इस्लामाबाद, 9 अक्टूबर, 2026 (जगजीत सिंह): पाकिस्तान की जेलों में निर्धारित क्षमता से कहीं अधिक कैदियों की मौजूदगी ने जेल प्रबंधन और मानवाधिकारों से जुड़ी चुनौतियों को गंभीर बना दिया है। मानवाधिकार आयोग पाकिस्तान (HRCP) की एक नई नीति रिपोर्ट के अनुसार, देश की जेलों में बड़ी संख्या ऐसे लोगों की है, जिनके मामलों में अभी तक अदालतों का फैसला नहीं आया है।
निर्धारित क्षमता से अधिक कैदी: Beyond the Prison Wall: Reducing Overcrowding in Pakistan’s Prisons शीर्षक वाली रिपोर्ट में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया गया है कि जून से अगस्त 2024 के दौरान पाकिस्तान की जेलों में कैदियों की औसत संख्या निर्धारित क्षमता के 152.2 प्रतिशत तक पहुंच गई थी।
रिपोर्ट के अनुसार, विचाराधीन कैदियों की हिस्सेदारी वर्ष 2017 में 66 प्रतिशत थी, जो 2024 में बढ़कर 73.41 प्रतिशत हो गई। इसके प्रमुख कारणों में जमानत मिलने में कठिनाइयां, अदालती सुनवाई में देरी, गिरफ्तारियां और जांच प्रक्रिया में खामियां शामिल हैं।
पाकिस्तानी पंजाब की जेलों में स्थिति और गंभीर: रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में जेलों में भीड़ की समस्या और अधिक गंभीर है। वर्ष 2024 के दौरान यहां जेलों में कैदियों की संख्या निर्धारित क्षमता के 173.6 प्रतिशत तक दर्ज की गई थी।
सितंबर 2026 के आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया गया है कि पंजाब की 45 जेलों में 39,204 कैदियों को रखने की आधिकारिक क्षमता है, जबकि इनमें 74,773 कैदी बंद हैं। यह संख्या निर्धारित क्षमता का लगभग 190.73 प्रतिशत है।
इनमें से 54,932 कैदी विचाराधीन हैं। इनमें 52,847 पुरुष, 1,316 महिलाएं और 769 नाबालिग शामिल बताए गए हैं।
स्वास्थ्य और स्वच्छता को लेकर चिंता: रिपोर्ट के अनुसार, नई जेलों, बैरकों और अन्य सुविधाओं के निर्माण के बावजूद कैदियों की बढ़ती संख्या की समस्या का समाधान नहीं हो पाया है। जेलों में अत्यधिक भीड़ के कारण साफ-सफाई, स्वास्थ्य सेवाओं और रहने की सुविधाओं पर दबाव बढ़ रहा है।
इसके अलावा, बीमारियों के फैलने, मानसिक स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने और हिंसा की आशंका को लेकर भी चिंता जताई गई है।
जमानत व्यवस्था में सुधार की मांग: मानवाधिकार आयोग ने जेलों में भीड़ कम करने के लिए जमानत व्यवस्था की समीक्षा करने और न्यायिक प्रक्रिया में तेजी लाने की आवश्यकता पर जोर दिया है।
रिपोर्ट का मुख्य संदेश है कि जिन लोगों के खिलाफ अभी आरोप साबित नहीं हुए हैं, उनके अधिकारों की रक्षा करते हुए जमानत और न्याय तक पहुंच को बेहतर बनाया जाना चाहिए।
पाकिस्तान की जेलों में लगातार बढ़ती भीड़ वहां की न्याय व्यवस्था के लिए एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। इस समस्या के समाधान के लिए केवल जेलों की क्षमता बढ़ाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि अदालती देरी को कम करना और जमानत प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाना भी जरूरी है।