‘यमुना स्वच्छ अभियान’ और ‘चलो यमुना महा अभियान’ के तहत जनभागीदारी से चला सफाई अभियान, प्लास्टिक, फूल-मालाओं और पूजा सामग्री को हटाने पर जोर
नई दिल्ली, 19 अक्टूबर 2026 (छत्रपाल सिंह): यमुना नदी को स्वच्छ बनाने और उसके घाटों पर जमा कचरे को हटाने के उद्देश्य से दिल्ली में व्यापक सफाई अभियान चलाया गया। ‘यमुना स्वच्छ अभियान’ और ‘चलो यमुना महा अभियान’ के तहत आयोजित इस पहल में दिल्ली के सभी 70 विधानसभा क्षेत्रों में स्थित यमुना घाटों की सफाई के लिए लोगों ने भाग लिया। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, सुबह 7 बजे से 10 बजे तक चले इस अभियान में युवाओं, सामाजिक संगठनों, स्वयंसेवकों और स्थानीय निवासियों ने श्रमदान किया।
अभियान में मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, कैबिनेट मंत्रियों, भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष हर्ष मल्होत्रा, सांसदों और बड़ी संख्या में स्वयंसेवकों ने हिस्सा लिया। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, 19 से अधिक स्थानों पर घाटों की सफाई की गई। इनमें आईटीओ स्थित हाथी घाट और गीता कॉलोनी घाट प्रमुख रहे। अभियान का मुख्य उद्देश्य नदी के किनारों पर जमा ठोस कचरे को हटाना और लोगों को यमुना की स्वच्छता के प्रति जागरूक करना था।
हाथी घाट पर मुख्यमंत्री ने की सफाई, लोगों से की अपील
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने रविवार को आई.टी.ओ के. निकट हाथी घाट पर सफाई अभियान में भाग लिया। इस दौरान उन्होंने स्वयंसेवकों और स्थानीय लोगों के साथ नदी के किनारे से प्लास्टिक तथा अन्य कचरा उठाया। उन्होंने नागरिकों से अपील की कि वे यमुना के घाटों पर प्लास्टिक, पूजा सामग्री और दूसरे प्रकार का कचरा न फेंकें तथा सफाई बनाए रखने में सहयोग करें।
मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर साझा की गई जानकारी में बताया कि दिल्ली के विभिन्न हिस्सों में बड़ी संख्या में लोग यमुना के घाटों की सफाई के लिए एकत्र हुए। उन्होंने नदी के प्रति आस्था रखने वाले लोगों से उसकी स्वच्छता को भी अपनी जिम्मेदारी मानने का आग्रह किया।
घाटों पर मिला प्लास्टिक, फूल-माला और धार्मिक सामग्री का कचरा
सफाई अभियान के दौरान नदी के किनारों से प्लास्टिक, फूल-मालाएं, पूजा में इस्तेमाल होने वाली वस्तुएं और अन्य कचरा हटाया गया। मुख्यमंत्री के अनुसार, घाटों पर टूटी हुई मूर्तियां और धार्मिक अनुष्ठानों में उपयोग की जाने वाली सामग्री भी पड़ी मिली।
यह स्थिति धार्मिक गतिविधियों के बाद पूजा सामग्री के उचित निपटान की आवश्यकता को रेखांकित करती है। श्रद्धालुओं और स्थानीय निवासियों की भागीदारी के साथ-साथ कचरे के संग्रह, पृथक्करण और सुरक्षित निपटान की व्यवस्था भी नदी किनारे स्वच्छता बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण है।
अभियान में सरकारी अधिकारियों के अतिरिक्त गैर-सरकारी संगठनों, विद्यार्थियों, युवाओं और स्थानीय निवासियों ने भाग लिया। सामूहिक श्रमदान के माध्यम से घाटों पर जमा कचरे को हटाने और स्वच्छता के प्रति नागरिक जिम्मेदारी को बढ़ावा देने का प्रयास किया गया।
केवल घाटों की सफाई से दूर नहीं होगा नदी का प्रदूषण
यमुना की स्वच्छता के लिए घाटों पर सफाई अभियान चलाना महत्वपूर्ण है, लेकिन नदी को प्रदूषण मुक्त बनाने के लिए निरंतर प्रयासों की आवश्यकता होती है। नदी में पहुंचने वाले अनुपचारित सीवेज, घरेलू अपशिष्ट और औद्योगिक प्रदूषकों को नियंत्रित करना भी जरूरी है। इसलिए सफाई अभियानों के साथ सीवेज उपचार, अपशिष्ट प्रबंधन, प्रदूषण की निगरानी और संबंधित विभागों के बीच समन्वय की भूमिका अहम रहती है।
‘यमुना स्वच्छ अभियान’ और ‘चलो यमुना महा अभियान’ के तहत आयोजित इस कार्यक्रम का उद्देश्य जनभागीदारी को बढ़ाना और लोगों को नदी के संरक्षण से जोड़ना रहा। अभियान के माध्यम से नागरिकों को यह संदेश दिया गया कि नदी और उसके घाटों को स्वच्छ रखने की जिम्मेदारी केवल सरकारी विभागों की नहीं, बल्कि समाज के प्रत्येक व्यक्ति की भी है।
हालांकि, उपलब्ध जानकारी में अभियान के दौरान कुल कितने टन कचरे का संग्रह हुआ, कितने स्वयंसेवकों ने हिस्सा लिया और सफाई के बाद कचरे के निपटान की क्या व्यवस्था रही, इसका विस्तृत आंकड़ा नहीं दिया गया है। इसी तरह, इस अभियान के परिणामस्वरूप नदी के जल की गुणवत्ता में हुए किसी बदलाव का आंकड़ा भी उपलब्ध नहीं है।
यमुना की सफाई के लिए जनभागीदारी एक जरूरी कदम है। अभियान की दीर्घकालिक सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि घाटों की नियमित सफाई, कचरे के उचित निपटान और नदी में प्रदूषित पानी के प्रवाह को नियंत्रित करने के प्रयास कितनी निरंतरता से किए जाते हैं।






