नई दिल्ली, 15 अक्टूबर 2026 (हर्षप्रीत कौर): संगीत की दुनिया में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (ए.आई.) के बढ़ते इस्तेमाल के बीच यूट्यूब ने श्रोताओं को गानों की उत्पत्ति के बारे में अधिक स्पष्ट जानकारी देने की दिशा में कदम उठाया है। कंपनी ए.आई. की मदद से तैयार किए गए संगीत की पहचान बताने के लिए खास लेबलिंग व्यवस्था लागू कर रही है। इसका उद्देश्य श्रोताओं को यह समझने में मदद करना है कि किसी गाने को बनाने में जनरेटिव ए.आई. का इस्तेमाल हुआ है या नहीं।
ए.आई. टूल्स की मदद से अब धुन, संगीत संयोजन और गायन जैसी चीजें तैयार करना संभव हो गया है। इससे संगीत निर्माण के नए अवसर खुले हैं, लेकिन साथ ही असली और ए.आई. से तैयार आवाजों के बीच अंतर पहचानना भी मुश्किल हुआ है। ऐसे में डिजिटल म्यूजिक प्लेटफॉर्म पर पारदर्शिता बढ़ाना कलाकारों, संगीत कंपनियों और श्रोताओं के लिए महत्वपूर्ण हो गया है।
यूट्यूब म्यूज़िक से शुरू हुई लेबलिंग व्यवस्था
यूट्यूब ने अपने आधिकारिक ब्लॉग में बताया कि जनरेटिव ए.आई. संगीतकारों को प्रयोग करने और नए तरीके से संगीत बनाने के अवसर देता है। हालांकि, श्रोताओं की यह अपेक्षा भी बढ़ रही है कि उन्हें ए.आई. से तैयार सामग्री के बारे में स्पष्ट जानकारी मिले।
कंपनी की घोषित योजना के अनुसार, यूट्यूब म्यूज़िक पर ए.आई. से जुड़े लेबल की शुरुआत की जा रही है। इसके बाद मुख्य यूट्यूब प्लेटफॉर्म पर भी इस व्यवस्था का विस्तार किए जाने की बात कही गई है।
यहां ध्यान देने वाली बात है कि ए.आई. लेबल का उद्देश्य गाने को नकली या खराब घोषित करना नहीं, बल्कि उसके निर्माण में ए.आई. की भूमिका के बारे में जानकारी देना है। किसी गाने में ए.आई. का इस्तेमाल किस स्तर पर हुआ है, यह जानने के लिए लेबल के साथ उपलब्ध अतिरिक्त जानकारी भी महत्वपूर्ण हो सकती है।
किन गानों पर दिखाई देगा ए.आई. लेबल?
ए.आई. की मदद से तैयार किए गए संगीत में कई तरह की तकनीकों का इस्तेमाल हो सकता है। उदाहरण के लिए, ए.आई. से नई धुन बनाना, कृत्रिम गायन तैयार करना या किसी मौजूदा आवाज जैसी सुनाई देने वाली आवाज उत्पन्न करना। ऐसे मामलों में सामग्री के निर्माण में ए.आई. की भूमिका का खुलासा महत्वपूर्ण है।
हालांकि, केवल किसी गाने की आवाज असामान्य लगने के आधार पर उसे ए.आई. से बना हुआ मान लेना सही नहीं होगा। इसी तरह, किसी गाने में ए.आई. टूल का सीमित इस्तेमाल होने और पूरा गाना ए.आई. से तैयार होने के बीच भी अंतर है। इसलिए लेबलिंग व्यवस्था की उपयोगिता इस बात पर निर्भर करेगी कि ए.आई. के इस्तेमाल को किस तरह परिभाषित किया जाता है और उसकी जानकारी कितनी स्पष्ट दी जाती है।






