क्या विदेश में रहने वाले पंजाबियों को भारत में बोलने, जुड़ने और विरोध करने का अधिकार है? क्या सरकार एक आदेश जारी करके उन्हें देश छोड़ने के लिए कह सकती है?
लाखों पंजाबी कनाडा, अमेरिका, ब्रिटेन और ऑस्ट्रेलिया में रहते हैं। इनमें से बहुत से लोग अपने पास ओसीआई (ओवरसीज सिटिजन ऑफ इंडिया) कार्ड रखते हैं और आम बोलचाल में इसे “दोहरी नागरिकता” कह देते हैं। लेकिन कानून की नजर में यह नागरिकता नहीं, बल्कि एक विशेष आव्रजन (इमिग्रेशन) दर्जा है। आज इस अंतर को समझना पहले से कहीं अधिक जरूरी है।
यह व्यवस्था वर्ष 2005 में नागरिकता अधिनियम, 1955 के तहत शुरू की गई थी। यह भारतीय मूल के उन विदेशी नागरिकों के लिए है, जिनका संबंध पाकिस्तान या बांग्लादेश से नहीं है। इसके तहत आजीवन बहु-प्रवेश वीजा मिलता है और एफआरआरओ के पास पंजीकरण से छूट प्राप्त होती है। अन्य सुविधाएं केंद्र सरकार धारा 7बी(1) के तहत अधिसूचना जारी करके प्रदान करती है। ओसीआई का दर्जा प्राप्त किए हुए पांच वर्ष पूरे होने और उनमें से एक वर्ष भारत में रहने के बाद धारा 5(1)(जी) के तहत भारतीय नागरिकता के लिए आवेदन किया जा सकता है।
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि ओसीआई कार्डधारक कानूनी रूप से एक “विदेशी नागरिक” है। आव्रजन एवं विदेशी नागरिक अधिनियम, 2025 की धारा 2(एफ) के अनुसार, जो व्यक्ति भारत का नागरिक नहीं है, वह विदेशी है।
ओ.सी.आई. कार्डधारकों को कौन-से अधिकार प्राप्त हैं?
धारा 7बी(1) के अनुसार, ओसीआई कार्डधारकों को वही अधिकार प्राप्त होते हैं, जिन्हें केंद्र सरकार अधिसूचित करती है। यानी ये अधिकार सरकार की अधिसूचनाओं और निर्धारित शर्तों पर निर्भर करते हैं, जन्मसिद्ध अधिकार नहीं हैं।
धारा 7बी(2) में कुछ अधिकार स्पष्ट रूप से नहीं दिए गए हैं:
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सरकारी नौकरियों में समान अवसर का अधिकार (अनुच्छेद 16)।
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राष्ट्रपति (अनुच्छेद 58), उपराष्ट्रपति (अनुच्छेद 66), सुप्रीम कोर्ट (अनुच्छेद 124) और हाई कोर्ट (अनुच्छेद 217) के न्यायाधीश बनने की पात्रता।
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जनप्रतिनिधित्व अधिनियम के तहत मतदाता बनने तथा संसद या विधानसभा/विधान परिषद का सदस्य बनने का अधिकार।
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सरकारी सेवाओं में नियुक्ति का अधिकार।
संपत्ति के मामले में ओसीआई कार्डधारकों को एनआरआई के समान सुविधाएं मिलती हैं, लेकिन कृषि भूमि, फार्म हाउस और प्लांटेशन संपत्ति खरीदने पर प्रतिबंध है। पंजाब के संदर्भ में यह विशेष महत्व रखता है। मार्च 2021 की अधिसूचना के अनुसार, पत्रकारिता, शोध, मिशनरी गतिविधियों और पर्वतारोहण जैसी गतिविधियों के लिए पहले अनुमति लेना आवश्यक है।
क्या ओ.सी.आई. कार्डधारकों को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता प्राप्त है?
भारतीय संविधान का अनुच्छेद 19 छह स्वतंत्रताएं प्रदान करता है—बोलने और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, शांतिपूर्ण सभा करने, संगठन बनाने, भारत में कहीं भी घूमने, कहीं भी बसने तथा कोई भी पेशा या व्यवसाय करने की स्वतंत्रता। लेकिन ये अधिकार केवल भारतीय नागरिकों को प्राप्त हैं।
ओसीआई कार्डधारक भारतीय नागरिक नहीं होते, इसलिए वे इन अधिकारों का संवैधानिक दावा नहीं कर सकते। बोलने, सभा करने और संगठन बनाने की स्वतंत्रता केवल भारतीय नागरिकों के लिए है, जबकि विदेशियों को अनुच्छेद 14 और 21 के तहत संरक्षण प्राप्त रहता है।
अनुच्छेद 14 प्रत्येक व्यक्ति को कानून के समक्ष समानता का अधिकार देता है और अनुच्छेद 21 जीवन तथा व्यक्तिगत स्वतंत्रता की रक्षा करता है, भले ही संबंधित व्यक्ति विदेशी नागरिक ही क्यों न हो।
इसलिए मनमानी कार्रवाई, बिना सुनवाई के दंड या गैरकानूनी हिरासत के खिलाफ अदालत का दरवाजा खटखटाया जा सकता है। हालांकि, किसी विदेशी नागरिक को भारत में रहने का असीमित संवैधानिक अधिकार प्राप्त नहीं है।
यहां एक महत्वपूर्ण बात समझनी होगी। ओसीआई नियमों में हर शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन में शामिल होने पर सीधे और स्पष्ट रूप से प्रतिबंध नहीं है, लेकिन राजनीतिक गतिविधियों से संबंधित आव्रजन शर्तें और प्रतिबंध लागू हो सकते हैं। इसी अस्पष्टता के कारण विवाद उत्पन्न होते हैं।
किन परिस्थितियों में ओसीआई पंजीकरण रद्द किया जा सकता है?
