नई दिल्ली, 6 अक्टूबर 2026 (चौधरी प्रभजीत सिंह): ओपन ए.आई. ने ए.आई. से तैयार किए गए टेक्स्ट की पहचान के लिए ‘टेक्स्टग्रेन’ नाम की नई अदृश्य वॉटरमार्किंग तकनीक विकसित की है। कंपनी आने वाले हफ्तों में यूरोपीय संघ (ई.यू.) में चैटजीपीटी और कोडेक्स के योग्य टेक्स्ट आउटपुट में इसे लागू करने जा रही है।
टेक्स्टग्रेन टेक्स्ट में कोई अलग कैरेक्टर, स्पेस या दिखाई देने वाला निशान नहीं जोड़ता। इसके बजाय ए.आई. द्वारा शब्द चुनने के तरीके में मामूली सांख्यिकीय बदलाव किए जाते हैं, जिन्हें विशेष डिटेक्शन सिस्टम पहचान सकता है। सामान्य कॉपी-पेस्ट से यह सिग्नल खत्म नहीं होता, हालांकि ज्यादा एडिटिंग या दूसरी भाषा में अनुवाद करने से इसकी पहचान मुश्किल हो सकती है।
ओपन ए.आई. के परीक्षणों के अनुसार, करीब 200 टोकन के टेक्स्ट में लगभग 80% और 400 टोकन में करीब 95% मामलों में वॉटरमार्क पहचाना जा सका। वहीं, शब्दों में बदलाव करने पर डिटेक्शन क्षमता काफी कम हो गई। गणित जैसे विषयों में भी इसकी प्रभावशीलता अपेक्षाकृत कम पाई गई।
कंपनी का कहना है कि टेक्स्टग्रेन से यह पता नहीं चलेगा कि टेक्स्ट किस यूजर ने बनाया, कौन-सा प्रॉम्प्ट इस्तेमाल हुआ या उसमें इंसान का कितना योगदान है। साथ ही, ओपन ए.आई. के परीक्षणों में वॉटरमार्क लगाने से ए.आई. के जवाबों की गुणवत्ता पर कोई महत्वपूर्ण असर नहीं पाया गया।
ई.यू. में इसकी शुरुआत ई.यू. ए.आई. एक्ट के तहत ए.आई. -जनरेटेड कंटेंट को मशीन-रीडेबल तरीके से पहचानने योग्य बनाने की दिशा में उठाया गया कदम है। फिलहाल इसे वैश्विक चैटजीपीटी यूजर्स के लिए डिफॉल्ट बनाने की घोषणा नहीं की गई है।





