नई दिल्ली, 10 अक्टूबर 2026 (चौधरी प्रभजीत सिंह): भारतीय सिनेमा में कुछ निर्देशक अपनी फिल्मों के जरिए ऐसी पहचान बनाते हैं, जो उन्हें दुनिया भर के दर्शकों के बीच लोकप्रिय बना देती है। एसएस राजामौली इसी श्रेणी के फिल्मकार हैं। भव्य सेट, दमदार एक्शन, अनूठी कहानियों और शानदार विजुअल इफेक्ट्स के जरिए उन्होंने भारतीय फिल्मों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाई है। 10 अक्टूबर को जन्मदिन के अवसर पर उनके फिल्मी सफर, बड़ी उपलब्धियों और आगामी प्रोजेक्ट को लेकर एक बार फिर चर्चा हो रही है।
पिता से सीखा फिल्म निर्माण का हुनर: एस.एस. राजामौली का पूरा नाम कोडुरी श्रीशैला श्री राजामौली है। उनका जन्म 10 अक्टूबर 1973 को हुआ था। उनके पिता वी. विजयेंद्र प्रसाद दक्षिण भारतीय फिल्म उद्योग के प्रसिद्ध पटकथा लेखक हैं। राजामौली ने अपने करियर के शुरुआती दौर में पिता के साथ काम करते हुए फिल्म लेखन और कहानी कहने की बारीकियां सीखीं।
शुरुआत में उनका लक्ष्य लेखक बनने का था। उन्होंने कई पटकथाएं लिखीं, लेकिन जब उन्हें अपेक्षित सफलता नहीं मिली तो उन्होंने निर्देशन की राह चुनी। धीरे-धीरे यही फैसला उनके करियर का सबसे बड़ा मोड़ साबित हुआ। टेलीविजन और विज्ञापनों से अनुभव हासिल करने के बाद उन्होंने फिल्मों में अपनी अलग शैली विकसित की।
‘मगधीरा’ से ‘ईगा’ तक, अनोखी कहानियों ने बनाई पहचान: राजामौली ने वर्ष 2001 में फिल्म ‘स्टूडेंट नंबर 1’ से निर्देशक के रूप में अपनी पहचान बनानी शुरू की। इसके बाद ‘सिम्हाद्रि’ ने उनकी लोकप्रियता बढ़ाई। वर्ष 2009 में रिलीज हुई ‘मगधीरा’ ने उन्हें बड़े स्तर पर सफलता दिलाई। पुनर्जन्म और प्रेम पर आधारित इस फिल्म की भव्यता तथा तकनीकी प्रस्तुति ने दर्शकों को प्रभावित किया। वर्ष 2012 में आई ‘ईगा’, जिसे हिंदी में ‘मक्खी’ के नाम से जाना जाता है, उनकी रचनात्मकता का एक और उदाहरण बनी। एक मक्खी को कहानी का मुख्य पात्र बनाकर उन्होंने साबित किया कि प्रभावशाली निर्देशन और मजबूत पटकथा के दम पर असामान्य विचार भी दर्शकों का दिल जीत सकते हैं।
‘बाहुबली’ ने भारतीय फिल्मों को दिया नया पैमाना: राजामौली के करियर में ‘बाहुबली: द बिगिनिंग’ और ‘बाहुबली 2: द कन्क्लूजन’ ने ऐतिहासिक भूमिका निभाई। विशाल सेट, युद्ध के दृश्य, दमदार किरदार और रहस्य से भरी कहानी ने इन फिल्मों को देशव्यापी लोकप्रियता दिलाई। वर्ष 2017 में रिलीज हुई ‘बाहुबली 2’ ने वैश्विक बॉक्स ऑफिस पर 1,000 करोड़ रुपये से अधिक की कमाई करने वाली पहली भारतीय फिल्म बनकर इतिहास रचा। फिल्म की सफलता ने यह भी दिखाया कि भारतीय भाषाओं में बनी कहानियां बड़े पैमाने पर अंतरराष्ट्रीय दर्शकों तक पहुंच सकती हैं।
‘आर.आर.आर.’ के ‘नाटू नाटू’ ने दुनिया में बजाया भारत का डंका: वर्ष 2022 में रिलीज हुई ‘आरआरआर’ ने राजामौली को वैश्विक स्तर पर और बड़ी पहचान दिलाई। फिल्म के गीत ‘नाटू नाटू’ ने 2023 में सर्वश्रेष्ठ मूल गीत का ऑस्कर और गोल्डन ग्लोब पुरस्कार जीतकर भारतीय संगीत और सिनेमा के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की। फिल्म को अंतरराष्ट्रीय समीक्षकों से भी सराहना मिली। इसकी भव्य प्रस्तुति, एक्शन दृश्यों और भावनात्मक कहानी ने दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में दर्शकों का ध्यान आकर्षित किया।
पुरस्कारों और उपलब्धियों से भरा सफर: राजामौली को भारतीय सिनेमा में योगदान के लिए वर्ष 2016 में पद्मश्री से सम्मानित किया गया था। उनके निर्देशन में बनी फिल्मों ने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई पुरस्कार तथा सम्मान हासिल किए हैं। उनकी सबसे बड़ी उपलब्धियों में भारतीय फिल्मों को वैश्विक दर्शकों के बीच नई पहचान दिलाना भी शामिल है।
‘वाराणसी’ पर टिकी दर्शकों की नजरें: राजामौली की आगामी फिल्म ‘वाराणसी’ को लेकर भी काफी उत्सुकता है। फिल्म में महेश बाबू, प्रियंका चोपड़ा और पृथ्वीराज सुकुमारन प्रमुख भूमिकाओं में हैं। इसे भारतीय पौराणिक कथाओं, लोककथाओं और रोमांचक तत्वों के मेल के रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है। फिल्म के बड़े बजट और भव्य स्तर को लेकर पहले से ही चर्चा है। इसकी रिलीज अप्रैल 2027 के लिए निर्धारित बताई जा रही है। हालांकि, अंतिम रिलीज तारीख और अन्य विवरणों के लिए निर्माताओं की आधिकारिक घोषणाओं पर नजर रखना जरूरी है। एस.एस. राजामौली का फिल्मी सफर इस बात का उदाहरण है कि मजबूत कहानी, नए विचार और तकनीक का प्रभावी इस्तेमाल किसी फिल्म को सीमाओं से परे पहुंचा सकता है। ‘मगधीरा’, ‘बाहुबली’ और ‘आरआरआर’ जैसी फिल्मों के जरिए उन्होंने भारतीय सिनेमा में अपनी अलग पहचान बनाई है। अब दर्शकों को उनकी अगली फिल्म ‘वाराणसी’ से भी ऐसी ही बड़ी उम्मीदें हैं।