केंद्र सरकार केवल कानून में निर्धारित आधारों पर ओसीआई पंजीकरण रद्द कर सकती है। इनमें प्रमुख आधार निम्नलिखित हैं:
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धोखाधड़ी, गलत जानकारी या महत्वपूर्ण तथ्य छिपाकर कार्ड प्राप्त करना।
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संविधान के प्रति असंतोष या उसके प्रति निष्ठा न रखने का प्रदर्शन करना।
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युद्ध के दौरान शत्रु के साथ व्यापार या संचार करना।
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पंजीकरण के पांच वर्षों के भीतर दो वर्ष या उससे अधिक की कैद की सजा होना।
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भारत की संप्रभुता, सुरक्षा या जनहित में पंजीकरण रद्द करना आवश्यक होना।
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विवाह के आधार पर प्राप्त कार्ड के मामले में विवाह का टूटना या निर्धारित अवधि के भीतर धोखाधड़ी से विवाह किए जाने का मामला सामने आना।
वर्ष 2019 के संशोधन में एक अतिरिक्त आधार भी शामिल किया गया—नागरिकता अधिनियम या केंद्र सरकार की अधिसूचना में उल्लिखित किसी अन्य कानून का उल्लंघन।
इस संबंध में अगस्त 2025 की अधिसूचना के अनुसार, जिस ओसीआई कार्डधारक को दो वर्ष या उससे अधिक की कैद हुई हो, अथवा जिसके खिलाफ ऐसे अपराध में आरोपपत्र दाखिल किया गया हो, जिसमें सात वर्ष या उससे अधिक की सजा का प्रावधान है, उसका पंजीकरण रद्द किया जा सकता है।
धारा 7डी: सुनवाई का अधिकार सबसे महत्वपूर्ण कानूनी सुरक्षा
यहां सबसे महत्वपूर्ण कानूनी सुरक्षा नागरिकता अधिनियम की धारा 7डी में निहित है। इसके अनुसार, ओसीआई कार्डधारक को सुनवाई का उचित अवसर दिए बिना उसका पंजीकरण रद्द करने का आदेश पारित नहीं किया जा सकता।
दिल्ली हाई कोर्ट में पहुंचे मामलों में भी यह सवाल उठा है। एक मामले में याचिकाकर्ता को हवाई अड्डे पर पहुंचने के बाद ही पता चला कि उसका कार्ड रद्द किया जा चुका है।
एक अन्य मामले में, अशोक स्वैन से संबंधित प्रकरण में, अदालत ने अधिकारियों को धारा 7डी(ई) के इस्तेमाल के कारण स्पष्ट करने वाले विस्तृत आदेश पारित करने का निर्देश दिया।
इससे संदेश स्पष्ट है कि सरकार के पास व्यापक शक्तियां हैं, लेकिन वे असीमित नहीं हैं। बिना उचित कारण बताए जारी किया गया आदेश न्यायिक जांच के दौरान कमजोर पड़ सकता है।
आव्रजन एवं विदेशी नागरिक अधिनियम, 2025 क्या कहता है?
