्वपूर्ण: चुनावी तैयारियों में इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों (EVM) और VVPAT मशीनों की तकनीकी जांच भी शामिल है। रिपोर्टों के मुताबिक उत्तर प्रदेश और गोवा में मशीनों की प्रथम स्तर की जांच की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। इस प्रक्रिया में सरकारी कंपनियों Bharat Electronics Limited (BEL) और Electronics Corporation of India Limited (ECIL) के इंजीनियर मशीनों की जांच करते हैं। राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों की मौजूदगी में मॉक पोल के जरिए मशीनों की कार्यप्रणाली की भी जांच की जाती है।
चुनाव आयोग के मैदानी दौरे को इस पूरी प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है। टीमों द्वारा राज्य के मुख्य चुनाव अधिकारियों के साथ तैयारियों की समीक्षा करने के बाद आवश्यक सुधारों और व्यवस्थाओं को लेकर दिशा-निर्देश दिए जा सकते हैं।
फिलहाल विधानसभा चुनावों की तारीखों का ऐलान नहीं किया गया है। आमतौर पर चुनाव आयोग द्वारा चुनाव कार्यक्रम की घोषणा संबंधित विधानसभाओं के कार्यकाल की समाप्ति से पहले की जाती है।