यह नया कानून अप्रैल 2025 में संसद द्वारा पारित किया गया था। इसने पासपोर्ट (भारत में प्रवेश) अधिनियम, 1920, विदेशी नागरिक पंजीकरण अधिनियम, 1939, विदेशी नागरिक अधिनियम, 1946 और आव्रजन (वाहकों की जिम्मेदारी) अधिनियम, 2000 को समाप्त कर दिया।
इस कानून में जाली पासपोर्ट या वीजा के मामलों में सात वर्ष तक की कैद और दस लाख रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान है।
धारा 7: केंद्र सरकार को विदेशियों के भारत में प्रवेश, प्रस्थान, उपस्थिति और आवागमन को नियंत्रित, सीमित या प्रतिबंधित करने के लिए आदेश जारी करने की शक्ति प्रदान करती है। उपधारा 7(2)(सी) के तहत सरकार किसी विदेशी नागरिक को भारत में या किसी विशेष क्षेत्र में रहने से रोक सकती है।
धारा 29: विदेशी नागरिकों को भारत से हटाने (रिमूवल) से संबंधित है। रिपोर्टों के अनुसार, कानून, नियमों या आदेशों का उल्लंघन होने अथवा सुरक्षा संबंधी प्रतिकूल रिपोर्ट मिलने की स्थिति में इसका इस्तेमाल किया जा सकता है।
दो कानूनों के बीच कानूनी टकराव
यहीं पर दोनों कानूनों के बीच महत्वपूर्ण कानूनी सवाल खड़ा होता है।
एक ओर, धारा 7डी ओसीआई कार्ड रद्द करने से पहले सुनवाई का अवसर देने की मांग करती है। दूसरी ओर, आव्रजन कानून की संबंधित धाराओं के तहत कार्ड रद्द किए बिना भी किसी व्यक्ति को भारत छोड़ने का निर्देश दिया जा सकता है।
इन प्रावधानों के बीच संबंध और उनकी सीमाओं पर सुप्रीम कोर्ट तथा हाई कोर्टों का अंतिम निर्णय अभी प्रतीक्षित है।
रिपोर्टों के मुताबिक, अमेरिकी नागरिक और अभिनेता इमरान खान को मुंबई में एक विरोध प्रदर्शन में शामिल होने के बाद एफआरआरओ ने 28 अक्टूबर तक भारत छोड़ने के लिए कहा है। नोटिस में धारा 7(2)(सी) और धारा 29 का उल्लेख किया गया है।
यह मामला अभी विचाराधीन है। इसलिए इससे संबंधित विवरण बदल सकते हैं और अंतिम कानूनी स्थिति का निर्धारण अदालत करेगी। हालांकि, इस मामले से प्रत्येक ओसीआई कार्डधारक को कुछ महत्वपूर्ण बातें समझने की जरूरत है।
ओ.सी.आई. कार्डधारकों के लिए पांच महत्वपूर्ण बातें
1. ओसीआई नागरिकता नहीं, बल्कि एक विशेष दर्जा है।
यह कानूनों, नियमों और सरकारी अधिसूचनाओं से बंधा हुआ है तथा निर्धारित परिस्थितियों में बदला या समाप्त किया जा सकता है।
2. अनुच्छेद 19 के अधिकार लागू नहीं होते।
राजनीतिक विरोध, धरने या संगठनों की गतिविधियों में शामिल होने से पहले कानूनी सलाह लेना उचित है। सोशल मीडिया पर की गई पोस्ट भी संबंधित परिस्थितियों में कानूनी जांच के दायरे में आ सकती हैं।
3. अनुच्छेद 14 और 21 कानूनी सुरक्षा प्रदान करते हैं।
ओसीआई कार्डधारक निष्पक्ष प्रक्रिया, उचित सुनवाई और कारणों सहित आदेश की मांग कर सकते हैं।
4. किसी भी सरकारी नोटिस को नजरअंदाज न करें।
निर्धारित समय-सीमा के भीतर जवाब देना जरूरी है। समय-सीमा चूकने से कानूनी बचाव कमजोर हो सकता है। आवश्यकता पड़ने पर हाई कोर्ट में रिट याचिका दायर करने का विकल्प भी उपलब्ध हो सकता है।
5. पूर्ण संवैधानिक अधिकारों के लिए भारतीय नागरिकता आवश्यक है।
धारा 5(1)(जी) के तहत निर्धारित शर्तें पूरी करने वाले ओसीआई कार्डधारकों के लिए भारतीय नागरिकता प्राप्त करने का कानूनी मार्ग उपलब्ध है।
सीधी बात यह है कि ओसीआई कार्ड भारत के साथ भावनात्मक, सांस्कृतिक और पारिवारिक संबंधों की कानूनी पहचान प्रदान करता है, लेकिन यह भारतीय नागरिकता का विकल्प नहीं है।
विदेश में रहने वाले पंजाबियों के लिए यह समझना जरूरी है कि भारत के साथ उनका संबंध केवल भावनात्मक नहीं, बल्कि कानूनी प्रावधानों से भी जुड़ा है। भारत में रहने, राजनीतिक गतिविधियों में भाग लेने और सरकारी आदेशों को चुनौती देने के अधिकारों की अपनी अलग-अलग कानूनी सीमाएं हैं।
सरकार को कानून के तहत कार्रवाई करने का अधिकार है, लेकिन उस अधिकार का इस्तेमाल भी लागू कानूनी प्रक्रियाओं और न्यायिक समीक्षा के अधीन है।
अस्वीकरण: यह लेख केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से है, कानूनी सलाह नहीं। किसी विशेष मामले में योग्य वकील से सलाह लें। लेखक वकील नहीं हैं।
गुरमीत सिंह तुंग
ब्यूरो चीफ (98552 21193)







